श्रीनगर में मानवता की करणी: चिता के लिए सूखी लकड़ी की अनुपलब्धता के कारण 19 वर्षीय बेटी का डीजल और टायर से अंतिम संस्कार

SRINAGAR:  श्रीनगर गढ़वाल से मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली एक दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां एक परिवार को अपनी 19 वर्षीय बेटी का अंतिम संस्कार बेहद विषम परिस्थितियों में करना पड़ा। श्मशान घाट पर गीली लकड़ियों के कारण चिता नहीं जल सकी, जिससे परिजन चार घंटे तक जूझते रहे। अंततः मजबूरी में 15 […] The post मानवता शर्मसार! चिता के लिए नहीं मिली सूखी लकड़ियां, 19 साल की बेटी का डीजल-टायर से हुआ अंतिम संस्कार appeared first on Devbhoomi Dialogue.

Apr 6, 2026 - 18:38
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श्रीनगर में मानवता की करणी: चिता के लिए सूखी लकड़ी की अनुपलब्धता के कारण 19 वर्षीय बेटी का डीजल और टायर से अंतिम संस्कार
श्रीनगर में मानवता की करणी: चिता के लिए सूखी लकड़ी की अनुपलब्धता के कारण 19 वर्षीय बेटी का डीजल और टायर से अंतिम संस्कार

मानवता शर्मसार! चिता के लिए नहीं मिली सूखी लकड़ियां, 19 साल की बेटी का डीजल-टायर से हुआ अंतिम संस्कार

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कम शब्दों में कहें तो, एक दर्दनाक घटना में श्रीनगर गढ़वाल में एक परिवार को अपने 19 वर्षीय बेटी का अंतिम संस्कार अत्यंत कठिन परिस्थितियों में करना पड़ा। श्मशान घाट पर सूखी लकड़ी की कमी के कारण चार घंटे की मशक्कत के बाद मजबूरी में डीजल और टायर का इस्तेमाल किया गया।

घटना का विवरण

SRINAGAR: श्रीनगर गढ़वाल से आई इस घटना ने सभी को आंसू भरी आंखों के साथ सोचने पर मजबूर कर दिया है। जब परिवार अपनी बेटी की अंतिम यात्रा पर निकला, तो उन्हें श्मशान घाट पर सूखी लकड़ियों की गंभीर कमी का सामना करना पड़ा। गीली लकड़ियों के कारण चिता को आग नहीं लग सकी, जिससे परिवार को चार घंटे तक प्रतिक्षा करनी पड़ी। अंत में, मजबूरी में 15 लीटर डीजल, टायर, गद्दे और कपड़ों का उपयोग कर अंतिम संस्कार करना पड़ा।

परिवार ने आरोप लगाया कि लकड़ी सप्लाई करने वाले टाल संचालक ने उन्हें गीली लकड़ियां दीं, जिसके लिए उन्होंने पूरी कीमत चुका दी थी। ऐसी स्थिति में व्यक्ति के लिए यह मानसिक और भावनात्मक रूप से अत्यंत दुखदायी रहा।

चार घंटे की भयंकर प्रतीक्षा

जब चिता का इंतजार किया जा रहा था, परिवार के मुखिया ने अपनी बेटी के शव के पास बैठकर चार घंटे बिताए। वे हर बार नई कोशिश करते, लेकिन लकड़ियां जल नहीं रहीं। इस बीच, घाट पर उपस्थित सभी लोगों की आंखों में आंसू थे। अंत में, परिवार ने बाजार से 15 लीटर डीजल मंगवाया। इसके बावजूद, लकड़ियां फिर भी नहीं जल पाईं। इसके बाद, परिवार ने 10 लीटर और डीजल और उसके साथ विभिन्न सामग्रियों की व्यवस्था की, जिसमें पुराने टायर, कपड़े और गद्दे शामिल थे।

शामिल सभी प्रयासों के बाद, अंत में चिता को अग्नि प्राप्त हुई। यह केरल के राजनेताओं और स्थानीय प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने में सफल रही है। वार्ड पार्षद शुभम प्रभाकर ने नगर निगम के मेयर को पत्र लिखकर घटना की निंदा की और कहा कि "इस तरह की मुनाफाखोरी बिल्कुल अनुचित है।" उन्होंने मांग की कि श्रीनगर क्षेत्र में एक सरकारी लकड़ी टाल की स्थापना होनी चाहिए ताकि इस तरह की समस्याओं का सामना न करना पड़े।

समाज के सामने एक चुनौती

यह घटना केवल इस परिवार के लिए नहीं बल्कि श्रीनगर के समाज के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करती है। अंतिम संस्कार एक ऐसा क्रिया है, जिसे हर व्यक्ति को सम्मान के साथ करना चाहिए। यदि समाज में इस तरह की परिस्थिति का सामना होता है, तो यह केवल उस परिवार की नहीं बल्कि सारी मानवता की असफलता है।

यहां हमें यह भी समझना होगा कि अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक जिम्मेदारी है। स्थानीय शासन और समाज को मिलकर इसकी व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।

इस घटना ने श्मशान घाटों की व्यवस्था और जिम्मेदार तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जब एक परिवार इस स्थिति का सामना करता है, तो उन्हें सिर्फ मानसिक पीड़ा नहीं होती, बल्कि समाज के प्रति भी एक असफलता का अनुभव होता है।

ऐसी घटनाएं हमें सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या हमारी मानवता केवल शब्दों में ही है या वास्तविकता में भी? हमें इस घटना से सीख लेनी चाहिए और उस दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए।

अंत में, शहर के नेता और प्रशासन को इस मामले में хвостянуть करने का कार्य करना होगा ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति का पुनरावृत्ति न हो। यह सब हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम हर किसी के सम्मान की रक्षा करें, सुपुर्द की जाने वाली आत्मा के प्रति को सबसे उचित सम्मान दें। इसके लिए केवल एक रचनात्मक राजनीति ही नहीं, बल्कि समाज की सहभागिता भी जरूरी है।

इस घटना पर आपके विचार हमें बताएं।

फिर एक बार याद रखें, इसके पीछे का मानवता का दुख हमें एकजुट होना सिखाता है।

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टीम द ओड नारी
- सुमिता शर्मा

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