मणिपुर में कांगपोकपी और कामजोंग में 24 घंटे का कर्फ्यू, बाजार बंद

10 लोगों की मौत के बाद भारी सुरक्षा तैनाती गुवाहाटी। मणिपुर में नगा और कुकी समुदायों के बीच हिंसक झड़पों के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। कांगपोकपी और कामजोंग जिलों में 10 लोगों की मौत के बाद प्रशासन ने 24 घंटे का कर्फ्यू लागू किया। तनाव को देखते हुए बाजार बंद रहे और संवेदनशील […]

Oct 12, 2026 - 09:38
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मणिपुर में कांगपोकपी और कामजोंग में 24 घंटे का कर्फ्यू, बाजार बंद
मणिपुर में कांगपोकपी और कामजोंग में 24 घंटे का कर्फ्यू, बाजार बंद

मणिपुर में कांगपोकपी और कामजोंग में 24 घंटे का कर्फ्यू, बाजार बंद

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कम शब्दों में कहें तो, मणिपुर के कांगपोकपी और कामजोंग जिलों में हाल की हिंसा के बाद प्रशासन ने 24 घंटे का कर्फ्यू लगा दिया है। नगा और कुकी समुदायों के बीच झड़पों में 10 लोगों की मौत हो चुकी है। इस तनाव के कारण बाजार भी बंद हैं। Manipur Violent Clashes

10 लोगों की मौत के बाद सुरक्षा तैनाती

गुवाहाटी से मिली जानकारी के अनुसार, मणिपुर में नगा और कुकी समुदायों के बीच हिंसक झड़पों के चलते स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है। कांगपोकपी और कामजोंग जिलों में हुई घटनाओं ने प्रशासन को कर्फ्यू लगाने के लिए मजबूर कर दिया है। यह निर्णय उन क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करने और हिंसा को नियंत्रित करने के लिए लिया गया है।

पुलिस और प्रशासन इस समय स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा को अपनी शीर्ष प्राथमिकता मान रहे हैं। हालाँकि, गोलीबारी की जारी घटनाएँ और गांवों में हो रहे हमले स्थानीय लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं।

संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बल तैनात

कांगपोकपी और कामजोंग क्षेत्रों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), असम राइफल्स, और अन्य सुरक्षा बलों की टुकड़ियाँ तैनात की गई हैं। पुलिस ने बताया कि शांति स्थापना के उद्देश्य से विशेष रूप से माकुई अशांग, तपोन और चसाड जैसे संवेदनशील इलाकों में घर-घर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

11 अक्टूबर की रात को हुई घटनाओं में मारे गए लोगों के शवों को सुरक्षा घेरे में रखा गया है, जिसे देख स्थानीय समुदायों में और अधिक तनाव बढ़ गया है।

महिला की हत्या के बाद भड़की हिंसा

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, शनिवार को कुकी-बहुल गांव चसाड में एक महिला की हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद नगा और कुकी समुदायों के बीच तनाव ने तेजी से हिंसक रूप ले लिया। पिछले कुछ दिनों से गांवों में हो रही रातभर की गोलीबारी ने लोगों के बीच एक डर का वातावरण बना रखा है।

हालाँकि सुरक्षा बलों की मौजूदगी भी इस स्थिति को बदल नहीं पा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में नहीं है, और यह एक गंभीर चिंता का विषय है।

बाहरी उग्रवादियों की स्थिति

स्थानीय निवासी डेविड जॉन्सन ने बताया कि इलाके में भारी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, फिर भी गोलीबारी जारी है। रिपोर्ट्स में ऐसे बाहरी उग्रवादियों की गतिविधियों का जिक्र है, जिनका नाम ले लिया गया है, जैसे कि कुकी नेशनल आर्मी-बर्मा (KNA-B) और म्यांमार स्थित पीपुल्स डिफेंस फोर्स (PDF)।

विशेषज्ञों का मानना है कि म्यांमार में राजनीतिक स्थिति की अस्थिरता भी इस समस्या को और बढ़ा रही है।

कई जिलों में नगा-कुकी संघर्ष का फैलाव

नगा और कुकी समुदायों के बीच संघर्ष अब पहले से अधिक जिलों में फैल चुका है। पहले केवल उखरुल जिले तक सीमित रहने वाला यह संघर्ष अब कांगपोकपी, कामजोंग, सेनापति और अन्य जिलों तक पहुँच गया है।

दोनों समुदायों के बीच उग्रवादियों को आश्रय देने का आरोप भी लगाया जा रहा है। ऐसे गंभीर आरोपों का निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है, ताकि निर्दोष लोगों को निशाना न बनाया जा सके।

शांति बहाली प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

मणिपुर में अत्यधिक घटनाओं ने आम जनता की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। कर्फ्यू लगाने और सुरक्षा बलों की तैनाती सिर्फ तबाही को नियंत्रित करने में सहायता कर सकती है, लेकिन स्थायी शांति के लिए जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और समुदायों के बीच संवाद की आवश्यकता है।

प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि इस हिंसा का अंत कब होगा और कब स्थानीय निवासी अपने जीवन को फिर से सामान्य बना सकेंगे।

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साइन ऑफ: टीम द ओड नारी

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