16 करोड़ की लागत का नया पुल पहली बारिश में धंसा, गुणवत्ता पर उठा सवाल
देहरादून, देहरादून-पांवटा साहिब पुराने राजमार्ग पर स्थित नंदा की चौकी के टौंस नदी पुल को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया नया पुल पहली ही तेज बारिश के बाद धंस गया, जिससे इसकी मजबूती और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। बताया […] The post 16 करोड़ की लागत, लेकिन मजबूती नहीं! पहली बारिश में धंसा नया पुल appeared first on Uttarakhand Broadcast.
16 करोड़ की लागत का नया पुल पहली बारिश में धंसा, गुणवत्ता पर उठा सवाल
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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून-पांवटा साहिब पुराने राजमार्ग पर बना नया नंदा की चौकी के टौंस नदी पुल खराब निर्माण गुणवत्ता के कारण पहली ही बारिश में धंस गया है, जिससे 16 करोड़ रुपये की लागत पर सवाल उठने लगे हैं।
देहरादून, उत्तराखंड के नंदा की चौकी में एक नया पुल लाया गया था जो कि केवल कुछ ही दिनों में बारिश की तेज धार को सहन न कर सका। 16 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस पुल के धंसने ने निर्माण की गुणवत्ता और कार्य की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले भी इसी स्थान पर पुराने पुल के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं हो चुकी हैं।
पुल का निर्माण और पहली बारिश की चुनौती
पूर्व प्रयास और समस्याएं
गौरतलब है कि 11 जुलाई 2026 को टौंस नदी में पानी का बहाव बढ़ने के कारण अस्थायी पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके बाद 12 जुलाई 2026 से नए पुल पर यातायात शुरू किया गया था। यह पुल निर्माण में उपयुक्त तकनीकी उपायों के अभाव का नतीजा प्रतीत होता है।
इससे पहले भी, 15 सितंबर 2025 को इसी स्थान पर बना पुराना पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। उस समय अस्थायी पुलिया तैयार की गई थी, जिसने लगभग 10 महीने तक वाहनों का दबाव संभाला। ऐसे में फिर से नया पुल बनाना और फिर उसकी पहली बारिश में धंसना चिंता का विषय है।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
घटना के बारे में जानकारी मिलते ही प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की टीम मौके पर पहुंची। पुल का निरीक्षण किया जा रहा है और तकनीकी विशेषज्ञ धंसाव के कारणों की जांच कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों में इस घटना को लेकर भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि जब नया पुल कुछ ही दिनों में क्षतिग्रस्त हो गया, तो करोड़ों रुपये खर्च करने का प्रभावी औचित्य क्या है? स्थानीय लोगों ने मांग की है कि पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच की जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर उठे सवाल
इस घटना ने स्थानीय सरकार और निर्माण एजेंसियों के प्रति विश्वास को कम किया है। अक्सर देखी गई है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जाता, जिससे ऐसे घटनाएं घटित होती हैं। लोग अब और अधिक जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत जांच रिपोर्ट के आने के बाद ही सही कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, यह मामला एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। क्या यह सिर्फ एक मामले भर है या इसके पीछे बड़ी समस्याओं का जाल है? यह एक गंभीर सोचने का विषय है।
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सादर,
टीम द ओड नारी
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