उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पेपर लीक मामला: सहायक प्रोफेसर गिरफ्तार, WhatsApp पर प्रश्न साझा करने का आरोप
DEHRADUN: उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (UTU) की सेमेस्टर परीक्षा में पेपर लीक मामले में दून पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के सहायक प्रोफेसर आशीष कुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि उन्होंने परीक्षा से पहले छात्रों के वॉट्सएप्प ग्रुप में ऐसे प्रश्न साझा किए थे, जो […] The post UTU पेपर लीक मामले में एसिस्टेंट प्रोफेसर गिरफ्तार, Whatsapp पर लीक किए थे प्रश्न appeared first on Devbhoomi Dialogue.
उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पेपर लीक मामला: सहायक प्रोफेसर गिरफ्तार, WhatsApp पर प्रश्न साझा करने का आरोप
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DEHRADUN: उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (UTU) की सेमेस्टर परीक्षा में पेपर लीक मामले में दून पुलिस ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सहायक प्रोफेसर आशीष कुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। उनके खिलाफ आरोप है कि उन्होंने परीक्षा से पूर्व छात्रों के WhatsApp ग्रुप में ऐसे प्रश्न साझा किए थे, जो बाद में आयोजित परीक्षा के प्रश्नपत्र से मिलते-जुलते पाए गए।
पुलिस की जांच जारी
पुलिस ने इस मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए यह जानने का प्रयास किया है कि क्या इस पेपर लीक में कोई अन्य व्यक्ति या संगठित नेटवर्क शामिल था। जानकारी के अनुसार, परीक्षा समाप्त होने के बाद एक ई-मेल के माध्यम से विश्वविद्यालय को सूचित किया गया था कि सहायक प्रोफेसर ने छात्रों के WhatsApp ग्रुप में महत्वपूर्ण प्रश्न साझा किए थे। 8 जुलाई को उपयुक्त शिकायत प्राप्त होने के बाद इन प्रश्नों का मिलान किया गया तो यह पाया गया कि प्रश्न एक जैसे थे।
यूनिवर्सिटी की आंतरिक जांच
यूनिवर्सिटी की आंतरिक जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि आरोपी सहायक प्रोफेसर पहले भी परीक्षा से पूर्व छात्रों के आंतरिक पोर्टल और WhatsApp पर समान प्रश्न साझा कर चुका है। ऐसे साक्ष्यों के आधार पर अभियोग में नामित आशीष कुमार गुप्ता, सहायक प्रोफेसर, शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग झाझरा को गिरफ्तार किया गया है। उनके खिलाफ कोतवाली प्रेमनगर में बीएनएस की धारा 144/26, 316, 318 (4), 61 (2) के तहत अभियोग दर्ज किया गया है।
शैक्षणिक संस्थानों में परीक्षा का महत्व
यह घटना केवल एक व्यक्ति की गलती नहीं है बल्कि शैक्षणिक संस्थानों की पूरी प्रणाली की भी परीक्षा लेती है। शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह के दुरुपयोग को रोकना अत्यंत आवश्यक है। छात्रों को न्यायपूर्ण और पारदर्शी परीक्षा का अधिकार है। इसलिए, ऐसी घटनाओं पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि भविष्य में कोई ऐसी गलती न हो।
निष्कर्ष
इस घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और ईमानदारी की कितनी आवश्यकता है। सहायक प्रोफेसर की गिरफ्तारी ने यह संदेश दिया है कि ऐसे दुरुपयोग के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह है कि पुलिस अपनी जांच अब किस दिशा में लेकर जाती है और क्या अन्य आरोपी इस मामले में सामने आते हैं।
कम शब्दों में कहें तो, पेपर लीक मामले में सहायक प्रोफेसर की गिरफ्तारी शिक्षा जगत के लिए चेतावनी है कि किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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सादर, टीम द ओड़ नारी
राधिका मेहरा
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