बिहार के एमएसएमई नीति-2026: औद्योगिक विकास की नई दिशा
बिहार सरकार ने राज्य को पूर्वी भारत का प्रमुख औद्योगिक और विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए बिहार एमएसएमई नीति-2026 का प्रारूप (मसौदा) जारी कर दिया है। इस नई नीति का उद्देश्य बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को गति देना है। मुख्य लक्ष्य (अगले 5 वर्षों के […]
बिहार के एमएसएमई नीति-2026: औद्योगिक विकास की नई दिशा
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कम शब्दों में कहें तो, बिहार सरकार की नई नीति रोजगार और औद्योगिक विकास को तेजी से बढ़ावा देने में मदद करेगी।
बिहार सरकार ने राज्य को पूर्वी भारत का प्रमुख औद्योगिक और विनिर्माण केंद्र बनाने के उद्देश्य से बिहार एमएसएमई नीति-2026 का मसौदा जारी किया है। इस नई नीति का केंद्र बिंदु बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को तेज करना है। इस नीति में अगले पांच वर्षों के लिए कई महत्वपूर्ण लक्ष्य रखे गए हैं।
मुख्य लक्ष्य (अगले 5 वर्षों के लिए)
- 1 करोड़ एमएसएमई इकाइयों का पंजीकरण किया जाएगा।
- 1 करोड़ से अधिक नए रोजगारों का सृजन होगा।
- 500 एमएसएमई इकाइयों को वैश्विक वैल्यू चेन से जोड़ा जाएगा।
- प्रति वर्ष 1 लाख उद्यमियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- कोसी, भागलपुर, मुंगेर और पूर्णिया परिक्षेत्र में 4 टेक्नोलॉजी एवं एक्सटेंशन सेंटर की स्थापना की जाएगी।
पूंजी सब्सिडी और वित्तीय सहायता
इस नीति में निवेशकों और उद्यमियों को आकर्षित करने के लिए विशेष अनुदान और सब्सिडी का प्रविधान किया गया है:
- क्षेत्रवार पूंजी सब्सिडी:
- ‘ए’ श्रेणी के जिलों में 25 प्रतिशत सब्सिडी।
- ‘बी’ श्रेणी के जिलों में 30 प्रतिशत पूंजी सब्सिडी।
- इकाई के आकार के अनुसार अधिकतम सीमा:
- सूक्ष्म उद्यम: अधिकतम 25 लाख रुपये तक।
- लघु उद्यम: अधिकतम 1.5 करोड़ रुपये तक।
- मध्यम उद्यम: अधिकतम 5 करोड़ रुपये तक।
- विशेष वर्ग के लिए अतिरिक्त अनुदान: महिला, अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़ा, अति-पिछड़ा, दिव्यांग और मंगलामुखी उद्यमियों को सामान्य से 10 प्रतिशत अतिरिक्त पूंजी अनुदान मिलेगा।
बुनियादी ढांचा और पार्क
- नैनो और मेगा एमएसएमई पार्क: हर जिले में इनकी स्थापना की जाएगी।
- नैनो पार्क: 10 से 20 एकड़ क्षेत्र वाले।
- मेगा पार्क: 20 एकड़ से अधिक क्षेत्र वाले।
- इसके अलावा कॉमन फैसिलिटी सेंटर, हेरिटेज क्लस्टर, परीक्षण प्रयोगशालाएं, और प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक ढांचे का विकास किया जाएगा।
महत्वपूर्ण प्रविधान एवं रियायतें
- ईपीएफ प्रतिपूर्ति: नई इकाइयों को पहले तीन वर्षों तक कर्मचारियों के ईपीएफ में नियोक्ता अंशदान की पूरी प्रतिपूर्ति।
- बिजली अनुदान: तीन वर्षों तक बिजली शुल्क पर 20 प्रतिशत की छूट।
- अन्य रियायतें: रूफटॉप सोलर संयंत्र पर 25 प्रतिशत (अधिकतम 5 लाख रुपये), ऊर्जा एवं जल ऑडिट पर 75 प्रतिशत (अधिकतम 1 लाख रुपये) तथा स्टांप ड्यूटी की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति।
- एसजीएसटी प्रतिपूर्ति: छह वर्षों तक एसजीएसटी की 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति।
- निर्यात प्रोत्साहन: निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रति वर्ष अधिकतम 20 लाख रुपये तक की सहायता।
प्रशासनिक सहायता और सुझाव
- एमएसएमई मित्र व सलाहकार: प्रत्येक जिला उद्योग केंद्र में एमएसएमई केंद्र, प्रखंड स्तर पर ‘एमएसएमई मित्र’ और पंचायत स्तर पर ‘उद्योग सलाहकार’ नियुक्त किए जाएंगे।
- फीडबैक / सुझाव: इस मसौदे पर इच्छुक व्यक्ति आगामी 15 दिनों के भीतर ई-मेल के जरिए अपने सुझाव दे सकते हैं, जिसके आधार पर नीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।
यह नयी नीति न केवल बिहार में औद्योगिक विकास को गति देगी, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी बनाएगी। बिहार सरकार की यह पहल एक नया युग लाने की उम्मीद जगाती है।
इसके फ़ायदे के लिए सरकार ने एक समर्पित वेबसाइट बनाया है, जहाँ विस्तृत जानकारी उपलब्ध है। अधिक जानकारी के लिए, [यहाँ क्लिक करें](https://theoddnaari.com)।
टیم द ओड नारी
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