ED की कार्रवाई का नया आंकड़ा: 4,622 मामले, 1,243 गिरफ्तारियां, लेकिन महज 104 को सजा

नई दिल्ली/देहरादून: देश की प्रमुख आर्थिक अपराध जांच एजेंसियों प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate – ED) और आयकर विभाग (Income Tax Department) की कार्रवाई और उनकी प्रभावशीलता को लेकर संसद में पेश किए गए ताजा आंकड़ों ने नई बहस को जन्म दे दिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा राज्यसभा में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले […] The post ED की कार्रवाई पर बड़ा खुलासा! 4,622 केस, 1,243 गिरफ्तारियां… लेकिन सजा सिर्फ 104 को appeared first on Uttarakhand Broadcast.

Aug 6, 2026 - 18:38
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ED की कार्रवाई का नया आंकड़ा: 4,622 मामले, 1,243 गिरफ्तारियां, लेकिन महज 104 को सजा
ED की कार्रवाई का नया आंकड़ा: 4,622 मामले, 1,243 गिरफ्तारियां, लेकिन महज 104 को सजा

ED की कार्रवाई का नया आंकड़ा: 4,622 मामले, 1,243 गिरफ्तारियां, लेकिन महज 104 को सजा

नई दिल्ली/देहरादून: देश की प्रमुख आर्थिक अपराध जांच एजेंसियों प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate – ED) और आयकर विभाग (Income Tax Department) की कार्रवाई और उनकी प्रभावशीलता को लेकर संसद में पेश किए गए ताजा आंकड़ों ने नई बहस को जन्म दे दिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा राज्यसभा में प्रस्तुत किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में हजारों मामलों की जांच और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन दोषसिद्धि (Conviction) के आंकड़े अपेक्षाकृत काफी कम रहे हैं।

कम शब्दों में कहें तो: ED और आयकर विभाग द्वारा दर्ज मामलों और गिरफ्तारी की बड़ी संख्या के बावजूद, दोषसिद्धि दर चिंताजनक रूप से कम है, जिससे इन जांच एजेंसियों की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।

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ED ने 5 साल में दर्ज किए 4,622 मामले

वित्त मंत्रालय के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कुल 4,622 मामले दर्ज किए।

इस दौरान एजेंसी ने 1,243 लोगों को गिरफ्तार किया, लेकिन अदालतों में अब तक केवल 43 मामलों में दोषसिद्धि हो सकी, और 104 आरोपियों को सजाइन आंकड़ों के सामने आने के बाद जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली, जांच की गुणवत्ता और न्यायिक प्रक्रिया की गति पर गंभीर प्रश्न उठने लगे हैं।

आयकर विभाग के अभियोजन मामलों की स्थिति भी चिंताजनक

संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में आयकर विभाग ने कुल 2,127 अभियोजन मामले दर्ज किए।

इन मामलों में से:

  • 233 मामलों में दोषसिद्धि हो चुकी है।
  • 854 मामलों में आरोपी बरी हुए हैं।
  • कई मामले अभी भी विभिन्न अदालतों में विचाराधीन हैं।

सरकार ने क्या कहा?

वित्त मंत्रालय ने इन आंकड़ों के संबंध में स्पष्ट किया कि इनकी सीधे तुलना करना अन्यथा हो सकता है।

सरकार का कहना है:

  • न्यायिक प्रक्रिया लंबी होती है, और फैसलों में दायर मामलों की समय सीमा भिन्न हो सकती है।
  • कई आर्थिक अपराधों के मामलों की जांच और सुनवाई वर्षों तक चल सकती है।
  • बड़ी संख्या में मामले अभी अदालतों में लंबित हैं, जिनका निस्तारण अभी होना बाकी है।

उठ रहे हैं कई अहम सवाल

संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के मद्देनजर कई महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आए हैं:

  • क्या जांच एजेंसियां पर्याप्त और मजबूत साक्ष्य जुटाने में सफल हो रही हैं?
  • क्या लंबी न्यायिक प्रक्रिया कम दोषसिद्धि का प्रमुख कारण है?
  • क्या आर्थिक अपराधों की जांच और अभियोजन प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है?
  • क्या लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए एक विशेष न्यायिक व्यवस्था बनाने की जरूरत है?

विशेषज्ञों की राय

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी जांच एजेंसी की सफलता का मूल्यांकन केवल दर्ज मामलों या गिरफ्तारियों की संख्या से नहीं किया जा सकता।

उनके अनुसार, वास्तविक प्रभावशीलता का आकलन निम्नलिखित आधारों पर होना चाहिए:

  • दोषसिद्धि (Conviction Rate)
  • जांच की गुणवत्ता
  • अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों की मजबूती
  • मामलों के समयबद्ध निस्तारण

स्वाभाविक है कि मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक अपराधों की प्रकृति जटिल होती है, और इनकी जांच और न्यायिक प्रक्रिया में अधिक समय लगना स्वाभाविक है।

विपक्ष ने उठाए सवाल

संसद में आंकड़े सामने आने के बाद विपक्ष ने जांच एजेंसियों के प्रदर्शन और उनके उपयोग को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, सरकार का कहना है कि ED और आयकर विभाग कानून के दायरे में स्वतंत्र रूप से कार्य कर रहे हैं और लंबित मामलों के निस्तारण के बाद दोषसिद्धि के आंकड़ों में वृद्धि की संभावना बनी हुई है।

पिछले पांच वर्षों में ED द्वारा 4,622 मामले और 1,243 गिरफ्तारियां की गईं, जबकि आयकर विभाग द्वारा 2,127 अभियोजन मामले दर्ज किए गए। हालांकि दोषसिद्धि के अपेक्षाकृत कम आंकड़ों ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली, न्यायिक प्रक्रिया की गति, और आर्थिक अपराधों से निपटने की मौजूदा व्यवस्था पर व्यापक बहस छेड़ दी है।

अधिक जानकारी के लिए, यहां क्लिक करें.

टीम The Odd Naari, साक्षी शर्मा

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