अमेरिका से...ट्रंप के टैरिफ का भारत देगा ताबड़तोड़ जवाब
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के तमाम देश के लिए टैरिफ का ऐलान कर दिया। ट्रंप ने इसे डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ का नाम दिया है। बड़ी बात ये है कि भारत से अच्छी दोस्ती के बावजूद 27 प्रतिशत टैरिफ अमेरिका ने लगाया है। ट्रंप ने कहा कि पीएम मोदी उनके अच्छे दोस्त है। ट्रंप ने भारत पर रिसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान करते हुए कहा कि भारत बड़ा टफ देश है। वहां के लोग और सरकार काफी अच्छे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके काफी अच्छे मित्र भी हैं। बावजूद इसके वह अमेरिका प्रोडक्ट पर 52% का टैरिफ लगाते हैं। भारत अमेरिका पर 52% तक टैरिफ लगाता है, इसलिए अमेरिका भारत पर 27% टैरिफ लगाएगा। खैर ट्रंप ने भारत के साथ साथ कई और देशों पर भी टैरिफ लगाया है। इनमें चीन, कनाडा, मैक्सिको, पाकिस्तान जैसे कई देश शामिल हैं। टैरिफ एक ऐसा मुद्दा है जिसे लेकर काफी वक्त से अमेरिका सभी देशों को धमका रहा था। इसके लागू होने से न सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुस्त हो जाएगी, बल्कि लाखों-करोड़ों का नुकसान भी होगा। इसे भी पढ़ें: China-India साझेदारी का सही समय, ट्रंप के टैरिफ के बाद जिनपिंग ने पीएम मोदी को भेजा लेटर, जानें क्या कहाक्या होता है रेसिप्रोकल टैरिफ?जब एक देश किसी दूसरे देश से आयात होने वाले उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाता है और दूसरा देश जवाब में उसी अनुपात में या कम-ज्यादा दर पर टैरिफ लगा देता है, तो इसे रेसिप्रोकल टैरिफ कहा जाता है। सीधा मतलब- जैसे को तैसा। ट्रम्प ने लंबे समय से व्यापार असंतुलन के समाधान के रूप में टैरिफ़ का समर्थन किया है, जबकि अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि उपभोक्ताओं को अंततः इसकी कीमत चुकानी होगी। आलोचकों का तर्क है कि आयात की उच्च कीमतें मुद्रास्फीति को बढ़ावा दे सकती हैं और अर्थव्यवस्था को मंदी की ओर धकेल सकती हैं। इसे भी पढ़ें: Chinese Citizens के साथ रोमांस-सेक्स करना मना है...ट्रंप प्रशासन ने अपने कर्मचारियों के लिए क्या नया नियम बना दियाकंपनियां अमेरिका में आकर ही प्रोडक्ट बनाना शुरू करेंगी? बहुत से देश अमेरिकी सामानों पर ज्यादा शुल्क लगाते आए हैं। अमेरिका का कहना है कि उनके सामानों पर ज्यादा इंपोर्ट ड्यूटी लगाने वाले सभी देशों से आयात पर वो भी ज्यादा टैरिफ लगाएंगे। ट्रंप का कहना है कि नए टैरिफ से विदेशी सामानों को अमेरिका में लाना महंगा हो जाएगा, जिससे कंपनियां अमेरिका में आकर ही प्रोडक्ट बनाना शुरू करेंगी और नौकरियों के ज्यादा अवसर पैदा होंगे। अब ऐसा होगा कि नहीं ये तो वक्त ही बताएगा। रेसिप्रोकल टैरिफ लागू कर दिया है। खास बात यह है कि दुनिया के 11 देश ऐसे हैं जिन पर भारत के मुकाबले ज्यादा टैरिफ लगा है। इनमें चीन, पाकिस्तान का नाम भी शामिल है जहां पाकिस्तान पर ट्रंप ने 29% टैरिफ लगाया है वहीं चीन पर ट्रंप की ओर से 34% का टैरिफ लगाया गया है। चीनी सामानों पर पहले ही 20 प्रतिशत का टैरिफ लगा हुआ है। भारत पर असरभारत पर इसके असर पर गौर करे तो एक रिपोर्ट के मुताबिक इस टैरिफ से भारत को बहुत अधिक नुकसान नहीं होगा। भारत के निर्यात में 3-3.5 प्रतिशत का गिरावट हो सकती है। निर्माण और सेवा क्षेत्र में बढ़ते निर्यात से असर कम हो सकता है। यूरोप, मध्य पूर्व अमेरिका के जरिए नए व्यापार मार्ग बनाए जा रहे हैं। भारत ने अपने निर्यात मिशन को विविध बनाया है। इसलिए भारत को इससे शायद ज्यादा दिक्कत न हो। कुछ एक्सपर्ट्स की माने तो इस टैरिफ का सबसे बुरा असर कपड़ा उद्योग, परिधान और ज्यूलरी सेक्टर पर ही हो सकता है।

