हरिद्वार मदरसों में डबल एंट्री का खुलासा: एक ही छात्र दो अलग-अलग मदरसों में दर्ज

हरिद्वार। जिले में पीएम पोषण योजना के तहत संचालित मदरसों की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। प्रारंभिक जांच में 11 मदरसों में 206 से अधिक बच्चों के फर्जी पंजीकरण पकड़े गए हैं। कई बच्चों के नाम एक ही समय में अलग-अलग मदरसों में दर्ज पाए गए, जिससे सरकारी धनराशि लेने का खेल उजागर […] The post हरिद्वार के मदरसों में डबल एंट्री का खेल! एक ही छात्र दो-दो मदरसों में दर्ज appeared first on Uttarakhand Broadcast.

May 10, 2026 - 09:38
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हरिद्वार मदरसों में डबल एंट्री का खुलासा: एक ही छात्र दो अलग-अलग मदरसों में दर्ज
हरिद्वार मदरसों में डबल एंट्री का खुलासा: एक ही छात्र दो अलग-अलग मदरसों में दर्ज

हरिद्वार मदरसों में डबल एंट्री का खुलासा: एक ही छात्र दो अलग-अलग मदरसों में दर्ज

हरिद्वार। जिले में पीएम पोषण योजना के तहत संचालित मदरसों की जांच में नाकामियों का बड़ा मामला सामने आया है। कम शब्दों में कहें तो, प्रारंभिक जांच के अनुसार 11 मदरसों में 206 से अधिक बच्चों के फर्जी पंजीकरण पकड़े गए हैं। यह फर्जीवाड़ा तब उजागर हुआ, जब कई बच्चों के नाम एक ही समय में अलग-अलग मदरसों में पंजीकृत पाए गए, जिससे सरकारी धनराशि लेने की साज़िश स्वच्छ रूप से सामने आई है।

इस मामले के अंतर्गत सबसे चौंकाने वाले तथ्य के अनुसार, लक्सर क्षेत्र में तीन मदरसों की मान्यता पर कुल छह मदरसे अलग-अलग स्थानों पर संचालित किए जा रहे थे। प्रशासनिक जांच के दौरान जिले के 131 मदरसों में से 23 मदरसे संदेह के घेरे में आ गए हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि शिक्षा के इस क्षेत्र में गड़बड़ी गहराई तक फैली हुई है। फिलहाल, 11 मदरसों की पीएम पोषण योजना के लिए मार्च और अप्रैल माह की धनराशि पर रोक लगा दी गई है।

जांच के दौरान यह भी देखा गया कि कुछ मदरसों ने वास्तविक छात्र संख्या से कहीं अधिक बच्चों का रिकॉर्ड तैयार किया था ताकि पीएम पोषण योजना के तहत सरकारी राशि का अधिकतम लाभ उठाया जा सके। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कक्षा 1 से 5 तक प्रति छात्र लगभग 7 रुपये और कक्षा 6 से 8 तक 10 रुपये प्रतिदिन के भोजन मद में दिए जाते हैं। इसी के तहत फर्जी छात्रों की संख्या दर्शाने की योजना बनायी गई है।

प्रारंभिक जांच में कई मदरसों के दस्तावेज़, उपस्थिति पंजिका, और छात्र संख्या में भारी अंतर सामने आया है। यह तथ्य सामने आया है कि कुछ बच्चों के नाम एक ही समय में दो अलग-अलग मदरसों में पंजीकृत थे, जो सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी की स्पष्ट निशानी है।

वहीं, सुल्तानपुर स्थित जशोधरपुर गांव के केजीएन हाईस्कूल में शनिवार को अल्पसंख्यक बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह ने मदरसा संचालकों की बैठक में मान्यता संबंधी नियमों की जानकारी दी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी मदरसों को शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त करके ही संचालित किया जाना चाहिए। धार्मिक शिक्षा के लिए भी अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता लेना आवश्यक है।

डीईओ बेसिक, अमित चंद ने कहा कि जिले के सभी मदरसों की जांच चरणबद्ध तरीके से कराई जा रही है। जिन मदरसों में गड़बड़ी की पुष्टि होगी, वहाँ पीएम पोषण योजना की धनराशि को रोकने का कार्य किया जाएगा। इसके साथ ही, दोषी पाए गए व्यक्तियों के खिलाफ प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

इस भ्रामक गतिविधियों को उजागर करने से ये ताजगी से संबंधित प्रबंधन की दिशा में एक बड़ा कदम है। शिक्षा के इस संवेदनशील मुद्दे पर बोझिल तंत्र को चुस्त और सक्षम बनाने की आवश्यकता है। तात्कालिक कार्रवाई न केवल सरकारी धन की रक्षा करेगी, बल्कि बच्चों की शिक्षा से संबंधित वास्तविक प्रयासों को भी प्रोत्साहित करेगी।

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