गाज़ीपुर में अफ्ज़ाल अंसारी के हथियार मामले में नया मोड़: विस्तृत जांच जारी
गाजीपुर: सपा सांसद अफजाल अंसारी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पुराने शस्त्र लाइसेंस और हथियारों के रिकॉर्ड से जुड़े मामले में शहर कोतवाली में उनके खिलाफ एक और मुकदमा दर्ज किया गया है। मामला कई दशक पहले खरीदी गई राइफल और रिवाल्वर के दस्तावेजों तथा वर्तमान स्थिति के सत्यापन से जुड़ा है। पुलिस […]
गाज़ीपुर में अफ्ज़ाल अंसारी के हथियार मामले में नया मोड़
कम शब्दों में कहें तो, सपा सांसद अफ्ज़ाल अंसारी पर बढ़ती कानूनी चुनौतियाँ, पुराने शस्त्र लाइसेंसों और हथियारों की जांच में नए सबूत सामने आ रहे हैं।
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गाज़ीपुर: समाजवादी पार्टी के सांसद अफ्ज़ाल अंसारी के लिए चिंता के नए सबब उभर रहे हैं। पुलिस ने उनके खिलाफ पुराने शस्त्र लाइसेंस और हथियारों के रिकॉर्ड से जुड़े एक और मामले में मुकदमा दर्ज किया है। यह मामला कई दशकों पहले खरीदी गई राइफल और रिवाल्वर के दस्तावेजों तथा उनकी वर्तमान स्थिति के सत्यापन से संबंधित है।
शस्त्र लाइसेंस की जांच में खामियाँ
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अफ्ज़ाल अंसारी के शस्त्र लाइसेंस से संबंधित मूल अभिलेख उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, जिसके कारण हथियारों का भौतिक सत्यापन संभव नहीं हो सका है। आरोप है कि शस्त्र लाइसेंस की मूल पत्रावली और संबंधित रिकॉर्ड को तत्कालीन शस्त्र लिपिक प्रेमा शंकर वर्मा के साथ मिलकर गायब कराया गया था। इस कारण से वर्मा को भी नामजद किया गया है।
जांच का दायरा और माफिया मुख्तार अंसारी का संदर्भ
यह पूरी कार्रवाई वाराणसी क्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक वैभव कृष्ण के निर्देश के तहत चल रही जांच का हिस्सा है। इस जांच का दायरा दिवंगत माफिया मुख्तार अंसारी, उसके परिवार और आईएस-191 गिरोह से जुड़े लोगों को जारी किए गए शस्त्र लाइसेंसों तक फैला हुआ है। पुलिस ने बताया कि गिरोह से संबंधित 51 शस्त्र लाइसेंसों की जांच की जा रही है, जिनमें कई हथियारों की खरीद और बिक्री का विवरण है।
हथियारों की स्थिति और दस्तावेजों की कमी
जांच के दौरान कई हथियारों की वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। पुलिस का कहना है कि शस्त्र लाइसेंस से जुड़े कुछ मूल दस्तावेज और खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिले हैं। इस कारण से हथियारों के इस्तेमाल और उनकी मौजूदगी की पुष्टि करने में समस्या उत्पन्न हो रही है।
उदाहरण के लिए, सांसद अफ्ज़ाल अंसारी के शस्त्र लाइसेंस संख्या 1241/पी-11 की जांच में पता चला कि वर्ष 1988 में इस लाइसेंस पर प्रतिबंधित बोर की राइफल खरीदी गई थी। रिकार्ड के अनुसार, यह राइफल बाद में अरुणाचल प्रदेश के अलोंग में स्थित एक हथियार विक्रेता को बेची गई थी। इसके अतिरिक्त, उसी फर्म से .32 बोर की रिवाल्वर भी खरीदी गई थी।
दस्तावेजों की कमी और आगजनी का मामला
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि रिवाल्वर से संबंधित रिकॉर्ड में उसे 'सोल्ड' यानी बेचा हुआ दर्ज किया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हथियार किसे बेचा गया। जांच के दौरान संबंधित विक्रेता फर्म ने बताया कि वर्ष 2001 में उनके पुराने रिकॉर्ड जलने की घटना में नष्ट हो गए थे। इसके अलावा, पश्चिम शियांग जिले के प्रशासनिक रिकॉर्ड में संबंधित हथियारों की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी।
अधिकारियों का कहना है कि उक्त शस्त्र लाइसेंस को वर्ष 2023 में जिलाधिकारी के आदेश से निरस्त किया गया था। मामले की जांच एजेंसी ने अफ्ज़ाल अंसारी को नोटिस जारी किया था, लेकिन अब तक उन्हें स्पष्ट उत्तर नहीं मिला है।
आगे की कानूनी कार्रवाई
पुलिस अब जांच के आगे के चरण में हैं और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हथियारों के रिकॉर्ड कैसे गायब हुए और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है। इस संदर्भ में साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई ऐसे समय में हो रही है जब पुलिस पूरे प्रदेश में आपराधिक गिरोहों से जुड़े हथियारों और उनके रिकॉर्ड की समीक्षा कर रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य पुराने लाइसेंसों की स्थिति स्पष्ट करना और संभावित अवैध हथियारों के प्रयोग को रोकना है।
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सादर, टीम द ओड नारि - साक्षी महाजन
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