प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की 10 साल की सफलता के जश्न में स्वास्थ्य सेवाओं का नया आयाम

The post प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 साल पूरे appeared first on Avikal Uttarakhand. एक दिन में 6997 गर्भवतियों की हुई जांच उत्तराखंड में 709 हाई रिस्क प्रेग्नेंसी चिन्हित, मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का दावा अविकल उत्तराखंड देहरादून। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए)… The post प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 साल पूरे appeared first on Avikal Uttarakhand.

Jun 9, 2026 - 18:38
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प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की 10 साल की सफलता के जश्न में स्वास्थ्य सेवाओं का नया आयाम
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की 10 साल की सफलता के जश्न में स्वास्थ्य सेवाओं का नया आयाम

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की 10 साल की सफलता के जश्न में स्वास्थ्य सेवाओं का नया आयाम

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कम शब्दों में कहें तो, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) ने मात्र 10 वर्षों में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण सुधार किया है।

देहरादून। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के 10 वर्ष पूरे होने पर सोमवार को उत्तराखंड के सभी जनपदों में विशेष जांच सत्र और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान राज्यभर में एक दिन में 6997 गर्भवती महिलाओं को प्रसवपूर्व जांच (एएनसी) सेवाएं प्रदान की गईं, जबकि 709 उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं (एचआरपी) की पहचान की गई। यह आंकड़े अभियान की प्रभावशीलता को दर्शाते हैं।

अभियान के उद्देश्य और उपलब्धियाँ

भारत सरकार ने 9 जून 2016 को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व जांच, परामर्श और उपचार उपलब्ध कराना और उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की समय पर पहचान कर मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करना है।

अभियान के तहत प्रत्येक माह की 9 तारीख को विशेष चिकित्सकों द्वारा गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क जांच की जाती है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य में अब तक पीएमएसएमए पोर्टल पर 2,09,125 गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण किया गया है। उन्हें नियमित जांच और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। 10वीं वर्षगांठ पर आयोजित विशेष सत्रों में 4021 महिलाओं को आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और 3129 अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं प्रदान की गईं।

जोखिम पहचान और बेहतर उपचार

अभियान के अंतर्गत गंभीर एनीमिया, गर्भकालीन मधुमेह, उच्च रक्तचाप, एचआईवी, टीबी, हेपेटाइटिस-बी, पूर्व सिजेरियन प्रसव, जुड़वां गर्भावस्था तथा अन्य जटिल परिस्थितियों वाली गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी की जाती है। विभाग का कहना है कि समय पर पहचान और उचित उपचार से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं को कम करने में मदद मिली है।

सरकार की प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान ने उत्तराखंड में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत आधार प्रदान किया है। राज्य सरकार प्रत्येक गर्भवती महिला को सुरक्षित मातृत्व, समय पर जांच और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने भी कहा कि नियमित एएनसी जांच, विशेषज्ञ परामर्श और प्रभावी रेफरल व्यवस्था के कारण मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में प्रशंसनीय सुधार आया है। वहीं, स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पाण्डेय ने बताया कि डिजिटल निगरानी और पोर्टल आधारित ट्रैकिंग के माध्यम से सेवा वितरण को अधिक पारदर्शी बनाया गया है।

भविष्य की दिशा में कदम

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि पीएमएसएमए पोर्टल और मैटरनल वॉर रूम के माध्यम से उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की रियल-टाइम निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग और फील्ड स्तर पर निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

यह अभियान न केवल गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को सशक्त बनाता है, बल्कि इससे समाज में भी महिलाओं को सशक्त और सुरक्षित महसूस कराने में मदद मिलती है। राज्यभर में इस विशेष अभियान की सफलता के अवसर पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों से गर्भवती महिलाओं में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता भी बढ़ रही है।

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संपादित: Team The Odd Naari (साक्षी शर्मा)

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