श्रद्धालुओं ने कोसी स्नान के बाद मां कौशिकी की पूजा-अर्चना

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श्रद्धालुओं ने कोसी स्नान के बाद मां कौशिकी की पूजा-अर्चना

– कोसी स्पर 19 पर प्रतिमा स्थापित कर मेले का किया गया है आयोजन कुनौली. पौष पूर्णिमा के अवसर पर कोशी स्पर 19 पर बाबा गोपाल दास त्यागी के नेतृत्व में एक भव्य मेले मेले का आयोजन किया गया. जहां सुबह से ही कमलपुर, हरजोती अन्य स्थानों के कई श्रद्धालु कोशी नदी में स्नान करने के बाद मां कौशिकी की पूजा अर्चना की. बाबा गोपाल दास त्यागी ने बताया कि महर्षि बाल्मीकि द्वारा रचित रामायण की कथा के अनुसार महामुनि विश्वामित्र की बहन सत्यवती मानसरोवर के तट पर भगवान भोले शंकर की तपस्या की. जहां भोले शंकर ने इनकी तपस्या से खुश होकर पौष पूर्णिमा के दिन दर्शन देकर वरदान मांगने को कहा. सत्यवती ने अपने वरदान में भगवान शंकर से हमेशा जल के रूप में बहकर लोगों का कल्याण करते करने की वर मांगी. इसी दिन से सत्यवती जल के रूप में मानसरोवर तट पर से सिक्किम होते हुए नेपाल और नेपाल से बिहार होकर बहने लगी. बहकर गंगा में मिली. तब से यह सप्तकोशी के नाम से जाना गया. इसी दिन से सत्यवती का नाम कौशिकी पड़ा. तब से लेकर आज तक यह पृथ्वी पर जल के रूप में बहती रही है. इसी अवसर पर पौष पूर्णिमा मनाया जाता है. सभी श्रद्धालु कोशी में स्नान के बाद मां कौशिकी की पूजा अर्चना करते हैं. इस मौके पर केदार प्रसाद यादव, चितनारायन यादव, रामचंद्र यादव, बेचैन यादव, बैद्यनाथ साह, रामसकल दास, हरिकिसुन, ललित यादव, विजय कुमार, जोगी यादव, संझा देवी, रुक्मिणी देवी, गरवी देवी, बद्री दास आदि मौजूद थे.

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