छोटा विभाग, बड़े सियासी चेहरे! DUSU चुनाव में बौद्ध अध्ययन के 7 छात्रों ने मचाई हलचल
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव में इस बार बौद्ध अध्ययन विभाग की खास मौजूदगी देखने को मिली। छात्रसंघ के केंद्रीय पैनल के चार पदों के लिए मैदान में उतरे 10 उम्मीदवारों में से 7 उम्मीदवार इसी विभाग से जुड़े रहे। इनमें अध्यक्ष पद के दोनों प्रमुख उम्मीदवारों के साथ-साथ उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त […] The post छोटा विभाग, बड़े सियासी चेहरे! DUSU चुनाव में बौद्ध अध्ययन के 7 छात्रों ने मचाई हलचल appeared first on Uttarakhand Broadcast.
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव में इस बार बौद्ध अध्ययन विभाग की खास मौजूदगी देखने को मिली। छात्रसंघ के केंद्रीय पैनल के चार पदों के लिए मैदान में उतरे 10 उम्मीदवारों में से 7 उम्मीदवार इसी विभाग से जुड़े रहे। इनमें अध्यक्ष पद के दोनों प्रमुख उम्मीदवारों के साथ-साथ उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद के उम्मीदवार भी शामिल रहे।
अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास और NSUI के विजय शंकर मीणा के बीच मुकाबला हुआ। यश डबास ने 24,576 वोट हासिल कर अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की, जबकि विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले।
उपाध्यक्ष पद पर स्वतंत्र उम्मीदवार दीपांशु शोकीन ने 30,615 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। दीपांशु शोकीन बौद्ध अध्ययन विभाग में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रहे हैं। इससे पहले 2009 में इसी विभाग के मनोज चौधरी ने DUSU अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की थी। उपलब्ध चुनावी रिकॉर्ड के अनुसार, वह आखिरी मौका था जब किसी स्वतंत्र उम्मीदवार ने DUSU के केंद्रीय पैनल में कोई पद हासिल किया था।
इस बार बौद्ध अध्ययन विभाग की मौजूदगी सिर्फ अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद तक सीमित नहीं रही। सचिव पद के लिए NSUI की नम्रता मैदान में थीं। वहीं संयुक्त सचिव पद के लिए चुनाव लड़ने वाले छात्रों में NSUI के गोपाल चौधरी और समाजवादी छात्र सभा के विशेष यादव भी इसी विभाग से जुड़े रहे।
पिछले वर्षों के DUSU चुनावों में भी बौद्ध अध्ययन विभाग के छात्रों की मौजूदगी लगातार दिखाई देती रही है। 2025 में इसी विभाग के NSUI उम्मीदवार राहुल झांसला ने उपाध्यक्ष पद जीता था। वहीं करण और दीपिका झा ने क्रमशः सचिव और संयुक्त सचिव पद पर जीत दर्ज की थी।
2024 में बौद्ध अध्ययन में एमए के छात्र रहे NSUI के लोकेश चौधरी ने संयुक्त सचिव पद पर जीत हासिल की थी। वहीं 2023 में तीन साल के कोविड व्यवधान के बाद हुए DUSU चुनाव में ABVP के तुषार डेडा ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की थी।
अब सवाल उठता है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के अपेक्षाकृत छोटे विभागों में शामिल बौद्ध अध्ययन विभाग से छात्र राजनीति में इतने चेहरे क्यों सामने आ रहे हैं? विभाग के प्रमुख प्रोफेसर कामाख्या नारायण तिवारी के अनुसार, इसकी वजह सीधे तौर पर राजनीति से ज्यादा पाठ्यक्रम की प्रकृति और प्रवेश व्यवस्था से जुड़ी हो सकती है।
प्रोफेसर तिवारी के मुताबिक, बौद्ध अध्ययन का पाठ्यक्रम अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों के लिए खुला है। विभाग में करीब 200 सीटें हैं और दाखिला CUET के माध्यम से होता है। इस पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए यह जरूरी नहीं है कि छात्र ने स्नातक स्तर पर पहले से बौद्ध साहित्य की पढ़ाई की हो।
इस वजह से मानविकी के अलावा विज्ञान और वाणिज्य पृष्ठभूमि के छात्र भी इस पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सकते हैं। विभाग के अनुसार, विषय की बुनियादी प्रकृति मानविकी से जुड़ी होने के कारण अलग-अलग स्ट्रीम के छात्रों के लिए इसमें आगे की पढ़ाई का रास्ता खुला रहता है।
राजनीतिक गतिविधियों को लेकर भी विभाग के प्रमुख ने स्पष्ट किया कि पढ़ाई और छात्र राजनीति को अलग-अलग देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, छात्रों का दाखिला शिक्षा के लिए होता है और विभाग की जिम्मेदारी कक्षाओं में उपस्थिति तथा शैक्षणिक आवश्यकताओं को पूरा कराना है। कक्षा के बाहर छात्र अपनी रुचि और गतिविधियों के बारे में स्वतंत्र निर्णय लेते हैं।
प्रोफेसर तिवारी ने उस धारणा को भी खारिज किया कि राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखने वाले छात्र इस विभाग में केवल अस्थायी रूप से दाखिला लेते हैं और बाद में पढ़ाई छोड़ देते हैं। उनका कहना है कि वर्तमान समय में छात्र अपनी एमए की पढ़ाई पूरी कर रहे हैं और कुछ छात्र नेता आगे चलकर पीएचडी भी कर रहे हैं।
हालांकि, इस पूरे पैटर्न को लेकर छात्र संगठनों की अलग-अलग राय है। NSUI के एक सदस्य ने आरोप लगाया कि विभाग से ABVP उम्मीदवारों की लगातार मौजूदगी उसके भीतर राजनीतिक झुकाव की ओर संकेत करती है। दूसरी ओर, ABVP सदस्यों ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव में उनकी सफलता संगठन के सालभर चलने वाले काम का परिणाम है और इसका उम्मीदवार के शैक्षणिक विभाग से कोई सीधा संबंध नहीं है।
उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है कि बौद्ध अध्ययन विभाग किसी विशेष राजनीतिक संगठन या विचारधारा के लिए छात्र नेताओं को तैयार करता है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों के DUSU चुनाव परिणामों में इस विभाग के छात्रों की लगातार मौजूदगी एक स्पष्ट पैटर्न जरूर दिखाती है।
बौद्ध अध्ययन विभाग में अपेक्षाकृत व्यापक प्रवेश पात्रता, पर्याप्त सीटें और कक्षा के बाहर उपलब्ध समय जैसे कारक छात्रों को विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने का अवसर दे सकते हैं। यही वजह है कि दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में यह विभाग लगातार चर्चा में बना हुआ है।
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