ज्योलीकोट दूषित पेयजल विवाद: छह अधिकारियों का निलंबन, स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा!

The post ज्योलीकोट दूषित पेयजल मामले में छह अधिकारी निलंबित appeared first on Avikal Uttarakhand. जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं-सीएम अविकल उत्तराखंड/विपनेश नैनीताल/देहरादून। ज्योलीकोट और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में दूषित पेयजल से जलजनित बीमारियां फैलने के मामले में शासन ने बड़ी कार्रवाई… The post ज्योलीकोट दूषित पेयजल मामले में छह अधिकारी निलंबित appeared first on Avikal Uttarakhand.

Sep 22, 2026 - 00:38
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ज्योलीकोट दूषित पेयजल विवाद: छह अधिकारियों का निलंबन, स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा!

ज्योलीकोट दूषित पेयजल मामले में छह अधिकारी निलंबित

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कम शब्दों में कहें तो: ज्योलीकोट और आस-पास के ग्रामीण क्षेत्र में दूषित पेयजल के कारण जलजनित बीमारियों की बढ़ती घटनाओं के बीच शासन ने छह अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई जनस्वास्थ्य पर खतरे के मद्देनजर की गई है।

नैनीताल/देहरादून। उत्तराखंड के ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल की समस्या ने अनेकों ग्रामीणों को बीमार कर दिया है। इस मामले में गंभीरता से कार्रवाई करते हुए शासन ने जल संस्थान और पेयजल निगम के छह अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि "जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"

दूषित पेयजल से फैल रहे जलजनित रोग

ज्योलीकोट के ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले कुछ महीनों से दूषित पेयजल की आपूर्ति की लगातार शिकायतें बनी हुई थीं। फिल्मों में दिखाए जाने वाले संवादों की तरह, यहां भी समस्याओं का जाल ही फैला हुआ है। जून में शुरू हुई इस स्थिति के दौरान, एक छात्र और एक विवाहिता की मौत के मामले सामने आए। इसके अलावा, बड़ी संख्या में ग्रामीण डायरिया, पीलिया और अन्य जलजनित बीमारियों का शिकार हो गए।

जांच समिति की रिपोर्ट पर की गई कार्रवाई

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच समिति का गठन किया था, जिसमें मुख्य विकास अधिकारी अरविंद पांडे को अध्यक्ष बनाया गया। इस समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को भेजी, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई। इसी बीच, उच्च न्यायालय ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव को इस प्रकरण की निगरानी के निर्देश दिए थे।

निलंबित अधिकारियों की सूची

निलंबित अधिकारियों में जल संस्थान के प्रभारी अधीक्षण अभियंता विशाल कुमार, सहायक अभियंता मोहन सिंह रावत और अपर सहायक अभियंता रवींद्र शामिल हैं। इसके साथ ही, पेयजल निगम के प्रभारी अधिशासी अभियंता शशिपाल सिंह, प्रभारी सहायक अभियंता संजय कुमार आर्या और कनिष्ठ अभियंता दीपांशु शर्मा को भी निलंबित किया गया है।

नवीन व्यवस्था और जिम्मेदारी का बंटवारा

जल संस्थान ने हल्द्वानी में नए सिरे से जिम्मेदारी का बंटवारा किया है। लालकुआं जल संस्थान के अधिशासी अभियंता नंदकिशोर को हल्द्वानी का अतिरिक्त दायित्व सौंपा गया है। यह परिवर्तन निलंबन के तुरंत बाद किया गया है ताकि किसी भी प्रकार की लापरवाही को रोका जा सके।

क्या यह कार्रवाई पर्याप्त है?

महत्वपूर्ण यह है कि एक साथ छह अधिकारियों का निलंबन अधिकारियों के बीच खलबली मचा रहा है। हालांकि यह कड़ा कदम उठाया गया है, फिर भी कुछ सवाल उठ रहे हैं। क्या इससे भविष्य में ऐसी घटनाएँ नहीं होंगी? या फिर दोषी अधिकारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाएगी? अब देखना यह है कि शासन इस मामले में किस दिशा में आगे बढ़ता है।

जलपात्रता और जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यक्ता है। यदि हम आगे की सोचें, तो सिर्फ निलंबन से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि सख्त नियम और अच्छी प्रणाली की आवश्यकता है। जनता का स्वास्थ्य सर्वोपरि होना चाहिए।

इस मामले की प्रगति के बारे में और अधिक जानकारी के लिए हमारे साथ बने रहें और हमारे अन्य समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

— टीम द ओड नारी
साक्षी शर्मा

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