राजधानी देहरादून में शिक्षकों की महापंचायत: आंदोलन तेज करने की दी चेतावनी
Dehradun News : उत्तराखंड में जूनियर हाईस्कूल शिक्षकों का आंदोलन अब और तेज होता नजर आ रहा है। अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में प्रादेशिक जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने सोमवार को देहरादून में ‘गर्जना रैली’ और ‘शिक्षक महापंचायत’ का आयोजन किया। इस दौरान प्रदेशभर से बड़ी संख्या में शिक्षक राजधानी पहुंचे और अपनी 13 […]
राजधानी देहरादून में शिक्षकों की महापंचायत: आंदोलन तेज करने की दी चेतावनी
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के जूनियर हाईस्कूल शिक्षकों का आंदोलन एक नए स्तर पर पहुँच गया है। देहरादून में आयोजित ‘गर्जना रैली’ और ‘शिक्षक महापंचायत’ में बड़ी संख्या में शिक्षकों ने अपनी 13 सूत्रीय मांगों को लेकर आवाज उठाई।
आज, 1 मई से शुरू हुए चरणबद्ध आंदोलन के पांचवे चरण में, प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से शिक्षक राजधानी में एकत्रित हुए। प्रादेशिक जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ द्वारा आयोजित इस रैली में शिक्षकों ने अपनी प्रमुख मांगों को लेकर मजबूती से अपनी बात रखी।
टीईटी अनिवार्यता से राहत, पुरानी पेंशन बहाली की है मांग
शिक्षकों की प्रमुख मांगों में से एक है टीईटी (टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट) अनिवार्यता से राहत, जिसके कारण कई शिक्षक प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, त्रिस्तरीय कैडर व्यवस्था लागू करना और 17140 वेतनमान से संबंधित वसूली पर रोक जैसी मांगें भी शामिल हैं। शिक्षकों के लिए अनिवार्य पदोन्नतियां और प्रोन्नति के दौरान वेतनवृद्धि की भी मांग की जा रही है।
इसके साथ-साथ, गोल्डन कार्ड योजना के अंतर्गत निशुल्क चिकित्सा सुविधा, अंतर्जनपदीय स्थानांतरण व्यवस्था, और प्रदेश के सभी जूनियर हाई स्कूलों में आवश्यक पदों की नियुक्ति की मांग भी उठाई गई है।
मांगें पूरी ना होने पर दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
शिक्षक नेताओं ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगों की अनदेखी से असंतोष बढ़ता जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष विनोद थापा के नेतृत्व में शिक्षकों ने परेड ग्राउंड पर एकत्र होकर बुद्ध चौक, दर्शनलाल चौक, घंटाघर और राजपुर रोड होते हुए सचिवालय तक रैली निकाली। इस दौरान शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को पूरा करने की जोरदार अपील की।
शिक्षकों का यह आरोप है कि उनकी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जो उनके कामकाजी माहौल और आरोग्य के लिए हानिकारक है। यदि उनकी मांगें तुरंत नहीं मानी जाती हैं, तो वे और अधिक सक्रिय रूप से अपने आंदोलन को जारी रखने की चेतावनी दे रहे हैं।
प्रदेश के शिक्षकों का यह आंदोलन केवल उनके अधिकारों की रक्षा के लिए नहीं है, बल्कि एक बेहतर और योग्य शैक्षणिक प्रणाली की तरफ एक महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रकार की रैलियां और मुखरता लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा हैं, जहां शिक्षक अपनी आवाज उठाकर बदलाव की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
समाज के जागरूक नागरिकों के रूप में, हमें शिक्षकों के अधिकारों के प्रति सहानुभूति रखनी होगी और उनके संघर्ष का समर्थन करना होगा। इसके बिना, हम एक स्वस्थ और प्रभावशाली शैक्षणिक प्रणाली का निर्माण नहीं कर सकते।
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सभी शिक्षकों की एकजुटता इस आंदोलन की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है। शिक्षक समुदाय को चाहिए कि वे एकसाथ मिलकर अपने हक़ के लिए संघर्ष करते रहें।
सत्यप्रिया, Team The Odd Naari
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