पश्चिम बंगाल में प्रार्थना सभा में ‘वंदे मातरम’ का अनिवार्य गायन, छात्रों में देशभक्ति बढ़ाएगा
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के स्कूलों में अब सुबह की शुरुआत एक नए नियम के साथ होने जा रही है। राज्य सरकार ने आदेश जारी किया है कि सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों की प्रार्थना सभा में रोजाना राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य होगा। शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देशों के मुताबिक […]
पश्चिम बंगाल में अब सभी स्कूलों में प्रार्थना सभा में ‘वंदे मातरम’ का अनिवार्य गायन
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के सरकारी एवं सहायता प्राप्त स्कूलों में अब सुबह की प्रार्थना सभा का संचालन एक नए नियम के तहत होगा। राज्य सरकार ने स्पष्ट आदेश जारी किया है कि सभी स्कूलों में रोजाना राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य होगा।
कम शब्दों में कहें तो, राज्य सरकार का यह कदम छात्रों के बीच देशभक्ति और अनुशासन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। शिक्षा विभाग ने इस नियम को तुरंत प्रभाव से लागू करने का निर्देश दिया है, जिसके अनुसार इस आदेश का पालन आने वाले सोमवार, 18 मई 2026 से पूरी तरह से होना चाहिए।
प्रशासनिक नियमों का पालन सुनिश्चित करना अनिवार्य
शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, स्कूलों को इस नियम का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। इसे ध्यान में रखते हुए कुछ स्कूलों को रिकॉर्डिंग की व्यवस्था करने के लिए भी कहा गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम्’ का गायन सही ढंग से किया जा रहा है।
पिछले अनुभव और अन्य राज्यों में प्रथा
यहाँ उल्लेखनीय है कि इससे पहले उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे कई राज्यों में सरकारी स्कूलों में 'वंदे मातरम' का गायन नियमित रूप से किया जा रहा है। यह एक परंपरा बन चुकी है, जिसका उद्देश्य देश की एकता और अखंडता को बढ़ावा देना है।
केंद्र सरकार के दिशा-निर्देश
केंद्र सरकार ने भी इस दिशा में एक कदम बढ़ाते हुए फरवरी 2026 में राष्ट्रगीत से संबंधित दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिसमें स्कूलों और सरकारी गतिविधियों में इसके गायन पर जोर दिया गया था। यह दिशा-निर्देश यह सुनिश्चित करते हैं कि राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत को उचित आदर दिया जाए।
आगे का रास्ता
इस नए नियम का स्वागत करते हुए शिक्षा अधिकारियों ने इसे छात्रों में राष्ट्रभक्ति पैदा करने का एक सकारात्मक कदम बताया है। यह कदम युवा पीढ़ी में राष्ट्रीयता की भावना विकसित करने में सहायक हो सकता है।
राज्य सरकार के इस निर्णय के सकारात्मक प्रभाव से न केवल छात्रों की सोच में बदलाव आएगा, बल्कि यह स्कूलों के वातावरण को भी सकारात्मक दिशा में प्रभावित करेगा।
अंत में, सभी स्कूलों को इस नियम का पालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपाय करने की आवश्यकता है, ताकि छात्रों को देशभक्ति, अनुशासन और एकता की भावना से भरा वातावरण मिल सके।
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