हरिद्वार में 'वेज बिरयानी' विवाद: संतों की मुहिम और मुस्लिम संगठनों का समर्थन
Haridwar News : धर्मनगरी हरिद्वार में ‘वेज बिरयानी’ नाम को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। साधु-संतों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सड़क पर उतरकर ठेलों, रेहड़ियों और दुकानों पर बिक रहे ‘वेज बिरयानी’ के नाम को बदलकर ‘वेज पुलाव’ करने की मांग तेज कर दी है। हरिद्वार में ‘वेज बिरयानी’ पर छिड़ी बहस […]
हरिद्वार में 'वेज बिरयानी' विवाद: संतों की मुहिम और मुस्लिम संगठनों का समर्थन
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कम शब्दों में कहें तो, हरिद्वार में ‘वेज बिरयानी’ नाम को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। साधु-संतों ने इसके नाम को बदलकर ‘वेज पुलाव’ करने की मांग बढ़ा दी है, जिसमें मुस्लिम संगठनों का भी समर्थन शामिल है।
धर्मनगरी हरिद्वार,The Odd Naari के अनुसार, ‘वेज बिरयानी’ इन दिनों शहर में चर्चा का विषय बन गया है। साधु-संतों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इसे लेकर विरोध प्रदर्शन शुरु कर दिए हैं। उनका तर्क है कि ‘बिरयानी’ शब्द एक पारंपरिक व्यंजन से जुड़ा हुआ है और इसलिए इसे एक शुद्ध शाकाहारी व्यंजन के लिए उपयुक्त नहीं समझा जाता।
हरिद्वार में ‘वेज बिरयानी’ पर छिड़ी बहस
हरिद्वार में ‘वेज बिरयानी’ नाम को लेकर संतों और सामाजिक संगठनों का विरोध तेज होता जा रहा है। शहर के विभिन्न इलाकों में संत और कार्यकर्ता ठेलों, रेहड़ियों और दुकानों पर ‘वेज पुलाव’ के नाम से ऐसे व्यंजनों का प्रचार कर रहे हैं। यह मुहिम अब धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ गई है।
संतों ने शुरू किया नाम बदलो अभियान
संतों और कार्यकर्ताओं ने हाथ में पोस्टर लेकर सड़क पर उतर कर यह अभियान चलाया है। उनका कहना है कि बिरयानी शब्द केवल कुछ खास प्रकार के चावल और मांस के मिश्रण के लिए प्रयोग होता है, जबकि वेज बिरयानी दलहन और सब्जियों से तैयार किया जाने वाला एक अलग व्यंजन है। इसलिए इसे ‘वेज पुलाव’ के नाम से जाना जाना चाहिए।

मुहिम को मुस्लिम संगठनों का भी मिला समर्थन
इस विवाद से जुड़े अभियान को अब मुस्लिम संगठनों का भी समर्थन मिलने लगा है। राष्ट्रीय सूफी संत फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नौशाद अली ने संतों और सामाजिक संगठनों की इस पहल का समर्थन किया है। उनका कहना है कि इस मुद्दे को बढ़ावा देने से देश की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता को बेहतर समझा जा सकेगा।
संतों का यह भी कहना है कि हरिद्वार एक धार्मिक नज़रिए से महत्वपूर्ण स्थान रखता है, इसलिए इसकी मान-मर्यादाओं का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने यह दावा भी किया है कि अधिकतर दुकानदार इस मांग के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रहे हैं और वे स्वेच्छा से अपने बोर्डों पर ‘वेज पुलाव’ लिखने के लिए तैयार हो रहे हैं।
निष्कर्ष
हरिद्वार में ‘वेज बिरयानी’ को लेकर चल रही यह बहस न केवल धार्मिक पहचान का सवाल है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की विविधता और उसकी परंपराओं के संरक्षण का भी प्रतीक है। आम जनता की ज़रूरतों और स्वाद का ध्यान रखते हुए, यह समझना आवश्यक है कि नामों का बदलना कभी-कभी आस्था और परंपरा के अनुकूल होता है।
समाज के विभिन्न वर्गों की प्रतिक्रिया इस विवाद को और भी दिलचस्प बना रही है। समय के साथ, यह विवाद और भी रंग लाएगा, और हम सभी को यह देखने का मौका मिलेगा कि किस प्रकार भारतीय समाज के विभिन्न पहलु एक साथ मिलकर एक नई धारणा का निर्माण करते हैं।
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सादर,
टीम द ओड नारी, साक्षी शर्मा
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