देहरादून: आरटीओ सब-इंस्पेक्टर को रिश्वत लेने पर ट्रांसपोर्ट कारोबारी ने किया बंधक

DEHRADUN: देहरादून में परिवहन विभाग एक बार फिर विवादों में घिर गया है। हर्रावाला क्षेत्र में तैनात एक आरटीओ इंस्पेक्टर पर ट्रांसपोर्ट कारोबारियों से हर महीने रिश्वत वसूलने के आरोप लगे हैं। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और स्थानीय लोगों ने सोमवार को सब इंस्पेक्टर शशिकांत तेंगोवाल को एक दुकान के अंदर करीब दो घंटे तक बंधक बनाकर […] The post रिश्वत लेने पहुंचा आरटीओ सब-इंस्पेक्टर, ट्रांसपोर्ट कारोबारी ने किया दुकान में बंद appeared first on Devbhoomi Dialogue.

May 12, 2026 - 18:38
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देहरादून: आरटीओ सब-इंस्पेक्टर को रिश्वत लेने पर ट्रांसपोर्ट कारोबारी ने किया बंधक
देहरादून: आरटीओ सब-इंस्पेक्टर को रिश्वत लेने पर ट्रांसपोर्ट कारोबारी ने किया बंधक

आरटीओ सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ उठी आवाज, ट्रांसपोर्ट कारोबारी ने किया बंधक

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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून के हर्रावाला क्षेत्र में एक आरटीओ सब-इंस्पेक्टर को रिश्वत लेने के आरोप में ट्रांसपोर्ट कारोबारियों द्वारा दो घंटे तक बंधक बनाया गया। यह घटना प्रशासनिक तंत्र पर उठते सवालों की एक और कड़ी को उजागर करती है।

DEHRADUN: देहरादून के परिवहन विभाग पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगे हैं। हर्रावाला क्षेत्र में तैनात आरटीओ इंस्पेक्टर शशिकांत तेंगोवाल, जो ट्रांसपोर्ट कारोबारियों से हर महीने रिश्वत वसूलने के लिए कुख्यात है, को स्थानीय व्यापारियों ने सोमवार को एक दुकान के अंदर करीब दो घंटे तक बंधक बना लिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जो कि प्रशासन की निष्क्रियता को उजागर करता है।

सोमवार को जब एसआई शशिकांत उपद्रव में मशगूल था, तब वह मासिक वसूली की प्रक्रिया के लिए एक दुकानदार के पास गया। जैसे ही स्थानीय लोगों को इसकी जानकारी मिली, उन्होंने उसे घेर लिया और दुकान के अंदर बंद कर दिया। वायरल वीडियो में सब-इंस्पेक्टर यह कहता हुआ सुनाई पड़ता है कि वह पेशाब करने आया था, और उसी समय उसके लिए रसमलाई मंगवाई गई, जो उसकी स्थिति की मजेदार कहानी बना देता है।

वसूली की भयावहता

यहाँ पर ज़िक्र करना आवश्यक है कि स्थानीय ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का आरोप है कि शशिकांत व्यापारियों से मासिक आधार पर राशि ऐंठता है। छोटे वाहनों से ₹2000, 6-टायर वाहनों से ₹8000, 10-टायर वाहनों से ₹10,000 और 12-टायर वाहनों से ₹12,000 तक वसूली की जाती है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सब-इंस्पेक्टर नियमित रूप से इस तरह की वसूली करता था। जब वह सोमवार को अपनी मासिक वसूली के लिए गया, तब ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और स्थानीय निवासियों के बीच टकराव हो गया। इस घटना के दौरान दुकान में रखी हुई टेबल पर कागज में लिपटे नोटों की गड्डी भी नजर आई, जो व्यापारियों के लिए किसी बड़े घोटाले की ओर इशारा करती है। कई व्यापारियों का दावा है कि यह रिश्वतखोरी का सिलसिला पिछले कई वर्षों से जारी है।

इस स्थिति को और अधिक गंभीरता से लेते हुए, नाराज नागरिकों ने एक पोस्टर भी लगाया, जिसमें चौंकाने वाले शब्द थे: “मैं देहरादून आरटीओ हूं, बिना पैसे गाड़ियां नहीं चलने दूंगा।” इस पोस्टर ने पूरे मामले को और हंगामेदार बना दिया।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया

मामले की गंभीरता को देखते हुए परिवहन सचिव ने आरटीओ प्रशासन को तुरंत जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आरटीओ प्रशासन के संदीप सैनी ने बताया कि इस घटना की व्यापक जांच की जा रही है, और यदि सब-इंस्पेक्टर दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। यह घटना प्रशासन की छवि को मजबूत करने या कमज़ोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

इस घटनाक्रम ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि बहुत से नागरिक सामूहिक रूप से एकजुट होकर भ्रष्टाचार का विरोध करें, तो वे प्रशासन की निष्क्रियता को चुनौती दे सकते हैं। यह घटना न केवल देहरादून बल्कि पूरे देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ उठती आवाज़ों की एक मिसाल है।

इस घटना के बाद यह सवाल उठता है कि क्या हमारी प्रशासनिक महकमों में ऐसी मानसिकता को खत्म करने की प्रयास किए जा रहे हैं या नहीं। क्या हमें अब भी इंतज़ार करना होगा जब तक कि ऐसे और मुद्दों पर चर्चा नहीं हो जाती? इसके पीछे की प्रक्रिया को स्पष्ट करना ही सही समाधान हो सकता है।

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सादर,
तनुजा,
टीम द ऑड नारी

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