“चंद्रप्रभा का अटूट संकल्प” नाटक: एक महाकवि का अद्वितीय मंचन
The post “चंद्रप्रभा का अटूट संकल्प” नाटक में रंगकर्मियों ने बांधा समां appeared first on Avikal Uttarakhand. पहाड़ की नारी के पहाड़ जैसे संघर्ष का नाट्य रूपांतरण दर्शकों ने सराहा अविकल उत्तराखण्ड देहरादून।मेघदूत नाट्य संस्था द्वारा राजधानी के ऐतिहासिक जुगमंदर हॉल (नगर निगम प्रेक्षागृह) में रविवार को… The post “चंद्रप्रभा का अटूट संकल्प” नाटक में रंगकर्मियों ने बांधा समां appeared first on Avikal Uttarakhand.
“चंद्रप्रभा का अटूट संकल्प” नाटक: एक महाकवि का अद्वितीय मंचन
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कम शब्दों में कहें तो, “चंद्रप्रभा का अटूट संकल्प” नाटक ने पहाड़ की नारियों के संघर्षों को जीवंत कर दिया है। यहाँ अद्वितीय प्रदर्शन कर रहे रंगकर्मियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
देहरादून।
मेघदूत नाट्य संस्था द्वारा राजधानी के ऐतिहासिक जुगमंदर हॉल (नगर निगम प्रेक्षागृह) में रविवार को “चंद्रप्रभा का अटूट संकल्प”, नाटक का भव्य मंचन किया गया। इस नाटक की प्रस्तुति दर्शकों के दिलों में गहराई तक उतर गई, जिसकी यादें उन्हें लंबे समय तक ताजा रहेगी।
यह नाटक प्रख्यात रंगकर्मी एस.पी. ममगाईं द्वारा लिखित और निर्देशित किया गया है, जिसमें भारतीय सेना में कार्यरत एक सैन्य अधिकारी की शहादत और उनकी पत्नी चंद्रप्रभा द्वारा तीन बेटियों को सशक्त बनाने की संघर्ष गाथा का मंचन किया गया। यह नाट्य रूपांतरण पहाड़ की नारियों की अदम्य साहस और संघर्ष को बखूबी प्रदर्शित करता है।
नाटक की कहानी और कथानक
कथानक के अनुसार, सैन्य अधिकारी रघुवीर की शादी पहाड़ की कन्या चंद्रप्रभा से होती है। जब कैप्टन रघुवीर शहीद हो जाते हैं, तब चंद्रप्रभा जीवन के हर कठिनाईयों का सामना करते हुए अपनी बेटियों को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाने का संकल्प लेती है। यह नाटक न केवल एक व्यक्तिगत कहानी है, बल्कि यह उत्तराखंड की नारी की शक्ति और संकल्प का प्रतीक है।
यह नाटक पहले बार किसी आत्मकथा के नाट्य रूपांतरण के रूप में प्रस्तुत किया गया और दर्शकों ने इसे प्रशंसा के साथ अपनाया। इस अवसर पर देहरादून जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती मधु चौहान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं और उन्होंने इसे नारी शक्ति का अद्भुत उदाहरण बताया।
अभिनेताओं का प्रदर्शन
चंद्रप्रभा की भूमिका अनुपमा गुसाईं ने निभाई, जबकि कैप्टेन रघुवीर की भूमिका में अखिलेश रावत ने शानदार अभिनय किया। अन्य नामचीन कलाकारों में बसुमती की भूमिका में जान्हवी, कर्नल बैंस की भूमिका में उत्तम बन्दूनी, और कई अन्य शामिल थे। पूरी टीम का समर्पण दर्शकों को अंत तक देखते रहने के लिए मजबूर कर दिया।
संगीत और निर्देशन
इस नाटक के लिए संगीत आलोक मलासी द्वारा तैयार किया गया था, और गायन में लिली ढौंढियाल ने उन्हें साथ दिया। नृत्य निर्देशन पूनम राणा ने किया, जबकि संगीत संयोजन मोहित कुमार ने संभाला। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार दिनेश शास्त्री और वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल दत्त शर्मा ने मिलकर किया।
इस नाटक में उपस्थित दर्शकों की संख्या भी उल्लेखनीय थी, जिन्होंने शानदार अभिनय के लिए कलाकारों का जमकर स्वागत किया। नाटक ने सिद्ध किया कि रंगमंच पर लाने वाली कहानियाँ न केवल मनोरंजन करती हैं बल्कि सशक्त करने वाली भी होती हैं।
निष्कर्ष
चंद्रप्रभा का अटूट संकल्प नाटक ने एक अनोखी पहचान बनाई है और दर्शकों के दिलों में गहराई तक उतर गया है। इस नाटक ने न केवल पहाड़ की नारी की कहानी को प्रस्तुत किया है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि संघर्ष और साहस के माध्यम से कैसे किसी भी परिस्थिति का सामना किया जा सकता है। ऐसे नाटकों की आवश्यकता है जो हमारे समाज की मूल बातें उजागर करें।
इस नाटक के माध्यम से हमें अपने भीतर की नारी शक्ति को पहचानने और उसे संजोने का अवसर मिला है। दर्शकों ने इसे मुक्तकंठ से सराहा और यह सभी के जीवन में एक विशेष स्थान बना गया है।
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— टीम द ऑड नारी, स्नेहा शर्मा
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