पौड़ी में गुलदार का आतंक बढ़ता जा रहा है, कमंद गांव में 61 वर्षीय बुजुर्ग की जान गई
PAURI GARHWAL: पौड़ी में वन विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। यहां डीएफओ औऱ बड़े अधिकारी लीसा महोत्सव के जश्न से बाहर नहीं निकल पा रहे और दूसरी तरफ बाघ गुलदार के हमलों में बेगुनाह लोगों की जिंदगी जाने का सिलसिला जारी है। शुक्रवार शाम को जिला मुख्यालय के करीब बसे कमंद […] The post पौड़ी में नहीं थम रहा गुलदार का आतंक, कमंद गांव में 61 साल के बुजुर्ग को बनाया निवाला, लोगों में आक्रोश appeared first on Devbhoomi Dialogue.
पौड़ी में गुलदार का आतंक बढ़ता जा रहा है, कमंद गांव में 61 वर्षीय बुजुर्ग की जान गई
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कम शब्दों में कहें तो पौड़ी जिले के कमंद गांव में एक बुजुर्ग की जान पर गुलदार ने हमला कर दिया, जिससे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया है। इस घटना ने वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
पौड़ी गढ़वाल: पौड़ी में वन विभाग एक बार फिर आलोचना के घेरे में आ गया है। डीएफओ और अन्य उच्च पदाधिकारी लीसा महोत्सव के आयोजन में व्यस्त हैं, जबकि दूसरी ओर, बाघ गुलदार के हमलों में बेगुनाह लोगों की जानें जा रही हैं। शुक्रवार शाम को, जिला मुख्यालय के पास स्थित कमंद गांव में, एक बुजुर्ग मोहन चंद्रम मलासी (61) को गुलदार ने शिकार बना लिया। इस घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा हो गया है।
घटना का विवरण
जानकारी के अनुसार, मोहन चंद्रम मलासी अपने घर के पास बकरियों के लिए चारा लेने गए थे। इसी दौरान, शाम लगभग 7 बजे, गुलदार ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें घसीटते हुए दूर ले गया। जब वह घर नहीं लौटे, तो परिजनों और गांव के लोगों ने उनकी तलाश शुरू की। लंबे समय तक खोजबीन के बाद, उनका शव क्षत-विक्षत अवस्था में बरामद हुआ।
ग्रामीणों का विरोध
घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्र के ग्रामीण एकजुट हो गए। प्रशासन और वन विभाग की टीम को ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। शनिवार को भी स्थानीय लोगों ने शव को उठाने नहीं दिया और वन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों का कहना था कि विभाग केवल कार्यक्रमों में व्यस्त है और गांव में बढ़ती गुलदार की समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। ग्राम प्रधान साधना देवी ने बताया कि गांव में लगातार गुलदार का आतंक रहता है। वे बार-बार विभाग को सूचना देते हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती है।
गुलदार के आतंक का इतिहास
पौड़ी जिले के आसपास के क्षेत्रों में गुलदार के हमलों का इतिहास बहुत पुराना है। पिछले एक साल में विभिन्न गांवों में गुलदार ने लगभग 9 लोगों को अपना शिकार बनाया है। इसके बावजूद, प्रशासन ने इस दिशा में अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
आवश्यक कदम और सिफारिशें
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, यह आवश्यक हो गया है कि वन विभाग और स्थानीय प्रशासन इस समस्या को सुलझाने के लिए ठोस योजना बनाएं। उदाहरणस्वरूप, क्षेत्र में सुरक्षित स्थान पर पिंजरे लगाने, तथा गुलदार के प्राकृतिक habitats की सुरक्षा का ध्यान रखा जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, लोगों को जागरूक करना चाहिए ताकि वे ऐसी स्थितियों में सतर्क रहने के लिए तैयार रहें।
इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर स्थानीय प्रशासन और वन विभाग समय पर कार्रवाई नहीं करता, तो ऐसे हमले लगातार जारी रह सकते हैं।
इसलिए, सरकार को उचित निर्णय लेना होगा ताकि ऐसे शर्मनाक घटनाएं भविष्य में न हों। इसके लिए जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन कर, लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जानी चाहिए।
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सादर,
टीम द ओड नारी
प्रियंका शर्मा
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