उत्तराखंड में साइबर अपराध पर सख्त कदम: अब गुमनाम होकर करें ऑनलाइन उत्पीड़न की शिकायत

देहरादून। डिजिटल दौर में ऑनलाइन उत्पीड़न और साइबर अपराध के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कई लोग पहचान उजागर होने के डर और शर्म की वजह से शिकायत दर्ज नहीं करा पाते। ऐसे पीड़ितों को राहत देने के लिए भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर अब गुमनाम रूप से शिकायत दर्ज […] The post उत्तराखंड में साइबर अपराध पर सख्ती: अब गुमनाम रहकर भी कर सकेंगे ऑनलाइन उत्पीड़न की शिकायत appeared first on Uttarakhand Broadcast.

May 9, 2026 - 18:38
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उत्तराखंड में साइबर अपराध पर सख्त कदम: अब गुमनाम होकर करें ऑनलाइन उत्पीड़न की शिकायत
उत्तराखंड में साइबर अपराध पर सख्त कदम: अब गुमनाम होकर करें ऑनलाइन उत्पीड़न की शिकायत

उत्तराखंड में साइबर अपराध पर सख्त कदम: अब गुमनाम होकर करें ऑनलाइन उत्पीड़न की शिकायत

देहरादून। डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराध और ऑनलाइन उत्पीड़न की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए उत्तराखंड में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। अब लोग अपने पहचान को गुमनाम रखकर शिकायत दर्ज करा सकेंगे। यह कदम उन लोगों के लिए राहत लेकर आया है जो छह पहचान उजागर होने के डर से शिकायत नहीं कर पाते थे।

कम शब्दों में कहें तो, जनरल पब्लिक के लिए अब शिकायत करना हो गया है आसान। भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर गुमनाम रूप से शिकायत दर्ज करने की नई सुविधा का शुभारंभ किया गया है।

इस पोर्टल का मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों से जुड़े साइबर अपराधों की शिकायतों को सरलता से स्वीकार करना है। शिकायतकर्ता को केवल साइबर क्राइम पोर्टल पर “Women/Children Related Crime” सेक्शन में जाना होगा और वहां पर “Register Anonymously” विकल्प का चयन करना होगा।

शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया

शिकायत दर्ज करने के दौरान शिकायतकर्ता को घटना की विशेष जानकारी जैसे घटना का प्रकार, तारीख, समय और संबन्धित सोशल मीडिया या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का विवरण भरना होगा। इसके अतिरिक्त, आरोपी की पहचान के लिए आईडी, प्रोफाइल लिंक या यूआरएल भी अपलोड कर सकते हैं। इसमें स्क्रीनशॉट, चैट रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को भी जोड़ने की अनुमति है। जब सभी जानकारी सत्यापित हो जाती है तो “Confirm & Submit” पर क्लिक करते ही शिकायत पंजीकृत कर दी जाती है।

साइबर सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के मामलों में मजबूत डिजिटल साक्ष्य रखाना अत्यन्त आवश्यक है। जब भी आपको ऑनलाइन धमकी, अश्लील संदेश या सोशल मीडिया उत्पीड़न का सामना करना पड़े, तब तुरंत स्क्रीनशॉट और अन्य रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना चाहिए।

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने इस नई सुविधा पर ध्यान केंद्रित करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य उन लोगों की मदद करना है जो अपनी पहचान उजागर करने से डरते हैं। उन्होंने साइबर अपराध के प्रति लोगों को जागरूक रहने की सलाह दी और किसी भी ठगी या ऑनलाइन फ्रॉड की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करने की सलाह दी।

फेक लोन ऐप्स की बढ़ती समस्या

साइबर पुलिस ने फेक लोन ऐप्स के खिलाफ चेतावनी दी है। साइबर ठगों द्वारा सोशल मीडिया पर आकर्षक विज्ञापन दिखाए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से वे लोगों को फर्जी लोन ऐप डाउनलोड करने को मजबूर कर रहे हैं। ऐसे ऐप्स इंस्टॉल करने पर ये ठग आपके फोन के कॉन्टैक्ट्स और अन्य निजी डेटा तक पहुंच बना लेते हैं।

एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि जब कोई उपयोगकर्ता संदिग्ध लिंक क्लिक करता है और ऐप इंस्टॉल करता है, तब ठग उसके निजी फोटो से छेड़छाड़ कर आपत्तिजनक फोटो तैयार करते हैं और उन्हें परिचितों को भेजने की धमकी देकर पैसे मांगते हैं।

पुलिस की सलाह है कि किसी भी अनजान या बिना सत्यापन वाले लोन ऐप्स को डाउनलोड करने से बचें। सोशल मीडिया पर दिखने वाले लुभावने विज्ञापनों से दूरी बनाए रखें और किसी भी ऐप को इंस्टॉल करने से पहले उसकी विश्वसनीयता और समीक्षाएं अच्छी तरह से जांच लें।

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सादर, टीम द ऑड नारी

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