जसपुर में मूर्ति स्थापना पर हंगामा: आदेश चौहान और सिंघल के समर्थकों के बीच विवाद
JASPUR: उधम सिंह नगर के जसपुर में मूर्ति स्थापना को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। ठाकुर मंदिर के सामने रानी लक्ष्मीबाई की मूर्ति लगाने को लेकर कांग्रेस विधायक आदेश चौहान और बीजेपी के पूर्व विधायक शैलेन्द्र मोहन सिंघल के समर्थक आमने-सामने आ गए । देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि मौके पर […] The post जसपुर में मूर्ति स्थापना को लेकर हंगामा, आपस में भिड़े आदेश चौहान-सिंघल, समर्थकों का भी बवाल appeared first on Devbhoomi Dialogue.
जसपुर में मूर्ति स्थापना पर हंगामा: आदेश चौहान और सिंघल के समर्थकों के बीच विवाद
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कम शब्दों में कहें तो, जसपुर में ठाकुर मंदिर के सामने रानी लक्ष्मीबाई की मूर्ति स्थापना को लेकर उठे विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया। कांग्रेस विधायक आदेश चौहान और भाजपा के पूर्व विधायक शैलेन्द्र मोहन सिंघल के समर्थक आमने-सामने आ गए जिसके चलते स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
जसपुर, उधम सिंह नगर: उधम सिंह नगर के जसपुर में एक महत्वपूर्ण घटना हुई है, जहां मूर्ति स्थापना को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। मुद्दा तब गरमाया जब कांग्रेस विधायक आदेश चौहान ने रानी लक्ष्मीबाई की मूर्ति लगाने के लिए ठाकुर मंदिर के सामने टाइल्स हटवाने का कार्य शुरू किया। इस कार्य के विरोध में भाजपा कार्यकर्ता और पूर्व विधायक शैलेन्द्र मोहन सिंघल अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंच गए। यह घटनाक्रम कुछ ही समय में साधारण कहासुनी से बढ़कर धक्का-मुक्की तक पहुंच गया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया।
स्थिति और भी बिगड़ गई जब दोनों पक्षों के समर्थक एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाते हुए मूर्ति स्थापना का कार्य रुकवा दिया। पुलिस ने परिस्थिति को शांत किया और समर्थकों को अलग करने का प्रयास किया।
आदेश चौहान का पक्ष
कांग्रेस विधायक आदेश चौहान ने इस विवाद पर अपनी बात रखते हुए कहा कि रानी लक्ष्मीबाई की मूर्ति स्थापित करने की मांग क्षेत्र की महिलाओं और ब्राह्मण समाज द्वारा लंबे समय से की जा रही थी। उन्होंने बीजेपी के कुछ नेताओं के विरोध को निंदा करते हुए कहा कि यह न केवल भ्रामक है, बल्कि उनकी पार्टी महिलाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से पलटी भी है। चौहान ने कहा, "यह आश्चर्यजनक है कि एक ओर बीजेपी 50 फीसदी आरक्षण की बात करती है, जबकि दूसरी ओर एक वीरांगना की मूर्ति स्थापित करने का विरोध कर रही है।"
सिंघल का विरोध
भाजपा के पूर्व विधायक शैलेन्द्र मोहन सिंघल ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मूर्ति की स्थापना के समय को लेकर कई बातें स्पष्ट होनी चाहिए। सिंघल का कहना है कि यह स्थान धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और इसे राजनीतिक विवाद का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। उनकी पार्टी के समर्थकों का मानना है कि विवाद को बढ़ाने के बजाय शांतिपूर्ण संवाद होना चाहिए।
आगामी कदम
पुलिस ने फिलहाल स्थिति को काबू में किया है, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि अगले कदम क्या होंगे। इस विवाद से इलाके के राजनैतिक माहौल में ताजगी आयेगी या यह किसी बड़े विवाद की ओर बढ़ेगा, इसका इंतजार किया जा रहा है।
ध्यान देने योग्य है कि रानी लक्ष्मीबाई का इतिहास भारत की स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण है और उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करने का तरीका ऐसा होना चाहिए कि वह उनके बलिदान की गरिमा को बनाए रखे।
इस तनावपूर्ण स्थिति ने क्षेत्र के राजनीतिक माहौल को और भी जटिल बना दिया है, जिसे संभालने की आवश्यकता है। इस प्रकार की घटनाएं केवल क्षेत्र की शांति को बाधित करती हैं, बल्कि समाज में विभाजन भी उत्पन्न करती हैं।
फिलहाल, पुलिस की कार्रवाई से मूर्ति स्थापना का कार्य रोक दिया गया है। सभी को चाहिए कि वे इस प्रकार के विवादों को सुलझाने के लिए मिलकर कार्य करें।
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टीम द ऑड नारी
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