उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता संशोधन अध्यादेश 2026 का कार्यान्वयन

उत्तराखंड सरकार ने समान नागरिक संहिता संशोधन अध्यादेश 2026 को लागू कर दिया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह अध्यादेश तत्काल रूप से प्रभावी हो गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, उत्तराखंड के राज्यपाल ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत इस अध्यादेश को जारी किया है। इसके जरिए यूसीसी अधिनियम 2024 […]

Apr 5, 2026 - 13:34
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उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता संशोधन अध्यादेश 2026 का कार्यान्वयन
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता संशोधन अध्यादेश 2026 का कार्यान्वयन

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता संशोधन अध्यादेश 2026 का कार्यान्वयन

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड सरकार ने समान नागरिक संहिता संशोधन अध्यादेश 2026 को लागू कर दिया है, जो राज्य में कानून और प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उत्तराखंड सरकार ने हाल ही में समान नागरिक संहिता संशोधन अध्यादेश 2026 को लागू किया है। यह अध्यादेश राज्यपाल की मंजूरी के बाद तुरंत प्रभावी हो गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, राज्य के राज्यपाल ने इसे भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत जारी किया है। इस अध्यादेश के द्वारा यूसीसी अधिनियम 2024 के विभिन्न प्रावधानों में सुधार किया गया है, जिसमें प्रक्रियात्मक, प्रशासनिक और दंडात्मक बदलाव शामिल हैं। इन संशोधनों का उद्देश्य यूसीसी के प्रभावी, पारदर्शी और सुचारू क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर कहा, "समान नागरिक संहिता को लागू करके उत्तराखंड ने अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल पेश की है। हमने पिछले एक साल में पारदर्शिता और सरलता के साथ इस कानून को लागू किया है, जिसके परिणामस्वरूप जनता का विश्वास भी बढ़ा है।"

विवाह पंजीकरण प्रक्रिया में सुधार

यूसीसी के लागू होने से पहले, उत्तराखंड में विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य विवाह पंजीकरण अधिनियम 2010 के तहत किया जाता था, और यह पूरी प्रक्रिया ऑफलाइन थी। अब, यूसीसी के तहत, लगभग 100 प्रतिशत विवाह पंजीकरण ऑनलाइन किए जा रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप, 19 जनवरी तक, यूसीसी लागू होने के एक वर्ष से भी कम समय में कुल 4,74,447 विवाहों का पंजीकरण पूर्ण हो चुका है। यह अत्यधिक सकारात्मक बदलाव दर्शाता है कि कैसे कानून में सुधार से नागरिकों के लिए सरलता लाई जा सकती है।

निष्कर्ष

समान नागरिक संहिता संशोधन अध्यादेश 2026 का कार्यान्वयन न केवल कानून व्यवस्था में सुधार का संकेत है, बल्कि यह पारदर्शिता को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस प्रकार, उत्तराखंड सरकार ने निश्चित रूप से एक संवेदनशील और प्रगतिशील कदम उठाया है, जो अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण प्रस्तुत करता है।

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— Team The Odd Naari, राधिका शुक्ला

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