राहुल कोटियाल को मिला प्रतिष्ठित पंडित भैरव दत्त धूलिया पत्रकारिता पुरस्कार

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May 20, 2026 - 00:38
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राहुल कोटियाल को मिला प्रतिष्ठित पंडित भैरव दत्त धूलिया पत्रकारिता पुरस्कार
राहुल कोटियाल को मिला प्रतिष्ठित पंडित भैरव दत्त धूलिया पत्रकारिता पुरस्कार

राहुल कोटियाल को मिला प्रतिष्ठित पंडित भैरव दत्त धूलिया पत्रकारिता पुरस्कार

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कम शब्दों में कहें तो वरिष्ठ पत्रकार राहुल कोटियाल को उनकी साहसी और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए प्रदान किया गया है पंडित भैरव दत्त धूलिया पत्रकारिता पुरस्कार, जिसमें एक लाख रुपये, शॉल और प्रशस्ति पत्र शामिल है।

देहरादून। भारतीय पत्रकारिता जगत में अपनी बेबाकी और साहस के लिए मशहूर वरिष्ठ पत्रकार और ऑनलाइन पोर्टल 'बारामासा' के संस्थापक संपादक राहुल कोटियाल को ‘चौथे पंडित भैरव दत्त धूलिया पत्रकारिता पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार कर्मभूमि फाउंडेशन द्वारा दिया गया, जिसमें एक लाख रुपये की धनराशि, एक शॉल और एक प्रशस्ति पत्र शामिल हैं।

समारोह की खासियत

इस पुरस्कार समारोह का आयोजन दून लाइब्रेरी में किया गया, जहां मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ पत्रकार एवं ‘मेल टुडे’ के संस्थापक संपादक भारत भूषण मौजूद थे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ की गई।

फाउंडेशन के सचिव कैप्टन हिमांशु धूलिया ने पंडित भैरव दत्त धूलिया के जीवन और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने पत्रकारिता के प्रति धूलिया जी की प्रतिबद्धता और 'कर्मभूमि' समाचार पत्र की संपादकीय भूमिका को साझा किया।

पत्रकारिता में सामाजिक जिम्मेदारी

इस अवसर पर कवि एवं सामाजिक कार्यकर्ता लोकेश नवानी ने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य समाज में निर्बलों की आवाज बनना चाहिए। उन्होंने मीडिया को उन लोगों का आवाजरूप बताया, जो खुद अपनी बात नहीं रख सकते।

राहुल कोटियाल का समर्पण

राहुल कोटियाल ने पुरस्कार प्राप्त करने के बाद कहा कि यह सम्मान उनकी जिम्मेदारी को और बढ़ा देता है। उन्होंने स्वतंत्र और ईमानदार पत्रकारिता के सामने आने वाली आर्थिक चुनौतियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “आज स्थिति यह हो गई है कि विज्ञापन पाने के लिए अखबारों को लिखा जाता है, जबकि अखबारों को विज्ञापनों के लिए तैयार किया जाता है।” उन्होंने अपने परिवार और सहयोगियों का भी आभार व्यक्त किया।

पत्रकारिता में विचारधारा का महत्व

मुख्य अतिथि भारत भूषण ने पत्रकारिता में विचारधारा की भूमिका को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि औपनिवेशिक भारत में पत्रकारिता सिर्फ समाचार को प्रसारित करने का माध्यम नहीं था, बल्कि जन जागरण का एक सशक्त साधन भी था।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी विज्ञापनों पर निर्भरता मीडिया में आत्म-सेंसरशिप को बढ़ावा देती है। भारत भूषण ने यह भी ज़ोर दिया कि पत्रकारों को अपनी प्रहरी की भूमिका नहीं भूलनी चाहिए और समाचार, विश्लेषण और विचार को अलग-अलग रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

संस्थान की अध्यक्ष का आभार

इस पुरस्कार समारोह का समापन करते हुए कर्मभूमि फाउंडेशन की अध्यक्ष श्रीमती धूलिया ने सभी उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया और पंडित भैरव दत्त धूलिया के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस पुरस्कार के माध्यम से प्रमाणित होता है कि पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि यह सामाजिक जिम्मेदारी का कार्य है, जिसमें सत्य, न्याय और सामाजिक बदलाव की भावना महत्वपूर्ण है।
अधिक जानकारी के लिए, यहां क्लिक करें.

टीम द ओड नाारी (साक्षी शर्मा)

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