आपके जन्मदिन पर वृक्षारोपण का महत्व - प्रोफेसर दुर्गेश पंत

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Jun 5, 2026 - 18:38
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आपके जन्मदिन पर वृक्षारोपण का महत्व - प्रोफेसर दुर्गेश पंत
आपके जन्मदिन पर वृक्षारोपण का महत्व - प्रोफेसर दुर्गेश पंत

अपने जन्मदिन पर एक पेड़ अवश्य लगाएं- प्रो. दुर्गेश पंत

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कम शब्दों में कहें तो, प्रोफेसर दुर्गेश पंत ने सुझाव दिया है कि हमें अपने जन्मदिन पर पेड़ लगाना चाहिए, यह न केवल पर्यावरण को बचाने में मदद करता है बल्कि एक उज्जवल भविष्य का निर्माण भी करता है।

विश्व पर्यावरण दिवस पर महत्वपूर्ण आयोजन

देहरादून में उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस 2026 का आयोजन “प्रकृति से प्रेरित, जलवायु के लिए, हमारे भविष्य के लिए” विषय पर किया गया। इस समारोह में वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, और विद्यार्थियों ने सक्रिय भाग लिया और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सामूहिक प्रयासों का संदेश दिया।

प्रकृति और विज्ञान का समन्वय

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और राष्ट्रगान से किया गया। यूकॉस्ट के महानिदेशक, प्रो. दुर्गेश पंत ने परिषद द्वारा विभिन्न पर्यावरणीय पहलों की जानकारी दी। उन्होंने कहा, "सतत भविष्य के निर्माण के लिए विज्ञान और प्रकृति का समन्वय आवश्यक है। हमें युवा पीढ़ी को भी पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना चाहिए।"

हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की चुनौतियाँ

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, प्रो. आर. सी. सुन्दरियाल ने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र, आजीविका संबंधी चुनौतियों और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन पर बात की। उन्होंने कहा, "प्रकृति के साथ संतुलन ही सतत विकास का आधार है," और विकास तथा पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

युवाओं के लिए प्रेरणा

डॉ. निरपेन्द्र के. चौहान ने सुगंधित और औषधीय पौधों के क्षेत्र में सफलताएँ साझा कीं, जबकि डॉ. डी. पी. उनियाल ने हिमालयी कीस्टोन प्रजातियों के महत्व को रेखांकित किया। डॉ. भावतोष शर्मा ने "माँ धरा नमन" पहल की जानकारी दी, जिसमें पर्यावरण संरक्षण और समुदाय की भागीदारी के लिए किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा हुई।

पर्यावरणीय चुनौतियों पर संवाद

कार्यक्रम के दौरान आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में उपस्थित विशेषज्ञों और विद्यार्थियों के बीच जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहरी चर्चा हुई। कार्यक्रम ने सभी उपस्थित लोगों को प्रेरित किया कि वे अपने नज़दीकी पर्यावरण में बदलाव लाने और प्रकृति से जुड़ने के लिए प्रेरित हों।

समापन और भविष्य की दिशा

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। 300 से अधिक विद्यार्थियों ने इसमें भाग लिया और यूकॉस्ट, आंचलिक विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक तथा अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। इस आयोजन ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है कि प्रकृति-आधारित समाधान और वैज्ञानिक नवाचार ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुदृढ़ और समृद्ध भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।

अधिक जानकारी के लिए कृपया [यहाँ] (https://theoddnaari.com) पर जाएं।

सादर,
कंचन उनियाल,
टीम द ओड नारी

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