आधुनिक खेती की नई परिभाषा: बेनी सिंह ने बदल दी क्षेत्र की खेती!

देहरादून।  उत्तराखंड में आधुनिक कृषि तकनीकों और कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ लेकर किसान अब आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रहे हैं। सहसपुर विकासखंड के ग्राम कैचीवाला निवासी प्रगतिशील किसान बेनी सिंह ने आधुनिक कृषि यंत्रों को अपनाकर न केवल अपनी खेती को लाभकारी बनाया है, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए […] The post पहले खर्च, अब मुनाफा! आधुनिक खेती से बेनी सिंह बने इलाके के प्रेरणास्रोत appeared first on Uttarakhand Broadcast.

May 27, 2026 - 18:38
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आधुनिक खेती की नई परिभाषा: बेनी सिंह ने बदल दी क्षेत्र की खेती!
आधुनिक खेती की नई परिभाषा: बेनी सिंह ने बदल दी क्षेत्र की खेती!

आधुनिक खेती की नई परिभाषा: बेनी सिंह ने बदल दी क्षेत्र की खेती!

देहरादून। उत्तराखंड के सहसपुर विकासखंड के ग्राम कैचीवाला के प्रगतिशील किसान बेनी सिंह ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाते हुए अपनी खेती को न केवल लाभकारी बनाया है, बल्कि वे क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा के स्रोत भी बन गए हैं। वर्तमान समय में किसान आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रहे हैं। उनकी इस सफलता ने स्थानीय कृषि समुदाय में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायता की है।

कम शब्दों में कहें तो, बेनी सिंह की मेहनत और आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके कृषि में मुनाफा कमाने की कहानी, हर किसान के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। अधिक जानकारी के लिए, यहां क्लिक करें.

किसान बेनी सिंह की यात्रा: अनुदान से लेकर प्रगति तक

बेनी सिंह ने करीब 40 बीघा कृषि भूमि पर खेती की है। उन्होंने कृषि विभाग की “सबमिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन (SMAM) योजना” के तहत रीपर कम बाइंडर मशीन के लिए ₹2.57 लाख का अनुदान प्राप्त किया। इसके अलावा, 2025-26 में उन्हें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना के अंतर्गत डीबीडब्ल्यू-187 और डीबीडब्ल्यू-327 किस्म के 2 कुंतल उन्नत गेहूं बीज भी प्राप्त हुए।

उन्नत बीज और तकनीक ने बदली फसल की किस्मत

बेनी सिंह ने कृषि विशेषज्ञों की सलाह से वैज्ञानिक विधि से गेहूं की बुवाई की और इसके परिणामस्वरूप फसल उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। उनकी फसल की कटाई के लिए नवीनतम रीपर कम बाइंडर मशीन का उपयोग किया गया, जिससे कृषि कार्यों में गति और सटीकता आई। इसकी वजह से खेती का कार्य अब पहले से अधिक आसान, तेज और आर्थिक रूप से लाभकारी बन गया है।

बेनी सिंह बताते हैं कि पहले फसल की कटाई में लगभग ₹1300 प्रति बीघा का खर्च आता था और इसे पूरा करने में 6 से 7 दिन लगते थे। मगर अब आधुनिक मशीनों की मदद से यह कार्य महज एक दिन में संभव हो गया है। इससे न केवल समय की बचत हुई है, बल्कि खेती की लागत भी काफी कम हो गई है।

अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा स्रोत

बेनी सिंह ने रीपर कम बाइंडर मशीन का उपयोग अपनी फसल के लिए ही नहीं किया, बल्कि उन्होंने क्षेत्र के अन्य किसानों की लगभग 120 बीघा फसल कर कटाई की। इसके बदले उन्होंने 900 रुपये प्रति बीघा के दर से कुल ₹1 लाख 8 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित की, जो उनके लिए एक सफल व्यापार मॉडल साबित हुआ।

कृषि में सकारात्मक बदलाव का सूत्रधार

बेनी सिंह की मेहनत और उनकी आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग करके आर्थिक स्थिति को सुधारने की कहानी अब अन्य किसानों के लिए भी एक प्रेरणास्त्रोत बन रही है। उनका उदाहरण देख अन्य किसान भी यंत्रीकृत खेती को अपनाने की दिशा में बढ़ रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय कृषि में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।

किसान बेनी सिंह की सफलता यह संकेत देती है कि तकनीकों का संतुलित उपयोग करके किसान न केवल अपनी अपनी आजीविका को सशक्त कर सकते हैं, बल्कि वे दूसरों के लिए भी विकास की राह खोल सकते हैं।

इस प्रकार, बेनी सिंह की कहानी उत्तराखंड के कृषि क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए अन्य किसानों को भी प्रेरित करती है और यह दर्शाती है कि यदि सही दिशा में प्रयास किए जाएँ, तो परिणाम सकारात्मक ही मिलते हैं।

हमारी यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक कृषि तकनीकें न केवल कृषि में लाभ लाती हैं, बल्कि समुदाय में सहयोग और विकास का माहौल भी बनाती हैं।

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सादर,
टीम द ओड नारी
(संपादक: भावना शर्मा)

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