58 करोड़ की मंजूरी के बावजूद 13 साल से अधूरी सड़क, गर्भवती महिलाओं को कुर्सी पर ले जा रहे ग्रामीण

        रुद्रप्रयाग। जनपद में एक ओर जिला योजना बैठक में विकास कार्यों के लिए 58 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि स्वीकृत होने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर जाखणी-टेंडवाल मोटर मार्ग पिछले 13 वर्षों से अधर में लटका हुआ है। सड़क निर्माण पूरा न होने से ग्रामीण आज […] The post 58 करोड़ मंजूर, फिर भी 13 साल से सड़क नहीं! गर्भवती महिलाओं को कुर्सी पर ढो रहे ग्रामीण appeared first on Uttarakhand Broadcast.

May 23, 2026 - 00:38
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58 करोड़ की मंजूरी के बावजूद 13 साल से अधूरी सड़क, गर्भवती महिलाओं को कुर्सी पर ले जा रहे ग्रामीण
58 करोड़ की मंजूरी के बावजूद 13 साल से अधूरी सड़क, गर्भवती महिलाओं को कुर्सी पर ले जा रहे ग्रामीण

58 करोड़ की मंजूरी के बावजूद 13 साल से अधूरी सड़क, गर्भवती महिलाओं को कुर्सी पर ले जा रहे ग्रामीण

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कम शब्दों में कहें तो रुद्रप्रयाग जनपद में विकास कार्यों के लिए 58 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत होने के बावजूद जाखणी-टेंडवाल मोटर मार्ग एक दीर्घकालिक समस्या बना हुआ है, जिससे स्थानीय लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान हैं।

रुद्रप्रयाग। जिले में विकास कार्यों को गति देने के लिए हाल ही में आयोजित एक जिला योजना बैठक में 58 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि स्वीकृत की गई। इस घोषणा के बावजूद, जाखणी-टेंडवाल मोटर मार्ग पिछले 13 वर्षों से निर्माण के अधर में लटका हुआ है, जिससे ग्रामीण कठिनाईयों का सामना कर रहे हैं।

बैठक में जिला प्रभारी एवं कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विकास कार्यों की समीक्षा की, जिसमें आशा नौटियाल भी उपस्थित रहीं। सरकारी योजनाओं की स्वीकृति के बावजूद जाखणी-टेंडवाल मोटर मार्ग की स्थिति पर स्थानीय लोगों का विश्वास डगमगाता जा रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग की लापरवाही सामने आ रही है। वास्तव में, यह मोटर मार्ग 2013 में तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मी राणा द्वारा स्वीकृत किया गया था। इसके दस वर्षों बाद भरत सिंह चौधरी द्वारा शिलान्यास किया गया, लेकिन लोक निर्माण विभाग केवल 750 मीटर सड़क निर्माण कर सका।

इस अधूरी सड़क ने ग्रामीणों के जीवन में कठिनाइयां पैदा कर दी हैं। उन्हें मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए लगभग 3 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। गंभीर बीमारियों के मरीज, गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग लोग कुर्सी पर ले जाकर सड़क तक पहुंचते हैं, जो उनकी जिंदगी के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है।

स्थानीय ग्रामीण मुकेश शाह, धनवीर लाल, लाखीराम कोठारी, मुकेश कोठारी और किशोरी लाल समेत सैकड़ों ग्रामीणों ने विधायक पर उपेक्षा का आरोप लगाया है। उनका कहना है, “5G के दौर में भी पहाड़ के लोग सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।” यह टिप्पणी दर्शाती है कि उन्हें आधुनिकता के इस युग में भी फैसले लेने में कितनी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने उग्र प्रदर्शन की चेतावनी दी है यदि सड़क का निर्माण कार्य शीघ्र शुरू नहीं किया जाता। उनका कहना है कि यह पूरी जिम्मेदारी स्थानीय विधायक और संबंधित विभाग की होगी। वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सड़क कटिंग के आश्वासन भी दिए हैं, लेकिन स्थानीय विधायक की ओर से अभी भी कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है।

इस स्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि कैसे सरकार विकास कार्यों में करोड़ों रुपये की राशि को हस्तांतरित कर रही है, जबकि स्थानीय लोग बुनियादी सुविधाएं प्राप्त करने में असमर्थ हैं।

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Team The Odd Naari

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