पौड़ी: भरसार कृषि विश्वविद्यालय में छात्रा की मौत के बाद छात्रों का आक्रोश, प्रशासन पर गंभीर आरोप

PAURI GARHWAL:  पौड़ी जनपद के भरसार में स्थित वीर चंद्र सिंह गढ़वाली कृषि एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय में हॉर्टीकल्टचर की एक छात्रा की मौत के बाद छात्रों का आक्रोश फूट पड़ा है। छात्र छात्राओं का आरोप है कि बीमार होने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रा की समय रहते कोई मदद नहीं की और उसे सही […] The post पौड़ी: भरसार विश्वविद्यालय में छात्रा की मौत पर फूटा साथी छात्र छात्राओं का गुस्सा, विवि प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप appeared first on Devbhoomi Dialogue.

Sep 1, 2026 - 00:38
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पौड़ी: भरसार कृषि विश्वविद्यालय में छात्रा की मौत के बाद छात्रों का आक्रोश, प्रशासन पर गंभीर आरोप

पौड़ी: भरसार कृषि विश्वविद्यालय में छात्रा की मौत के बाद छात्रों का आक्रोश, प्रशासन पर गंभीर आरोप

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कम शब्दों में कहें तो, पौड़ी जनपद के भरसार स्थित वीर चंद्र सिंह गढ़वाली कृषि एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय में हॉर्टीकल्चर की एक छात्रा की मौत के बाद साथी छात्रों ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया है। छात्रों का आरोप है कि विवि प्रशासन ने छात्रा की बिगड़ती तबीयत के बावजूद समय पर सहायता नहीं की।

पौड़ी गढ़वाल में स्थित इस विश्वविद्यालय की छात्रा, 23 वर्षीय मधु यादव, की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद मृत्यु हो गई। जानकारी के अनुसार, मधु पहले से बीमार थीं और पिछले कई दिनों से उन्हें चिकित्सा सुविधा की आवश्यकता थी। साथी छात्रों ने विश्वविद्यालय में उपलब्ध चिकित्सा सेवाओं से मदद मांगी, लेकिन आरोप है कि यहां आवश्यक चिकित्सा उपकरण और उपचार की सुविधाएं अनुपलब्ध थीं।

मधु को पहले पाबौ के अस्पताल में भेजा गया, लेकिन वहां पर स्थिति बिगड़ने पर प्रशासन ने उन्हें जिला अस्पताल से श्रीनगर रेफर किया। अंत में, मधु को एम्स ऋषिकेश भेजा गया, लेकिन रविवार शाम करीब छह बजे यात्रा के दौरान उनकी मौत हो गई।

छात्रा की मौत के बाद विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने कॉम्प्लेक्स में प्रदर्शन करते हुए प्रशासन के खिलाफ लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन और एडीएसडब्ल्यू ने मधु की तबीयत को गंभीरता से नहीं लिया और सही समय पर इलाज उपलब्ध नहीं कराया।

छात्राओं का कहना है कि जब एंबुलेंस आधी रात को उन्हें पाबौ में छोड़कर निकल गई और आगे की सुविधा के लिए विश्वविद्यालय की एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई, तब उन्हें सरकारी एंबुलेंस की मदद से पौड़ी अस्पताल जाना पड़ा। वहां से भी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें श्रीनगर रेफर करना पड़ा।

श्रीनगर में भी जब से मधु की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, उसे ऋषिकेश ले जाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। छात्राओं का मानना है कि अगर विश्वविद्यालय में चिकित्सा सुविधाएं बेहतर होतीं, तो मधु की जान बचाई जा सकती थी।

छात्रों का यह आक्रोश सिर्फ एक व्यक्तिगत घटना नहीं है, बल्कि यह शिक्षण संस्थानों की चिकित्सा सुविधाओं की कमी पर गहन प्रश्न खड़ा करता है। मधु जैसी घटनाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि कैसे लापरवाही और चिकित्सा सेवा की कमी के चलते छात्रों की जानें दांव पर लग जाती हैं।

इस घटना ने न केवल छात्राओं में गहरा शोक पैदा किया है, बल्कि यह एक चेतावनी भी है कि शिक्षा संस्थानों में छात्र कल्याण की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

इसके अलावा, जो विद्यार्थी हमेशा शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रयासरत रहते हैं, उनके स्वास्थ्य और कल्याण पर किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

छात्राओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन से बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। ऐसे मामलों में सक्रिय रूप से संज्ञान लेने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में किसी अन्य विद्यार्थी की जान जोखिम में न पड़े।

अंततः, यह घटना एक विस्तृत विषय पर चर्चा की आवश्यकता को दर्शाती है - क्या हमारे शिक्षा संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा और कल्याण को सही तरीके से प्राथमिकता दी जा रही है?

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सादर,
टीम द ओड नारी
शीला शर्मा

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