चीन सीमा पर बीएसएनएल के दोनों टॉवरों की स्थिति: क्या वास्तव में सिग्नल की कमी है?
The post चीन बार्डर पर खड़े बीएसएनएल के दोनों टॉवरों में हरकत नहीं appeared first on Avikal Uttarakhand. विभाग ने कहा, लीलम व बोगड्यार टावर हो गए क्रियाशील धरातल पर दोनों टावरों में नहीं है सिग्नल दो साल से शो पीस बने है टावर चीन सीमा पर झूठ… The post चीन बार्डर पर खड़े बीएसएनएल के दोनों टॉवरों में हरकत नहीं appeared first on Avikal Uttarakhand.
चीन सीमा पर बीएसएनएल के दोनों टॉवरों की स्थिति: क्या वास्तव में सिग्नल की कमी है?
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कम शब्दों में कहें तो, चीन सीमा पर खड़े बीएसएनएल के दोनों टॉवर 'लीलम' और 'बोगड्यार' पिछले दो वर्षों से क्रियाशील नहीं हैं, जिसमें कोई भी सिग्नल नहीं मिल रहा।
हाल ही में, भारत संचार निगम (बीएसएनएल) ने एक तथ्यात्मक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें दावा किया गया था कि ये दोनों टॉवर क्रियाशील हो चुके हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि ये टॉवर धरातल पर महज शो पीस बनकर रह गए हैं। मुनस्यारी में स्थानीय संगठनों और नागरिकों ने इस मुद्दे पर गंभीर चिंता व्यक्त की है, और उन्होंने संचार मंत्री से तत्काल निर्णय की मांग की है।
क्या है मामला?
कथित रूप से, 27 मई 2026 को बीएसएनएल ने एक पत्र जारी कर कहा था कि लीलम और बोगड्यार में स्थापित टॉवर अब कार्यशील हैं। लेकिन स्थानीय लोगों और मुनस्यारी बचाओ संघर्ष समिति के अनुसार, इन टॉवरों से दो साल से कोई सिग्नल नहीं मिल रहा है। इस मामले में गंभीरता की बात यह है कि यह चीन सीमा के निकट स्थित है, जहां संचार की कमी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो सकती है।
स्थानीय नागरिकों की राय
मल्ला जोहार की क्षेत्र पंचायत सदस्य लक्ष्मी रलमाल ने बताया कि पिछले दो वर्षों से दोनों टॉवरों के कार्यशील होने की मांग की जा रही है। लेकिन बीएसएनएल के अधिकारी इस विषय पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता मनोहर सिंह रावत ने कहा कि बीएसएनएल के सहायक महाप्रबंधक के उत्तर ने यह सिद्ध कर दिया है कि या तो बीएसएनएल झूठ बोल रहा है या फिर उनकी सुविधाओं में गड़बड़ी है।
भविष्य की कार्रवाई
इस स्थिति को लेकर समिति के संयोजक जगत सिंह मर्तोलिया ने घोषणा की है कि यदि 15 दिनों के भीतर टॉवर से सिग्नल शुरू नहीं हुए, तो वे जन आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस मामले की शिकायत गृह मंत्रालय से की जाएगी, क्योंकि झूठी जानकारी का प्रसार सुरक्षा के लिए हानिकारक हो सकता है।
इससे क्या सबक मिलता है?
यह मुद्दा न केवल स्थानीय लोगों में असंतोष पैदा कर रहा है बल्कि एक व्यापक संदेश भी प्रस्तुत करता है। बीएसएनएल की इस निष्क्रियता और झूठे दावों के कारण एक विश्वसनीयता संकट उत्पन्न हो रहा है। संचार की इस अव्यवस्था के खिलाफ कदम उठाना अति आवश्यक हो गया है, विशेषकर ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में जहां सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए।
आगामी दिनों में बीएसएनएल को अपनी नीतियों में सुधार लाना होगा, ताकि जनता का भरोसा बहाल हो सके। इसके अलावा, यह भी महत्वपूर्ण है कि सरकारी संगठनों और अधिकारियों को स्थानीय समुदायों के साथ संवाद करना चाहिए ताकि उनकी आवश्यकताएँ और चिंताएँ समझी जा सकें।
अविकल उत्तराखंड ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे को प्रकाश में लाने का कार्य किया है, और यह हमारे नागरिकों की जिम्मेदारी बनती है कि वे अपनी आवाज उठाएं और सही सूचना के लिए संघर्ष करें।
अधिक जानकारी के लिए, कृपया हमारी वेबसाइट The Odd Naari पर जाएं।
सादर,
टीम द ओड नारी
स्नेहा कुमारी
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