MSP पर किसानों से होगी बड़ी खरीद, UP समेत तीन राज्यों को मंजूरी
केंद्र सरकार इस योजना के माध्यम से दलहन और तिलहन के उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ कृषि क्षेत्र में मूल्य स्थिरता को मजबूत करने पर जोर दे रही है। हालांकि, वास्तविक लाभ खरीद केंद्रों की उपलब्धता, किसानों की पहुंच, खरीद की गति और समय पर भुगतान जैसी व्यवस्थाओं पर निर्भर करेगा।

केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए किसानों से दलहन और तिलहन की समर्थन मूल्य पर खरीद को लेकर बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंजूरी के बाद उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत कुल 5,547.99 करोड़ रुपये की फसलों की खरीद का रास्ता साफ हुआ है। सरकार के मुताबिक, इस कदम का उद्देश्य बाजार में कीमतों में संभावित गिरावट से किसानों को राहत देना और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य उपलब्ध कराना है।
कृषि मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित खरीद में विभिन्न दलहन और तिलहन फसलों को शामिल किया गया है। इनमें तुअर, मूंग, सोयाबीन और सूरजमुखी प्रमुख हैं। सरकार का कहना है कि समर्थन मूल्य पर खरीद से उन किसानों को लाभ मिल सकता है, जिन्हें खुले बाजार में फसल का अपेक्षित भाव नहीं मिल पाता।
उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए इस योजना के तहत सबसे बड़ा खरीद प्रावधान किया गया है। राज्य में कुल 3,992.57 करोड़ रुपये मूल्य की उपज खरीद को मंजूरी दी गई है। इसमें 3,937.70 करोड़ रुपये मूल्य की 4,66,000 मीट्रिक टन तुअर की खरीद प्रस्तावित है। इसके अलावा 54.87 करोड़ रुपये की 6,250 मीट्रिक टन मूंग भी समर्थन मूल्य पर खरीदी जाएगी। कर्नाटक के लिए कुल 1,107 करोड़ रुपये की खरीद को मंजूरी मिली है। राज्य में 659.27 करोड़ रुपये मूल्य की 1,15,500 मीट्रिक टन सोयाबीन खरीदी जाएगी। इसके साथ ही 335.83 करोड़ रुपये की 38,250 मीट्रिक टन मूंग और 111.90 करोड़ रुपये की 13,413 मीट्रिक टन सूरजमुखी की खरीद भी योजना में शामिल है।
तेलंगाना के किसानों के लिए कुल 448.42 करोड़ रुपये की उपज खरीद का प्रावधान किया गया है। इसमें 353.90 करोड़ रुपये मूल्य की 62,000 मीट्रिक टन सोयाबीन तथा 94.52 करोड़ रुपये मूल्य की 10,766 मीट्रिक टन मूंग की खरीद शामिल है। इन फसलों की खरीद मूल्य समर्थन योजना के तहत निर्धारित समर्थन मूल्य पर की जाएगी। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस फैसले को किसानों के आर्थिक हितों से जोड़ते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार कृषि क्षेत्र को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
सरकार के अनुसार, PSS के तहत खरीद व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य तब किसानों को मूल्य सुरक्षा उपलब्ध कराना है, जब बाजार भाव निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे चला जाए। ऐसी स्थिति में सरकारी खरीद किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध करा सकती है। इस फैसले को दलहन और तिलहन के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने की नीति से भी जोड़ा जा रहा है। भारत में दालों और खाद्य तेलों की घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि किसानों को बेहतर मूल्य मिलने से इन फसलों की खेती के प्रति उनका भरोसा बढ़ सकता है।
शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा कि खरीद केंद्रों पर प्रक्रिया को पारदर्शी रखने और किसानों को भुगतान समय पर करने का प्रयास किया जाएगा। सरकार के मुताबिक, खरीदी गई उपज की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। इससे भुगतान प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका कम करने और किसानों तक राशि सीधे पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है। तीनों राज्यों में प्रस्तावित खरीद की मात्रा और राशि को देखते हुए यह फैसला संबंधित फसलों के उत्पादकों के लिए महत्वपूर्ण है। खासकर तुअर, मूंग, सोयाबीन और सूरजमुखी की खेती करने वाले किसानों को समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद की सुविधा मिलने से बाजार में कीमतों में गिरावट की स्थिति में सुरक्षा मिल सकती है।
केंद्र सरकार इस योजना के माध्यम से दलहन और तिलहन के उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ कृषि क्षेत्र में मूल्य स्थिरता को मजबूत करने पर जोर दे रही है। हालांकि, वास्तविक लाभ खरीद केंद्रों की उपलब्धता, किसानों की पहुंच, खरीद की गति और समय पर भुगतान जैसी व्यवस्थाओं पर निर्भर करेगा। फिलहाल खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में कुल 5,547.99 करोड़ रुपये की खरीद को मंजूरी दी गई है। सरकार का कहना है कि इस पहल से किसानों को बाजार में बेहतर मूल्य सुरक्षा मिलेगी और दलहन-तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
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