कोलकाता में ममता बनर्जी की विवादित मूर्ति को हटाने की कार्रवाई, राजनीतिक भूचाल

शुभेंदु अधिकारी ने शपथ के बाद ही किया था ऐलान कोलकाता | पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की एक बड़ी खबर सामने आ रही है। कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम के बाहर लगी और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा डिजाइन की गई विवादित मूर्ति को शनिवार सुबह हटा दिया गया है। भाजपा सरकार […]

May 24, 2026 - 00:38
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कोलकाता में ममता बनर्जी की विवादित मूर्ति को हटाने की कार्रवाई, राजनीतिक भूचाल
कोलकाता में ममता बनर्जी की विवादित मूर्ति को हटाने की कार्रवाई, राजनीतिक भूचाल

कोलकाता में ममता बनर्जी की विवादित मूर्ति को हटाने की कार्रवाई, राजनीतिक भूचाल

कम शब्दों में कहें तो, कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम से पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा डिजाइन की गई विवादित मूर्तियों को भाजपा की सरकार ने हटा दिया है, जिससे पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर सरगर्मी बढ़ गई है।

Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - The Odd Naari कोलकाता मूर्ति हटाने की कार्रवाई

शुभेंदु अधिकारी का ऐलान और कार्रवाई

कोलकाता | पश्चिम बंगाल की राजनीतिक हलचल के बीच यह खबर सामने आई है कि रविवार सुबह कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा डिजाइन की गई विवादित मूर्ति को हटा दिया गया। भाजपा सरकार के सत्ता में आने के तुरंत बाद इस मूर्ति को गिराने का निर्णय लिया गया, जिसके परिणामस्वरूप राज्य की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। शुभेंदु अधिकारी, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री, ने अपने शपथ ग्रहण के बाद स्पष्ट किया था कि यह मूर्ति जल्द ही गिराई जाएगी।

मूर्ति की पृष्ठभूमि

यह मूर्ति साल 2017 में फीफा अंडर-17 वर्ल्ड कप से पूर्व साल्ट लेक स्टेडियम के बाहर स्थापित की गई थी। इसमें एक खिलाड़ी के दो पैर और उसके कमर के ऊपर एक बड़ी फुटबॉल दिखाई दे रही थी। इसके साथ ही इसमें 'विश्व बांग्ला' का लोगो और ममता बनर्जी का नाम भी अंकित था। इस मूर्ति को स्थापित करने के लिए स्टेडियम का कायाकल्प किया गया था, जिसके लिए लगभग ₹100 करोड़ का खर्च आया था।

खेल मंत्री का बयान

इस संबंध में पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री निसिथ प्रमाणिक ने कहा कि यह मूर्ति 'बदसूरत और बेमतलब का ढांचा' थी, जो साल्ट लेक स्टेडियम जैसी ऐतिहासिक जगह से मेल नहीं खाती। उन्होंने यह भी कहा कि यह मूर्ति विवादों में रही थी और खेल की भावना को सही तरीके से नहीं दर्शाती थी।

नई राजनीतिक बहस का आगाज

बड़ी बात: मूर्ति को हटाए जाने के बाद, टीएमसी और भाजपा के बीच एक नया राजनीतिक विवाद उभरता हुआ दिखाई दे रहा है। टीएमसी इसे बदले की राजनीति बता रही है, जबकि भाजपा इसे स्टेडियम के सौंदर्यीकरण और खेल भावना की बहाली के रूप में देख रही है।

यह महत्वपूर्ण घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावों के बाद से लगातार चल रहे विवादों के दौर का एक नया अध्याय है। भाजपा अपने वादों को पूरा करने की दिशा में कदम उठा रही है, जिससे यह निश्चित तौर पर राजनीतिक गर्मागर्मी को और बढ़ाएगा।

भाजपा सरकार का यह कदम न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसे राज्य के विकास और इसके ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। आगे आने वाले समय में, यह देखना रोचक होगा कि इस मुद्दे पर अब टीएमसी और भाजपा के बीच किस तरह की राजनीतिक तकरार होती है।

फिलहाल, शुभेंदु अधिकारी और उनकी सरकार ने मूर्ति को गिराने का जो निर्णय लिया है, वह उनके वादों का पालन करते हुए एक ज़रूरी कदम माना जा रहा है। इस मामले में राजनीतिक उद्देश्य और स्वार्थों पर जब तक सवाल उठते रहेंगे, तब तक पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल और विवाद पैदा होते रहेंगे।

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Team The Odd Naari, गीता शर्मा

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