Trump की दोस्ती से तो दुश्मनी भली, टैरिफ का बनाया कैसा रूल? भारत, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया जैसे सहयोगियों पर सख्ती, रूस-उत्तर कोरिया जैसे देशों को फूल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक एक्सीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन कर दिया। जिसके बाद लगभग सभी अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों पर नए टैरिफ की घोषणा की गई, जिसमें चीन से आयात पर 34 प्रतिशत और यूरोपीय संघ पर 20 प्रतिशत कर शामिल है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसे लिबरेशन डे के दिन के रूप में वर्णित किया। ट्रंप ने अपने फैसले में भारत, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान जैसे सहयोगियों को भी नहीं बख्शा है। लेकिन इससे ठीक इतर ट्रंप ने अपने कट्टर दुश्मनों को इसमें रियासत दी है। रूस, क्यूबा, बेलारूस, और उत्तर कोरिया जैसे देशों को इस नए टैरिफ से छूट दी गई है। रेसिप्रोकल टैरिफ यानी जो देश जितना टैरिफ अमेरिका पर लगाता है, ट्रंप ने उसका आधा टैरिफ लगा दिया है। अफगानिस्तान 49 फीसदी टैरिफ लगाता है, उस हिसाब से उस पर 25 फीसदी टैरिफ लगना चाहिए था। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने उस पर सिर्फ 10 फीसदी टैरिफ लगाया।इसे भी पढ़ें: क्या शुरू हो गई सबसे बड़ी ट्रेड वॉर? ट्रंप की टैरिफ घोषणा पर भड़के वर्ल्ड लीडर, कुछ इस अंदाज में दिया रिएक्शनट्रंप ने पुतिन को लेकर क्या कहाट्रंप ने जोर देकर कहा कि अगर वह और रूस यूक्रेन में रक्तपात को रोकने के लिए कोई समझौता करने में असमर्थ रहे और अगर मुझे लगता है कि यह रूस की गलती थी, जो कि हो सकता है कि न हो, लेकिन अगर मुझे लगता है कि यह रूस की गलती है तो रूस से आने वाले सभी तेल पर सेक्रेडरी टैरिफ लगाएंगे।इसे भी पढ़ें: Trump के टैरिफ से भारत को आराम, चीन-पाकिस्तान का काम तमाम! मोदी सरकार की तरफ से क्या आया बयान?अमेरिका ने रूस को क्यों दी राहतएक्सियोस की एक रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि रूस को अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट दी गई है, क्योंकि यह पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों के अधीन है। इसके अतिरिक्त, रूस ने ट्रम्प से अमेरिका की मध्यस्थता वाली वार्ता के हिस्से के रूप में उस पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों को हटाने का भी आग्रह किया था। रिपोर्ट में बताया गया है कि यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद अमेरिकी प्रतिबंधों की बौछार के कारण, अमेरिका-रूस व्यापार, जो 2021 में 35 बिलियन अमरीकी डॉलर का हुआ करता था, लगभग 3.5 बिलियन डॉलर तक गिर गया।

Trump की दोस्ती से तो दुश्मनी भली, टैरिफ का बनाया कैसा रूल? भारत, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया जैसे सहयोगियों पर सख्ती, रूस-उत्तर कोरिया जैसे देशों को फूल
Trump की दोस्ती से तो दुश्मनी भली, टैरिफ का बनाया कैसा रूल? भारत, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया जैसे सहयोगियों पर सख्ती, रूस-उत्तर कोरिया जैसे देशों को फूल

Trump की दोस्ती से तो दुश्मनी भली, टैरिफ का बनाया कैसा रूल? भारत, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया जैसे सहयोगियों पर सख्ती, रूस-उत्तर कोरिया जैसे देशों को फूल

The Odd Naari द्वारा, लेखिका: सुमन तिवारी, टीम नेटानागरी

परिचय

दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों के बीच कूटनीति के खेल में एक नया मोड़ आया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने कार्यकाल में व्यापार और टैरिफ के मुद्दों पर कई ऐसे नियम लागू किए जिनसे विश्व राजनीति में हलचल मच गई। यह लेख उन टैरिफ नियमों का विश्लेषण करता है जो ट्रम्प ने सहयोगियों जैसे भारत, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया पर सख्ती से लागू किए, जबकि रूस और उत्तर कोरिया जैसे देशों को फूलों की तरह सहारा दिया।

टैरिफ नियम: क्या हैं और क्यों हैं महत्वपूर्ण?

टैरिफ नियमों का उद्देश्य विदेशी उत्पादों पर कर लगाकर घरेलू उद्योग की रक्षा करना होता है। ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान चीन, भारत, और अन्य देशों पर उच्च टैरिफ लगाए। इन नियमों का प्रभाव वैश्विक व्यापार पर बहुत गहरा पड़ा है।

भारत, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया पर सख्ती

ट्रम्प ने भारत, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे मित्र देशों के शुरूआती संबंधों को भले ही मज़बूत करने का प्रयास किया, लेकिन आर्थिक रूप से उनके खिलाफ कठोर कदम उठाए। उदाहरण के लिए, भारत पर फार्मा और कृषि उत्पादों पर टैरिफ लगाया। ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के साथ भी उनकी बातचीत में व्यापार को लेकर कई बाधाएं मौजूद रहीं, जिससे आर्थिक सहयोग प्रभावित हुआ।

रूस और उत्तर कोरिया को राहत

इसके विपरीत, रूस और उत्तर कोरिया जैसे देशों को ट्रम्प ने स्पष्ट रूप से अनदेखा किया। इन देशों के खिलाफ कोई गंभीर टैरिफ नियम लागू नहीं किए गए, जिससे प्रतीत होता है कि ट्रम्प की नीति चयनात्मक थी। यह सवाल उठता है कि क्या यह दोस्ती का खेल था या कोई और राजनीतिक रणनीति?

दुनिया की प्रतिक्रिया

इस विषय पर दुनिया की कई नीति-निर्माताओं, अर्थशास्त्रियों और राजनीति के विशेषज्ञों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। कई लोग इसे विश्व व्यापार के नियमों के प्रति ट्रम्प की लापरवाह दृष्टि मानते हैं। विश्व अर्थव्यवस्था में दुश्मनी का यह दृष्टिकोण न केवल अमेरिका के लिए, बल्कि उसके सहयोगियों के लिए भी नुकसानदेह हो सकता है।

निष्कर्ष

ट्रम्प का यह आर्थिक दृष्टिकोण निश्चित रूप से अप्रत्याशित रहा है। उनके द्वारा अपनाए गए टैरिफ नियम केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय रिश्तों को भी प्रभावित कर रहे हैं। आने वाले समय में देखना होगा कि क्या नई अमेरिकी प्रशासन इस नीति को बदलता है या इसे जारी रखने का निर्णय लेता है। व्यापारिक संबंधों की इस उलझन में, दोस्ती से दुश्मनी का रोल वास्तव में एक ऐसा अध्याय बन गया है जिसे समझना होगा।

फिलहाल, शांति और सहयोग की दिशा में बढ़ने का यही सही समय है। क्या अमेरिका अपने सहयोगी देशों को समझेगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

अधिक जानकारी के लिए, visit theoddnaari.com.

Keywords

Trump tariffs, international trade policy, India UK Australia relations, Russia North Korea trade, economic strategies, global politics, US allies tensions, trade regulations