AI की दौड़ में भारत का आगे बढ़ना, पर क्यों केवल 20% बना रहे हैं टूल्स?
नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब भारत में सिर्फ भविष्य की तकनीक नहीं रह गई है, बल्कि रोजमर्रा के काम और प्रोफेशनल लाइफ का हिस्सा बनती जा रही है। लोग कंटेंट लिखने, जानकारी खोजने, डेटा समझने, प्रेजेंटेशन तैयार करने, कोडिंग और दूसरे कामों में AI टूल्स का इस्तेमाल तेजी से कर रहे हैं। लेकिन […]
AI की दौड़ में भारत का आगे बढ़ना, पर क्यों केवल 20% बना रहे हैं टूल्स?
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कम शब्दों में कहें तो, भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग बढ़ रहा है, लेकिन इसकी रचना करने वालों की संख्या बहुत कम है।
नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब भारत में केवल भविष्य की तकनीक नहीं रह गई है। यह अब हमारे रोजमर्रा के काम और प्रोफेशनल जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। लोग कंटेंट लिखने, जानकारी खोजने, डेटा विश्लेषण, प्रेजेंटेशन तैयार करने, कोडिंग और अन्य कार्यों में AI टूल्स का तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं। हाल ही में आई एक रिपोर्ट ने इस बात को और स्पष्ट किया है कि भारत में AI का उपयोग करने वालों की संख्या तो अधिक है, लेकिन उसकी रचना करने वाले लोग काफी कम हैं।
AI का उपयोग तेजी से बढ़ा
upGrad द्वारा प्रस्तुत Skill Shift रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे में शामिल 2,075 लोगों में से 94 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में AI का उपयोग कर रहे हैं। इनमें से लगभग 53 प्रतिशत लोग AI का रोजाना उपयोग करते हैं। यह दर्शाता है कि भारतीय यूजर्स की यह स्वीकार्यता काफी तेजी से बढ़ रही है। लेकिन जब बात AI का रचनात्मक उपयोग करने की होती है, जैसे ऑटोमेशन, एजेंट या एप्लीकेशन बनाने की, तो तस्वीर का रंग बदल जाता है।
AI बनाने की संख्या में कमी
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि 94 प्रतिशत प्रतिभागी AI टूल्स का उपयोग कर रहे हैं, जबकि केवल 20 प्रतिशत लोग ही AI आधारित ऑटोमेशन, एजेंट या एप्लीकेशन विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। यह डेटा भारत में AI स्किलिंग की सबसे बड़ी चुनौती की ओर इशारा करता है। अर्थात, बड़ी संख्या में लोग AI को यूजर की तरह तो इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन बिल्डर की तरह इसे उपयोग करने वाले बेहद कम हैं।
AI में अपस्किलिंग का महत्व
रिपोर्ट में यह भी दिखाया गया है कि लगभग 87 प्रतिशत लोग AI में अपस्किलिंग के लिए काम कर रहे हैं। इससे यह स्पष्ट है कि लोग इस बात को महसूस कर रहे हैं कि आने वाले समय में AI स्किल्स उनके करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगी।
छात्रों और युवाओं के लिए अवसर
AI के बढ़ते प्रभाव का मतलब है कि छात्रों और युवाओं के लिए यह एक बड़ा अवसर बन सकता है। केवल किसी एक AI टूल का उपयोग करना काफी नहीं होगा, बल्कि उससे जुड़े कई कौशलों जैसे डेटा, प्रॉम्प्टिंग, ऑटोमेशन, कोडिंग, और समस्या समाधान सीखना भी जरूरी है।
कंपनियों के लिए भी एक सिखने का अवसर
कंपनियों को यह समझना चाहिए कि यदि उनके कर्मचारी AI टूल्स का उपयोग कर रहे हैं लेकिन AI आधारित समाधान तैयार करने की ट्रेनिंग नहीं मिल रही है, तो उन्हें अपनी अपस्किलिंग रणनीति पर एक बार फिर से विचार करना चाहिए।
अगला लक्ष्य: AI निर्माण
यदि हम भारत में AI को अपनाने की रफ्तार को देखें, तो यह निश्चित रूप से एक बड़ी उपलब्धि है। लेकिन अगली चुनौती AI के उपयोग से आगे बढ़कर AI निर्माण और नवाचार की है। केवल 20 प्रतिशत लोगों का AI आधारित समाधान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाना यह बताता है कि अभी भी एक बड़ा स्किल गैप मौजूद है।
आने वाले वर्षों में भारत की AI क्षमता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने लोग AI टूल का उपयोग कर रहे हैं, और इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण यह होगा कि कितने लोग इसकी मदद से नई चीजें बना पा रहे हैं। यही बदलाव भारत को AI का बड़ा बाजार बनने से आगे बढ़ाकर, AI समाधान बनाने वाला एक मजबूत केंद्र बना सकता है।
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Team The Odd Naari
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