नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं, बघेल बोले- भाजपा का सच उजागर
दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिए जाने के बाद कांग्रेस ने इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री […]

दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिए जाने के बाद कांग्रेस ने इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी अपने नेताओं का सम्मान करना नहीं जानती और समय आने पर उन्हें किनारे कर देती है।
भूपेश बघेल ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि भाजपा में नेताओं के साथ व्यवहार ऐसा किया जाता है जैसे “दूध में पड़ी मक्खी को निकालकर फेंक दिया जाता है।” उन्होंने कहा कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा जैसे अनुभवी और लंबे समय तक पार्टी के लिए काम करने वाले नेता को टिकट न देकर भाजपा ने यह साबित कर दिया है कि वहां समर्पित नेताओं का भी सम्मान सुरक्षित नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि “यूज एंड थ्रो” भाजपा की कार्यशैली बन चुकी है। जब तक किसी नेता की जरूरत रहती है, तब तक उसे महत्व दिया जाता है और जैसे ही राजनीतिक समीकरण बदलते हैं, उसे किनारे कर दिया जाता है। बघेल के अनुसार यह केवल नरोत्तम मिश्रा का मामला नहीं बल्कि भाजपा की आंतरिक राजनीति का उदाहरण है।
भाजपा के फैसले पर बढ़ी राजनीतिक चर्चा
भाजपा द्वारा दतिया उपचुनाव के लिए नए उम्मीदवार की घोषणा के बाद प्रदेश की राजनीति में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नरोत्तम मिश्रा लंबे समय तक प्रदेश की राजनीति में प्रभावशाली चेहरा रहे हैं। ऐसे में उन्हें टिकट न मिलने के निर्णय ने कार्यकर्ताओं और राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालांकि भाजपा की ओर से इस फैसले को संगठन का सामूहिक निर्णय बताया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि चुनावी रणनीति और स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार का चयन किया गया है। भाजपा नेताओं का दावा है कि संगठन का हर निर्णय पार्टी और जनता के हित में होता है।
कांग्रेस ने साधा भाजपा पर निशाना
कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर लगातार भाजपा पर हमलावर है। पार्टी नेताओं का कहना है कि भाजपा में वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा की जा रही है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा केवल चुनावी लाभ के हिसाब से नेताओं का उपयोग करती है और बाद में उन्हें महत्व नहीं देती।
भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा में वरिष्ठ नेताओं का सम्मान लगातार कम होता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के अंदर असंतोष बढ़ रहा है और इसका असर आगामी चुनावों में देखने को मिल सकता है।
भाजपा ने किया पलटवार
भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि कांग्रेस को भाजपा के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से निर्णय लेती है और सभी कार्यकर्ता संगठन के फैसले का सम्मान करते हैं।
भाजपा ने यह भी कहा कि कांग्रेस अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के लिए इस तरह के बयान दे रही है। पार्टी के अनुसार उम्मीदवार चयन पूरी तरह संगठन की रणनीति का हिस्सा है और इसका किसी नेता के सम्मान से कोई संबंध नहीं है।
उपचुनाव पर रहेगा सबकी नजर
दतिया उपचुनाव इस बार कई कारणों से चर्चा में है। एक ओर भाजपा ने नया चेहरा मैदान में उतारा है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस इस फैसले को राजनीतिक हथियार बनाकर जनता के बीच ले जाने की तैयारी कर रही है। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार तेज होता जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव प्रचार के दौरान यह मुद्दा और अधिक गर्मा सकता है। भाजपा अपने संगठनात्मक निर्णय को सही ठहराने का प्रयास करेगी, जबकि कांग्रेस इसे वरिष्ठ नेताओं के अपमान के रूप में जनता के सामने रखने की कोशिश करेगी।
जनता के बीच क्या पड़ेगा असर?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी चुनाव में उम्मीदवार चयन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि किसी बड़े नेता का टिकट कटता है तो उसके राजनीतिक और संगठनात्मक प्रभाव पर चर्चा होना स्वाभाविक है। हालांकि अंतिम फैसला मतदाताओं के हाथ में होता है और चुनाव परिणाम ही तय करेंगे कि किस दल की रणनीति सफल रही।
दतिया उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। आने वाले दिनों में चुनावी सभाएं, प्रचार अभियान और राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। फिलहाल नरोत्तम मिश्रा को टिकट न मिलने और भूपेश बघेल की टिप्पणी ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
What's Your Reaction?