आकाशवाणी के 90 वर्ष: देहरादून में संगीत संध्या का आयोजन

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May 14, 2026 - 00:38
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आकाशवाणी के 90 वर्ष: देहरादून में संगीत संध्या का आयोजन
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आकाशवाणी के 90 वर्ष: देहरादून में संगीत संध्या का आयोजन

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कम शब्दों में कहें तो, आकाशवाणी ने अपने 90 साल पूरे होने पर देहरादून में संगीत का आयोजन किया, जहां कलाकारों ने विभिन्न शास्त्रीय रागों की प्रस्तुतियां दीं। यह एक ऐसा कार्यक्रम था जो भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा को जीवित करता है।

आकाशवाणी की ऐतिहासिक यात्रा

देहरादून। भारत के लोक सेवा प्रसारक आकाशवाणी ने अपने 90 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में बुधवार को देहरादून में एक विशेष ‘शास्त्रीय एवं उप-शास्त्रीय संगीत संध्या’ का आयोजन किया। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम ने भारतीय संगीत और संस्कृति की धरोहर को रोशन किया।

कार्यक्रम की शुरुआत

कार्यकम का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्री हेमंत बी० आड़े, निदेशक, भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उन्होंने आकाशवाणी के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि यह देश की आवाज बना हुआ है और स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज के आधुनिक भारत तक इसका योगदान अतुलनीय है। उन्होंने बताया कि आकाशवाणी ने संस्कृति और संगीत की ऐसी विरासत को संजोया है, जो हमें मन की शांति और जीवन की नई ऊर्जा देती है।

विशिष्ट अतिथियों के विचार

कार्यक्रम के विशेष अतिथि आर० के० बनवारी, उपनिदेशक, जनगणना कार्य निदेशालय (उत्तराखंड) ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपने सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में मदद करते हैं। ये आयोजन सिर्फ संगीत नहीं बल्कि भारतीयता का प्रतीक हैं।

कलाकारों की प्रस्तुति

कार्यक्रम में आकाशवाणी देहरादून की प्रतिभाशाली कलाकार शरण्या जोशी ने ठुमरी, दादरा और चैती जैसी विविध शास्त्रीय प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। तबले पर प्रदीप्त डे ने अपनी अद्भुत संगत दी, जबकि हारमोनियम पर माहिर अहमद ने प्रस्तुतियाँ दीं। कार्यक्रम के समापन पर पार्थो राय चौधरी ने संतूर पर राग पूरिया धनाश्री पेश किया।

उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

इस अवसर पर आकाशवाणी के कार्यक्रम प्रमुख श्रीमती मंजुला नेगी, कार्यक्रम अधिशासी संकल्प मिश्रा, और प्रसिद्ध सितार वादक रोबिन करमाकर सहित कई अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ उद्घोषिका कल्पना पंकज द्वारा किया गया।

भीड़ का उत्साह

इस अद्भुत संगीत संध्या में भारी संख्या में युवा, रेडियो प्रेमी, उद्घोषक और शहर के प्रबुद्ध नागरिक शामिल हुए, जिन्होंने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।

इस कार्यक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि आकाशवाणी न केवल सूचना का स्रोत है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर को बचाने और बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभाता है।

आकाशवाणी की 90 वर्ष की यात्रा भारतीय इतिहास में एक मील का पत्थर है और यह हमारे संगीत, कला और संस्कृति की जीवंतता का प्रतीक है। ऐसे कार्यक्रम हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझने और स्वीकृति देने का अवसर प्रदान करते हैं।

इस प्रकार, आकाशवाणी के 90 साल पूरे होने पर आयोजित यह संगीत संध्या न केवल एक उत्सव थी बल्कि हमारे कला और संस्कृति की गहराई को भी उजागर करने का एक महत्वपूर्ण मंच था।

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Signed off by: स्नेहा मिश्रा, Team The Odd Naari

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