अंकिता भंडारी हत्याकांड: भारी बारिश में सीबीआई कार्यालय के समक्ष आंदोलनकारियों की आवाज़ें गूंजीं
DEHRADUN: उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक दलों ने एक बार फिर से हुंकार भरी। गुरुवार को अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के बैनर तले जन सरोकारों से जुड़े दर्जनों संगठनों ने सीबीआई कार्यालय देहरादून में तालाबंदी की औऱ भारी बारिश के बीच जोरदार प्रदर्शन किया। पुलिस प्रशासन […] The post अंकिता भंडारी हत्याकांड: भारी बारिश के बीच आंदोलनकारियों ने की सीबीआई कार्यालय में तालाबंदी, उठाए तीखे सवाल appeared first on Devbhoomi Dialogue.
अंकिता भंडारी हत्याकांड: भारी बारिश में सीबीआई कार्यालय के समक्ष आंदोलनकारियों की आवाज़ें गूंजीं
DEHRADUN: उत्तराखंड में चर्चित अंकिता भंडारी की हत्या के मामले ने एक बार फिर से राजनीतिक और सामाजिक संगठनों को एकजुट किया है। अगामी मुद्दों को लेकर गूंजती आवाज़ें अब धरनों और प्रदर्शनों के रूप में निकलकर सामने आई हैं। गुरुवार को अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के बैनर तले कई संगठनों ने सीबीआई कार्यालय, देहरादून में भारी बारिश के बीच तालाबंदी करते हुए प्रदर्शन किया।
कम शब्दों में कहें तो, इस आंदोलन ने प्रशासन के लिए कई जटिल सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस प्रदर्शনে पुलिस ने सीबीआई कार्यालय के मुख्य द्वार पर बैरिकेड्स लगाकर महिलाओं और आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन महिलाएं अन्य प्रवेश द्वार से प्रदर्शन स्थल तक पहुँच गईं और प्रतीकात्मक तालाबंदी की। इस दौरान सीबीआई अधिकारी बाहर आए किंतु वे कार्यालय के अंदर ही रहे। आंदोलनकारियों ने उनसे कई गंभीर सवाल पूछे और मामले की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी मांगी। अधिकारियों के जवाब से असंतुष्ट आंदोलनकारियों ने सीबीआई कार्यालय के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया।
महत्वपूर्ण सवालों की उठान
इस क्रम में आंदोलनकारियों ने कुछ महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं:
- आखिर अंकिता भंडारी मामले में कथित वीआईपी कौन है?
- दुष्यंत गौतम और अजय कुमार जैसे names सामने आने के बावजूद उनसे पूछताछ क्यों नहीं की गई?
- मुख्यमंत्री के आदेशों पर किए गए बुलडोजर के कार्य का साक्ष्य मिटाने के आरोपों की जांच क्यों नहीं हुई?
- बुलडोजर चलाकर संभावित साक्ष्य मिटाने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- छह महीने बाद भी सीबीआई जांच में क्या प्रगति हुई?
- क्या सीबीआई ने उर्मिला सनावर, रेनू बिष्ट एवं अन्य लोगों से पूछताछ की है?
- अंकिता भंडारी के माता-पिता को अब तक सीबीआई ने क्यों नहीं बुलाया?
उत्तर और जवाबदेही की मांग
प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने जोरदार नारेबाजी की और जनगीत गाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंकिता न्याय यात्रा के दौरान जो वायदा किया गया था, उसे हर हाल में पूरा किया जाएगा। वक्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने का नहीं, बल्कि उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा और लोकतांत्रिक जवाबदेही के लिए संगठित किया गया है।
आंदोलन की भविष्यवाणी
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सीबीआई अपने उत्तरदायित्व को पूरा नहीं करती और जल्दी ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है, तो इस आंदोलन को और व्यापक रूप में फैलाया जाएगा। सम्मेलन में शामिल महिलाओं ने यह बताने का प्रयास किया कि यह लड़ाई केवल अंकिता भंडारी के लिए नहीं, बल्कि उत्तराखंड की हर बेटी की सुरक्षा और उनके न्याय की लड़ाई है।
इस आंदोलन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि समाज में जागरूकता और लड़ाई का एक नया दौर शुरू हो चुका है। ऐसे मुद्दों पर जन जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है ताकि सरकारें अपनी जिम्मेदारियों को समझें और उन्हें पूरा करें।
भारी बारिश में भी उपस्थित लोगों ने धैर्यपूर्वक वक्ताओं की बातें सुनीं, जो आंदोलन की महत्वता को प्रतिनिधित्व करते हैं। इस घटना से यह संकेत मिलता है कि समाज में अब संवेदनशीलता बढ़ी है और लोग अपनी हक की लड़ाई को लेकर सजग हैं।
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सादर,
टीम द ओड नारी - सुषमा
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