अमेरिका से...ट्रंप के टैरिफ का भारत देगा ताबड़तोड़ जवाब
Tagline: The Odd Naari - लेखिका: साक्षी वर्मा, टीम नेटानागरी
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ के कारण भारत ने एक मजबूरन निर्णय लिया है कि वह ताबड़तोड़ जवाब देने के लिए तैयार है। यह खबर हाल ही में उस समय वायरल हुई जब भारत ने अपनी आर्थिक रणनीतियों को और मजबूत करने के लिए कदम उठाने की योजना बनाई।
ट्रंप के टैरिफ का प्रभाव
ट्रंप प्रशासन ने कई उत्पादों पर टैरिफ बढ़ा दिए थे, जिससे भारत जैसे विनिर्माण और निर्यात पर निर्भर देशों के लिए तनाव बढ़ गया। किसानों से लेकर उद्योगपतियों तक, यह टैरिफ विभिन्न क्षेत्रों को प्रभावित कर रहे हैं। भारत सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए, अपने उत्पादों के लिए एक नई रणनीति पर काम करने का निश्चय किया है।
भारत का ताबड़तोड़ जवाब
भारत के वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाने का फैसला किया है। इसमें हाइड्रोजन सेल, स्टील, और कच्चे तेल जैसे प्रमुख उत्पाद शामिल हैं। यह कदम निश्चित रूप से भारत के व्यापारिक हितों की सुरक्षा करेगा और घरेलू उद्योग को मजबूती देगा।
बाजार में छाने वाली सकारात्मकता
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत का ये कदम न केवल घरेलू उत्पादन को बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि विदेशी निवेशकों का भी ध्यान आकर्षित करेगा। इससे भारतीय बाजार में सकारात्मकता का माहौल बनेगा और अंततः आम लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा।
भारत और अमेरिका के रिश्ते
हालांकि, भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध काफी मजबूत रहे हैं, लेकिन ट्रम्प के टैरिफ ने इस संबंध में तनाव को जन्म दिया है। भारत ने हमेशा से ही अमेरिका के साथ सहयोग को प्राथमिकता दी है, लेकिन इस बार वह अपने हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने के लिए स्पष्ट रूप से प्रतिबद्ध है।
निष्कर्ष
संक्षेप में, ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ के जवाब में भारत का ताबड़तोड़ कदम उसके आत्मनिर्भरता और आर्थिक समृद्धि को दर्शाता है। यह न केवल देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि विदेशों में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ाएगा। भारतीय व्यापारियों और जन साधारण के लिए यह समय अनुकूल है, क्योंकि भारत अपनी विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।
इसके अलावा, भारत ने अपने उत्पादन को और तेज करने तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने उत्पादों को प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने का संकल्प लिया है। आगामी समय में भारत और अमेरिका के रिश्तों में नई संभावनाएँ दिख रही हैं।
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