यूपी में चाइनीज मांझे से लगातार हो रहीं मौतें, बनारस में कारोबारी की दर्दनाक घटनाएं और पुलिस की लापरवाही

पुलिस चाहे तो सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी बढ़ाकर, शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई करके और बिक्री के स्रोतों की जांच करके इस समस्या पर लगाम लगाने की कोशिश कर सकती है। इसके साथ ही लोगों को सुरक्षित पतंगबाजी के प्रति जागरूक करना भी जरूरी है…

Oct 11, 2026 - 18:38
 133  5.7k
यूपी में चाइनीज मांझे से लगातार हो रहीं मौतें, बनारस में कारोबारी की दर्दनाक घटनाएं और पुलिस की लापरवाही
यूपी में चाइनीज मांझे से लगातार हो रहीं मौतें, बनारस में कारोबारी की दर्दनाक घटनाएं और पुलिस की लापरवाही

यूपी में चाइनीज मांझे से लगातार हो रहीं मौतें: बनारस में कारोबारी की दर्दनाक घटना

Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - The Odd Naari

कम शब्दों में कहें तो, उत्तर प्रदेश में चाइनीज मांझे के कारण हो रही मौतों ने सभी को चिंता में डाल रखा है। वाराणसी में 55 वर्षीय सुनील कुमार की मौत ने एक बार फिर खतरे की घंटी बजा दी है। उनकी मौत ने पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वाराणसी में चाइनीज मांझे से मौतें

वाराणसी: उत्तर प्रदेश में प्रतिबंधित चाइनीज मांझे का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में वाराणसी में पतंग के मांझे की चपेट में आने के कारण 55 वर्षीय सुनील कुमार की दर्दनाक मौत ने लोगों की सुरक्षा के मुद्दे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना कज्जाकपुरा फ्लाईओवर पर तब घटी जब सुनील मंदिर में दर्शन के बाद घर लौट रहे थे और अचानक पतंग का मांझा उनकी गर्दन पर लग गया।

जानकारी के अनुसार, सुनील कुमार आशापुर के निवासी थे और गुजराती साड़ी के व्यवसाय से जुड़े थे। नवरात्रि के पहले दिन वह मंदिर के दर्शन करने गए थे। लौटने के दौरान, चाइनीज मांझा उनकी गर्दन में फंस गया और गंभीर चोटें आईं। यह हादसा इतना भयानक था कि मौके पर मौजूद किसी को भी उन्हें संभालने का मौका नहीं मिला।

घटनास्थल पर मौजूद एक युवक विकास ने तत्काल सुनील को अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी चोटें इतनी गहरी थीं कि उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। यह घटना परिवार के लिए एक बड़ा सदमा बन गई है और सामान्य लोगों की सुरक्षा को लेकर भी गहरी चिंता प्रकट कर रही है।

वाराणसी की इस घटना से पहले गोरखपुर में भी इसी प्रकार की एक दर्दनाक घटना में रमेश कन्नौजिया की जान गई थी। इन घटनाओं से साफ है कि चाइनीज मांझे की समस्या केवल एक शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर हर जगह हो रहा है। यदि समय रहते इसकी बिक्री और उपयोग पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई, तो सड़क पर चलने वाले आम लोग हमेशा खतरे में रहेंगे।

पुलिस ने 48 घंटे का विशेष अभियान चलाने की बात की है, लेकिन सवाल यह है कि क्या कुछ घंटों या दिनों के लिए की गई कार्रवाइयां इस समस्या का स्थायी समाधान दे सकती हैं? प्रशासन को इस मामले में ठोस निर्णय लेने की आवश्यकता है, जिससे चाइनीज मांझे की बिक्री और भंडारण के स्रोतों की पहचान हो सके।

इस समस्या के लिए सिर्फ प्रशासन को जिम्मेदार ठहराना भी काफी नहीं है। पतंग उड़ाने के शौक में दूसरों की जान जोखिम में डालने वालों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। यह मान लेना गलत है कि मांझे का उपयोग केवल छोटे बच्चे करते हैं; इसके लिए वयस्कों को भी जवाबदेह ठहराना आवश्यक है।

पुलिस, यदि चाहे, तो सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी बढ़ाकर, शिकायतों पर तेजी से कार्रवाइयां कर सकती है। इसके साथ ही, लोगों को सुरक्षित पतंगबाजी की ओर जागरूक किया जाना भी अति आवश्यक है। सुनील कुमार और रमेश कन्नौजिया की मौत जैसी दर्दनाक घटनाएं केवल समाचार नहीं बननी चाहिए, बल्कि इसके लिए समस्त समाज को एक साथ मिलकर काम करना होगा।

आखिरकार, किसी परिवार की खुशियों को छीनने के लिए पतंग उड़ाने का आनंद मूल्यवान नहीं होना चाहिए।

इसके अलावा, अधिक जानकारी और अपडेट्स के लिए हमारे वेबसाइट The Odd Naari पर जरूर जाएं।

सादर,
टीम द ओड नारी, स्नेहा शर्मा

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow