सीबीआई द्वारा धोखाधड़ी मामले में आरोप-पत्र दायर, 18 आरोपी समाहित

The post सीबीआई ने आरोपियों के विरुद्ध आरोप-पत्र दायर किया appeared first on Avikal Uttarakhand. उत्तराखण्ड का एलयूसीसी चिटफंड घोटाले अविकल उत्तराखण्ड नई दिल्ली। केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने शुक्रवार 10 जुलाई को उत्तराखंड के लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (एलयूसीसी)… The post सीबीआई ने आरोपियों के विरुद्ध आरोप-पत्र दायर किया appeared first on Avikal Uttarakhand.

Jul 11, 2026 - 00:38
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सीबीआई द्वारा धोखाधड़ी मामले में आरोप-पत्र दायर, 18 आरोपी समाहित
सीबीआई द्वारा धोखाधड़ी मामले में आरोप-पत्र दायर, 18 आरोपी समाहित

सीबीआई द्वारा धोखाधड़ी मामले में आरोप-पत्र दायर, 18 आरोपी समाहित

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कम शब्दों में कहें तो, सीबीआई ने उत्तराखंड के चिटफंड घोटाले में 18 लोगों के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया है, जिसमें बड़े नाम शामिल हैं।

नई दिल्ली: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने शुक्रवार, 10 जुलाई को उत्तराखंड में लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (एलयूसीसी) से जुड़े चिटफंड घोटाले के मामले में 18 आरोपियों के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया है। यह मामला देहरादून स्थित बीयूडीएस अधिनियम के विशेष न्यायालय में दर्ज किया गया है।

आरोपी और उनके खिलाफ धाराएं

इस आरोप-पत्र में शामिल आरोपी हैं: समीर अग्रवाल, शादाब हुसैन, उत्तम कुमार सिंह राजपूत, सानिया अग्रवाल (समीर अग्रवाल की पत्नी), माया सिंह राजपूत (उत्तम कुमार सिंह राजपूत की पत्नी), जितेंद्र सिंह निरंजन, दिनेश सिंह, गिरीश चंद सिंह बिष्ट, उर्मिला बिष्ट, जगमोहन बिष्ट, ममता भंडारी, तरुण कुमार मौर्य, गौरव उर्फ गौरव रोहिल्ला, सुशील गोखरू, किशनलाल उदयलाल जैन, पंकज कुशल सिंह जैन, और राजेंद्र सिंह बिष्ट। इन सभी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, उत्तराखंड जमाकर्ता हित संरक्षण अधिनियम और अन्य धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।

राज्य के उच्च न्यायालय के निर्देश

ज्ञात हो कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय, नैनीताल पीठ ने 2025 में एलयूसीसी चिटफंड घोटाले से संबंधित सभी प्राथमिकियों को सीबीआई को स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। इस आदेश के तहत सीबीआई ने 26 नवंबर 2025 को इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी।

एलयूसीसी की पोंजी स्कीम की कहानी

जांच के अनुसार, एलयूसीसी को वर्ष 2012 में वाजिद खान द्वारा एक मल्टी-स्टेट को-ऑपरेटिव सोसाइटी के रूप में पंजीकृत किया गया था। मुख्य आरोपी, समीर अग्रवाल ने 2016 में इसका प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया। इसके बाद, सोसाइटी ने उत्तराखंड में लगभग 50 शाखाएं खोलकर विभिन्न अनियमित जमा योजनाएं चलाने लगी।

हालांकि, इस दौरान एसोसिएशन के पास कोई वास्तविक आय या लाभ नहीं था। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह एक पोंजी स्कीम थी, जहां नए निवेशकों के डिपॉजिट से पुराने निवेशकों को चुकाया जा रहा था। इस प्रकार, जांच में पाया गया कि लगभग 1 लाख निवेशकों के साथ धोखा हुआ और उनकी कुल निवेश राशि लगभग ₹800 करोड़ थी, जिसमें से ₹400 करोड़ से अधिक की राशि धोखाधड़ी में चली गई।

मुख्य आरोपी और उसकी पत्नी की फरारी

जानकारी के अनुसार, समीर अग्रवाल और उसकी पत्नी सानिया अग्रवाल वर्तमान में विदेश फरार हैं। सीबीआई ने उनके खिलाफ नोटिस जारी किए हैं और उन्हें कानूनी प्रक्रिया के लिए वापस लाने की कोशिश कर रही है।

जांच की स्थिति और संपत्तियों की कुर्की

सीबीआई ने इस मामले की गहन जांच शुरू की है। आरोपियों की कई संपत्तियों की पहचान की गई है, जिन्हें कुर्क करने की प्रक्रिया चल रही है। वर्तमान में, 39 संपत्तियों की पहचान की गई है, जिनमें से 29 पर कुर्की का आदेश जारी किया गया है।

सीबीआई की विशेष टीम ने मामले की गहन पड़ताल करते हुए कुछ आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है। इस मामले में तरुण कुमार मौर्य, ममता भंडारी, गौरव उर्फ गौरव रोहिल्ला, राजेंद्र सिंह बिष्ट, सुशील कुमार गोखरू, किशनलाल उदयलाल जैन और पंकज कुशल सिंह जैन वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं।

यदि आपके पास अधिक जानकारी या अपडेट हैं, तो कृपया www.theoddnaari.com पर जाएँ।

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सादर, टीम द ओड नारि
(नेहा शर्मा)

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