अल्मोड़ा में 52वें कृषि विज्ञान मेले का भव्य आयोजन

The post अल्मोड़ा में कृषि विज्ञान मेले का आयोजन appeared first on Avikal Uttarakhand. अल्मोड़ा।  जिले के हवालबाग स्थित विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में 52वें कृषि विज्ञान मेले का आयोजन किया गया। “खेती में नवीनता, पोषण में श्रेष्ठता” थीम पर आयोजित इस मेले… The post अल्मोड़ा में कृषि विज्ञान मेले का आयोजन appeared first on Avikal Uttarakhand.

Apr 5, 2026 - 13:36
 117  15.2k
अल्मोड़ा में 52वें कृषि विज्ञान मेले का भव्य आयोजन
अल्मोड़ा में 52वें कृषि विज्ञान मेले का भव्य आयोजन

अल्मोड़ा में 52वें कृषि विज्ञान मेले का भव्य आयोजन

Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - The Odd Naari

कम शब्दों में कहें तो, अल्मोड़ा के विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में 52वें कृषि विज्ञान मेले का आयोजन किया गया, जिसमें 1500 से अधिक किसानों और उत्पादक संगठनों ने भाग लिया।

अल्मोड़ा। जिले के हवालबाग स्थित विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में 52वें कृषि विज्ञान मेले का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम “खेती में नवीनता, पोषण में श्रेष्ठता” थी। यहाँ प्रदेशभर से 1500 से अधिक किसान और उत्पादक संगठन उपस्तिथ हुए। यह मेला पर्वतीय कृषि की आधुनिकतम तकनीकों और शोध परिणामों को किसानों तक पहुँचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित हुआ।

मुख्य कार्यक्रम और उद्घाटन

कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से, जिसने मेले के माहौल को गरिमामय बना दिया। मुख्य अतिथि डॉ. मांगी लाल जाट, सचिव, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग, भारत सरकार, और महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली, ने इस आयोजन का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में अन्य विशिष्ट अतिथियों में डॉ. देवेन्द्र कुमार यादव, उप महानिदेशक (फसल विज्ञान), और डॉ. राजबीर सिंह, उप महानिदेशक (कृषि विस्तार) भी शामिल हुए।

कृषि विज्ञान मेला

उन्नत कृषि तकनीकों का प्रदर्शन

इस मेले में विभिन्न जनपदों के किसानों ने विकास प्रदर्शनी लगाई और वैज्ञानिकों द्वारा विकसित आधुनिक कृषि तकनीकों और उन्नत उपकरणों की जानकारी दी गई। अद्वितीय अनुसंधान परिणामों को प्रदर्शित करने के साथ-साथ किसानों के प्रक्षेत्र भ्रमण का आयोजन किया गया, जिससे वे नवीनतम कृषि तकनीकों को प्रत्यक्ष देख सकें।

संस्थान की उपलब्धियाँ

संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त ने सभी अतिथियों और कृषकों का अभिनंदन करते हुए संस्थान की उपलब्धियों का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि संस्थान अब तक 200 से अधिक उन्नत प्रजातियां विकसित कर चुका है, विशेषकर बायोफोर्टिफाइड मक्का की किस्मों ‘वी.एल. त्रिपोषी’ और ‘वी.एल. सुपोषिता’। ये प्रजातियाँ पोषण सुरक्षा की दृष्टि से मील का पत्थर हैं।

डॉ. कान्त ने साझा किया कि किस प्रकार उर्वरकों की खपत कम करने और खेती को सुगम बनाने के लिए विभिन्न तकनीकों का विकास किया गया है। उन्होंने नवीन फसलों जैसे हींग और किनोआ पर विशेष ध्यान दिया और बताया कि ये फसलें भविष्य में आय का साधन बन सकती हैं।

उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर जोर

मुख्य अतिथि डॉ. मांगी लाल जाट ने उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग के नुकसान के प्रति किसानों को सचेत किया। उन्होंने ‘उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर गहन अभियान’ के शुभारंभ की घोषणा की, जिसका मुख्य उद्देश्य मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा देना है।

डॉ. जाट ने मशरूम, मौनपालन और पॉलीहाउस जैसी तकनीकों को अपनाने के लिए किसानों को उत्साहित किया ताकि उनकी आय दोगुना करने की संभावनाएँ बढ़ सकें।

प्रगतिशील किसानों का सम्मान

सम्मान समारोह में विभिन्न प्रगतिशील किसानों को पुरस्कृत किया गया, जिन्होंने नवीन तकनीकों को अपनाकर अपनी आय और जीवन स्तर में सुधार किया। मेले का आयोजन न केवल कृषि की उन्नति के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पर्वतीय समुदायों के आर्थिक विकास में भी सहायक है।

निष्कर्ष

कृषि विज्ञान मेला इस क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण प्लेटफार्म साबित हो रहा है, जहाँ किसानों को नई-नई तकनीकों से अवगत कराया जाता है। इससे न केवल उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ती है, बल्कि उनके जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आता है। इस मेले के माध्यम से उम्मीद है कि दर्जनों किसान आत्मनिर्भर बन सकेंगे एवं पर्वतीय कृषि क्षेत्र को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाएंगे।

अधिक जानकारी और अपडेट के लिए, कृपया यहाँ क्लिक करें।

— टीम द ओड नारी

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow