भारत के आगे ढीला पड़ गया अमेरिका, टैरिफ पर बड़ा बयान! जवाबी कार्रवाई के लिए मोदी सरकार ने बना रखा है ये प्लान?
2 अप्रैल वो तारीख है जब अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप का रेसिप्रोकल टैरिफ कई देशों की धड़कनें बढ़ा देगा। ट्रंप पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि वो 2 अप्रैल से भारत पर भी रेसिप्रोकल टैरिफ लगाएंगे। ट्रंप ने इस दिन को लिबरेशन डे के तौर पर मनाने की बात भी कही है। वहीं ट्रंप का ये भी कहना है कि भारत अमेरिकी वस्तुओं पर लगाए गए अपने टैरिफ को काफी हद तक कम करेगा। वाशिंगटन भारत सहित कई यूरोपीय देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने की योजना बना रहा है। ट्रंप आज शाम रोज गार्डन में 'मेक अमेरिका वेल्दी अगेन इवेंट में भाषण देंगे। इसी इवेंट में रेसिप्रोकल टैरिफ को लेकर घोषणा होगी। इसे भी पढ़ें: Trump Tariff Day पर घबराया नहीं बाजार, इन 3 कारणों से आई बड़ी तेजी, भारत के किन सेक्टर्स पर कितना होगा असर?व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अगर आप कारों पर यूरोपीय संघ को देखें तो यूरोपीय संघ ने पहले ही अपने टैरिफ को घटाकर ढाई प्रतिशत कर दिया है। मुझे लगता है कि मैंने कुछ समय पहले ही सुना की भारत अपने टैरिफ को काफी हद तक कम करने जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आगे कहा कि बहुत से देश अपने टैरिफ कम करेंगे क्योंकि वो अमेरिका पर अनुचित तरीके से टैरिफ लगा रहे हैं। ट्ंप का मानना है कि टैरिफ की मदद से अमेरिका का व्यापार घाटा कम किया जा सकता है। लेकिन एक सच्चाई ये भी है कि टैरिफ की वजह से अमेरिका में महंगाई बढ़ सकती है। इसे भी पढ़ें: कोई तो रोक लो...ट्रंप के विरोध में सांसद ने दिया 25 घंटे तक नॉन स्टॉप भाषण, जमकर सुनाई खरी खोटीवो इससे पहले ही अमेरिका में इंपोर्ट होने वाली कारों और ऑटो पार्ट्स पर 25 फीसदी टैरिफ लगा चुके हैं। इससे अमेरिका में विदेशी कारों की कीमतें महंगी हो सकती हैं। रेसिप्रोकल टैरिफ का मतलब जैसे को तैसा है। यानी जो देश जितना टैरिफ अमेरिकी इंपोर्ट पर लगाता है उतना ही टैरिफ उसके इंपोर्ट पर भी लगेगा। इस रेसिप्रोकल टैरिफ से वो देश प्रभावित होंगे जो अमेरिकी उत्पादों पर अधिक टैरिफ लगाते हैं। अमेरिका अब इन देशों से इंपोर्ट होने वाले सामान पर समान शुल्क लगाएगा। नए टैरिफ से अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ सकता है। वर्ल्ड ट्रेंड आर्गनाइजेशन की माने तो भारत में औसतन टैरिफ सबसे अधिक 17 फीसदी है। इसे भी पढ़ें: ड्रैगन और हाथी की जोड़ी...ट्रंप की टैरिफ धमकियों के बीच भारत का नाम लेकर जिनपिंग ने अमेरिका को तगड़ा जवाब दे दियाभारत भी अमेरिका को टैरिफ में छूट देने का रास्ता भी अपना सकता है। भारत और अमेरिका व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर भी काम कर रहे हैं। घरेलू उद्योग और निर्यातकों ने भारत के निर्यात पर अमेरिका के जवाबी टैरिफ के संभावित प्रभाव पर चिंता जताई है। भारत का प्लान ए, प्लान बी और प्लान सी इन बातों पर निर्भर करेगा कि अमेरिका किस तरह से जवाबी टैरिफ लगा रहा है और किन सेक्टर्स पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।

भारत के आगे ढीला पड़ गया अमेरिका, टैरिफ पर बड़ा बयान! जवाबी कार्रवाई के लिए मोदी सरकार ने बना रखा है ये प्लान?
The Odd Naari
लेखिका: स्वाति चोपड़ा, टीम नेटानागरी
कृपया समझिए हालात
हाल ही में अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ भी केवल एक आर्थिक पश्चाताप के सिवा और कुछ नहीं। भारत ने अब अमेरिका की इस पॉलिसी के खिलाफ एक ठोस रणनीति तैयार की है। अमेरिका के व्यापारिक दबाव के मद्देनजर, भारतीय सरकार ने इस मुद्दे पर गंभीर विचार-विमर्श किया है और अब इस पर एक बड़ा बयान देने की तैयारी कर ली है।
अमेरिका की टैरिफ नीति का प्रभाव
अमेरिका ने अपने उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाने का निर्णय लिया ताकि वे अपने घरेलू उद्योगों की सुरक्षा कर सकें। इस कदम से ना केवल भारत, बल्कि अन्य देशों को भी अपार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक व्यापार में अस्थिरता आएगी। मोदी सरकार ने कहा है कि भारत इस नीति के खिलाफ चुप नहीं बैठेगा।
मोदी सरकार का जवाबी स्ट्रेटेजी
भारत की मोदी सरकार ने अमेरिका के इस टैरिफ नीति का जवाब देने के लिए एक ठोस योजना बनाई है। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने एक विशेष मीटिंग बुलाई है जिसमें सभी संबंधित मंत्रालयों के अधिकारी और व्यापारी शामिल होंगे। इस मीटिंग में यह तय किया जाएगा कि किस प्रकार से अमेरिका के टैरिफ का जवाब दिया जा सकता है। एक अफवाह के अनुसार, भारत अपने उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाने का निर्णय कर सकता है, जिससे अमेरिका के हितों पर असर पड़ेगा।
सकारात्मक पहलू: अवसर की तलाश
हालांकि, यह स्थिति भारतीय उद्योगों के लिए एक चुनौती भी है, लेकिन साथ ही सही रणनीति अपनाने पर यह एक अवसर भी प्रदान कर सकती है। भारत को यह सोचने का मौका मिला है कि कैसे वे अपने घरेलू उत्पादन को मजबूत कर सकते हैं और वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति को मजबूत बना सकते हैं।
निष्कर्ष
इसके स्पष्ट संकेत हैं कि भारत अपने हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। अमेरिका के साथ टैरिफ के मुद्दे पर विवाद बढ़ने की संभावना है। भारतीय उद्योग और व्यापार जगत को इसके लिए तैयार रहना होगा।
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