देहरादून: सास-बहू की जोड़ी ने हाथ से बनी राखियों से बटोरी सफलता, स्वरोजगार में मिली आत्मनिर्भरता

DEHRADUN: रक्षाबंधन का पर्व नजदीक आते ही देहरादून में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार की जा रही हैंडमेड राखियों की मांग तेजी से बढ़ने लगी है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से रायपुर, सहसपुर और डोईवाला विकासखंड की महिलाएं राखी निर्माण को स्वरोजगार का जरिया बनाकर न केवल अपनी आमदनी […] The post देहरादून: सास-बहू की जोड़ी ने राखी के कारोबार से मचाई धूम,  स्वरोजगार से स्वालंबी बनी appeared first on Devbhoomi Dialogue.

Aug 21, 2026 - 18:38
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देहरादून: सास-बहू की जोड़ी ने हाथ से बनी राखियों से बटोरी सफलता, स्वरोजगार में मिली आत्मनिर्भरता
देहरादून: सास-बहू की जोड़ी ने हाथ से बनी राखियों से बटोरी सफलता, स्वरोजगार में मिली आत्मनिर्भरता

देहरादून: सास-बहू की जोड़ी ने हाथ से बनी राखियों से बटोरी सफलता, स्वरोजगार में मिली आत्मनिर्भरता

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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून की सास-बहू की जोड़ी ने रक्षाबंधन के नजदीक देखी गई हैंडमेड राखियों की मांग में बढ़ोत्तरी का लाभ उठाकर अपने स्वरोजगार को बढ़ाने में सफलता पाई है।

देहरादून में रक्षाबंधन का पर्व करीब आ रहा है और इस दौरान स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार की जा रही हैंडमेड राखियों की मांग तेजी से बढ़ने लगी है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से रायपुर, सहसपुर और डोईवाला विकासखंड की महिलाएं राखी निर्माण को स्वरोजगार का जरिया बना रही हैं। इस स्वरोजगार ने न केवल उनकी आमदनी को बढ़ाया है, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में भी मजबूत कदम बढ़ाने में मदद की है।

सास-बहू की जोड़ी की सफलता की कहानी

रायपुर विकासखंड के मालदेवता क्षेत्र की लीला रावत और अलका रावत की जोड़ी ने राखी कारोबार में अपनी पहचान बनाई है। वे रायपुर ब्लॉक की नई दिशा महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) के अंतर्गत आशा किरण स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। इस वर्ष उनका लक्ष्य दो हजार से अधिक राखियां तैयार करना है, जिसमें से वे अब तक करीब 1,500 राखियां बनाकर तैयार कर चुकी हैं।

लीला और अलका ने बताया कि पिछले वर्ष प्रशासन के सहयोग से उन्हें उचित बाजार मिला। उन्होंने करीब 1,200 राखियों की बिक्री करके लगभग 25,000 रुपये का मुनाफा प्राप्त किया। इस सफल अनुभव के बाद, इस वर्ष उन्होंने अपने कारोबार को और विस्तार देने का इरादा किया है।

स्वरोजगार का सही विकल्प

अलका रावत ने पिछले वर्ष अपनी निजी नौकरी छोड़कर अपनी सास लीला के साथ मिलकर स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया। उन्होंने मिलकर मालदेवता क्षेत्र में 'विनी वंडर्स क्रिएशन' नाम से एक दुकान खोली है। एनआरएलएम के सहयोग से शुरू किए गए इस स्वरोजगार के माध्यम से वे केवल राखियों का ही नहीं, बल्कि अन्य हस्तनिर्मित एवं स्थानीय उत्पादों का भी कारोबार कर रही हैं। इससे उन्हें आय का बेहतर स्रोत मिला है और वे सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाकर आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं।

ऑनलाइन कारोबार की दिशा में कदम

हैंडमेड राखियों की बिक्री अब स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं रह गई है। 'विनी वंडर्स क्रिएशन' के इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी ग्राहकों के ऑर्डर मिल रहे हैं। महिलाएं ऑनलाइन माध्यम से आए ऑर्डर को तैयार कर ग्राहकों तक पहुंचा रही हैं। इस तरह, उनके कारोबार का विस्तार स्थानीय बाजार के साथ-साथ डिजिटल बाजार में भी हो रहा है।

समूह की महिलाएं ऊन, क्रोशिया, मौली के धागे, रिबन जैसी सामग्रियों से आकर्षक डिजाइनों की राखियां बना रही हैं। इनमें भैया दूज, महाकाल, रुद्राक्ष, नजरबट्टू जैसे पारंपरिक और आधुनिक डिजाइनों को शामिल किया जा रहा है। राखियों की डिज़ाइनिंग, प्रिंटिंग, पैकेजिंग और प्रचार-प्रसार का काम स्वयं महिलाएं करती हैं।

अन्य क्षेत्रों की महिलाओं का योगदान

रायपुर के साथ ही सहसपुर और डोईवाला विकासखंड की महिलाएं भी बड़े पैमाने पर राखियां तैयार कर रही हैं। डोईवाला विकासखंड की गायत्री क्लस्टर लेवल फेडरेशन के अंतर्गत वैभव लक्ष्मी और पहाड़ी भुली ग्राम संगठनों से जुड़ी करीब 100 महिलाएं विभिन्न डिजाइनों की राखियां बना रही हैं। ये राखियां रायवाला और श्यामपुर के विभिन्न बाजारों में स्टॉल लगाकर बेची जा रही हैं।

मुख्य मॉल्स में स्टॉल का आयोजन

मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि रक्षाबंधन के अवसर पर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं विभिन्न प्रकार की आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना के तहत महिलाओं को स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि देहरादून के प्रमुख मॉलों में महिलाओं के लिए राखियों के स्टॉल लगाए जाएंगे।

सहायक परियोजना निदेशक अनीता पंवार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार, मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना के तहत 24 से 27 अगस्त तक उत्तराखंड सचिवालय में पांच स्टॉल लगाए जाएंगे। इन स्टॉल्स पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं न केवल राखियों, बल्कि विभिन्न पहाड़ी एवं स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री करेंगी।

रक्षाबंधन के इस आनंदमयी पर्व पर, यह आवश्यक है कि हम स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार की गई हस्तनिर्मित राखियों का समर्थन करें। इससे उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी और वे आत्मनिर्भर बनेंगी।

अधिक जानकारी और अपडेट्स के लिए, कृपया [The Odd Naari](https://theoddnaari.com) पर जाएं।

सादर, टीम द ओड नारी - साक्षी शर्मा

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