भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई, मंदिर और मस्जिद पक्ष पेश करेंगे अपना पक्ष
मंदिर-मस्जिद दोनों पक्ष रखेंगे अपना पक्ष धार। ऐतिहासिक भोजशाला विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई होने की संभावना है। पांच और छह अगस्त को सुनवाई टलने के बाद अब सभी की नजरें शीर्ष अदालत पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि सुनवाई के दौरान भोजशाला से जुड़े मामले में मंदिर और मस्जिद […]
भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई, मंदिर और मस्जिद पक्ष पेश करेंगे अपना पक्ष
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कम शब्दों में कहें तो, ऐतिहासिक भोजशाला विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई होने की संभावना है। पांच और छह अगस्त को सुनवाई टलने के बाद अब सभी की नजरें शीर्ष अदालत पर टिकी हैं। इस सुनवाई के दौरान मंदिर और मस्जिद दोनों पक्ष अपनी दलीलें पेश करेंगे।
भोजशाला विवाद का महत्व
धार। इस सुनवाई का महत्व इसलिए बढ़ गया है क्योंकि इसके दो दिन बाद, यानी 14 अगस्त को शुक्रवार को विशेष अव्वलियत होगी। इसके तहत भोजशाला के पीछे स्थित खसरा नंबर 612 की जमीन पर शुक्रवार की नमाज के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। अब तक इस स्थान पर दो बार नमाज पढ़ी जा चुकी है, जिसके कारण इस मुद्दे की संवेदनशीलता और भी बढ़ गई है।
भोजशाला को लेकर क्या है मामला?
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने 15 मई को भोजशाला को वाग्देवी का मंदिर मानने से संबंधित मामला पर आदेश दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर अंतरिम रोक लगाने से मना कर दिया था, जिससे इस मुद्दे पर तनाव का माहौल बना रहा।
इसके पश्चात, मस्जिद पक्ष की याचिका पर 14 जुलाई को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि अंतिम निर्णय आने तक भोजशाला के निकट खुले स्थान पर शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। इस आदेश के फलस्वरूप, भोजशाला के पीछे स्थित खसरा नंबर 612 को नमाज के लिए निर्धारित किया गया।
नमाज का विरोध
मंगलवार को भोजशाला परिसर में एक नियमित सत्याग्रह आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोगों ने भाग लिया और हनुमान चालीसा का पाठ किया।
वहीं, श्री आद्यगौड़ बावीसा ब्राह्मण समाज ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर भोजशाला के आसपास 300 मीटर के दायरे में नमाज की व्यवस्था नहीं करने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि यहां लगातार पूजा-अर्चना होती है, और नमाज के कारण आमंत्रण और पार्किंग पर परेशानी आ सकती है, जिसके चलते दो पक्षों के आमने-सामने आने की स्थिति भी बन सकती है।
दरगाह विवाद
दूसरी ओर, कमाल मौला वेलफेयर सोसाइटी के सदर अब्दुल समद खान ने धार शहर स्थित हजरत बाबा कमालुद्दीन चिश्ती की दरगाह को लेकर प्रशासन से शिकायत की है। वे आरोप लगा रहे हैं कि कुछ लोग बाबा कमालुद्दीन चिश्ती के खिलाफ आपत्तिजनक बातें कह रहे हैं। उन्होंने प्रशासन को सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने का दावा किया है।
जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर को दिए ज्ञापन में उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ तत्व धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं, और उन्होंने ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। सोसाइटी ने चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो अगले शुक्रवार को धरना दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का प्रभाव
भोजशाला विवाद से जुड़े दोनों पक्षों की गतिविधियों के बीच सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई अब अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत में होने वाली सुनवाई और उसके द्वारा दिए जाने वाले निर्देशों का असर आगामी व्यवस्था पर पड़ सकता है। प्रशासन भी मामले को लेकर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सावधान है।
अंत में, इस मुद्दे की संवेदनशीलता तथा उस पर आधारित विभिन्न प्रतिक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए, यह स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आगामी कानूनी और सामाजिक स्थिति पर प्रभाव डालेगा।
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सादर,
टीम दOdd नारी
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