China-India साझेदारी का सही समय, ट्रंप के टैरिफ के बाद जिनपिंग ने पीएम मोदी को भेजा लेटर, जानें क्या कहा
अमेरिका की तरफ से जहां दुनियाभर के देशों पर टैरिफ का ऐलान किया गया है। इसका असर भारत, चीन समेत कई यूरोपीय देशों पर सीधा पड़ेगा। वहीं अब ट्रंप के इस कदम के बाद बारी उनके कट्टर दुश्मन शी जिनपिंग की थी। चीन ने एक बड़ा दांव खेला है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि ये चीन और भारत दोनों के साझेदार बनने का सही समय है। शी जिनपिंग ने कहा है कि दोनों देशों को अपनी दोस्ती को औ मजबूत करना चाहिए। चीन के राष्ट्रपति ने कहा है कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच सहयोग की बहुत बड़ी क्षमता है। सवाल ये है कि चीन का इरादा क्या है और इस बाबत भारत को क्या रुख अपनाना चाहिए? चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत को पत्र लिखा है। चीन की तरफ से भारत को कूटनीतिक संबंध के 75 वर्ष होने पर पत्र लिखा गया है। इसे भी पढ़ें: Vanakkam Poorvottar: Bangladesh को तोड़ कर भारत ने समुद्र तक सीधी पहुँच बना ली तो क्या करेंगे Muhammad Yunus?कई बार ये कहा जाता है कि चीन की कथनी और करनी में अंतर होता है। चीन की बातें मत सुनो चीन जमीन पर क्या कर रहा है, उस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। दरअसल, भारत डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ से निपटने के लिए एक के बाद एक कई कूटनीतिक कदम उठा रहा है। दूसरी तरफ चीन चाश्नी में भरे शब्दों का इस्तेमाल कर भारत को अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रहा है। लेकिन आपको याद रहे कि भारत ने ये साफ कर दिया है कि जब तक सीमाएं शांत नहीं होती, तब तक ये रिश्ता आगे नहीं बढ़ सकता। भारत अमेरिका और चीन के बीच तनाव में कोई जल्दबाजी बिल्कुल नहीं दिखा रहा है। भारत वेट एंड वॉच की नीति अपना रहा है। भारत जापान, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय देशों के साथ रिश्तों को और मजबूत कर रहा है। चीन पर निर्भरता को कम कर अपनी आत्मनिर्भरता को और बढ़ा रहा है। सप्लाई चेन मैनेजमेंट में भारत एक बहुत बड़ी शक्ति के रूप में उभरने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। चीन भारत व्यापार अब तक चीन के ही पक्ष में रहा है। इसे भी पढ़ें: Shaurya Path: Bangladesh-China Relation, Nepal Situation, Russia-Ukraine War और US-Iran Tension संबंधी मुद्दों पर Brigadier Tripathi से वार्ताचीन के राजदूत झू फियांग ने कहा है कि व्यापार असंतुलन को ठीक करने के लिए भारत से ज्यादा प्रोडक्ट्स आयात करेंगे। बता दें कि अभी भारत चीन से ज्यादा आयात करता है। चीन, जापान और दक्षिण कोरिया ने हाथ मिलाया: चीन, जापान और दक्षिण कोरिया ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की बड़ी तैयारियां शुरू कर दी हैं। ये तीनों देश ट्रम्प के 3 अप्रैल से लागू होने वाले 25% ऑटो टैरिफ से मुख्य रूप से प्रभावित होने वाले हैं। लेकिन इस मौके का फायदा उठाकर भारत को व्यापार संतुलन बनाने और कूटनीति को अपनी दिशा में आगे बढ़ाने का बहुत सुनहरा मौका मिल चुका है। चीन भारत को अमेरिका से दूर करना चाहता है। लेकिन चीन की इस चाल को भारत अच्छी तरह से समझता है। अमेरिका से रणनीतिक रिश्ते मजबूत करते हुए भारत ने चीन से सतर्क दूरी बनाई हुई है।

China-India साझेदारी का सही समय, ट्रंप के टैरिफ के बाद जिनपिंग ने पीएम मोदी को भेजा लेटर, जानें क्या कहा
The Odd Naari द्वारा लिखित, टीम नेतनागरी
परिचय
चीन और भारत की साझेदारी पर नजर डालें, तो वर्तमान समय इसे आगे बढ़ाने का सही अवसर साबित हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ के बाद, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक महत्वपूर्ण पत्र भेजा है। इस पत्र में जिनपिंग ने दोनों देशों के बीच सहयोग और व्यापार में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है। आइए जानते हैं इस पत्र में क्या कहा गया है और इसका क्या प्रभाव हो सकता है।
पत्र का मुख्य उद्देश्य
चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि व्यापारिक साझेदारी भारत और चीन के आपसी हित के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा है कि ट्रंप के टैरिफ ने कई आर्थिक गतिशीलताओं को प्रभावित किया है और इस नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए दोनों देशों को एकजुट होकर काम करना चाहिए।
भारत-चीन मित्रता की नई दिशा
पत्र में जिनपिंग ने भारत और चीन के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए कुछ प्रमुख सुझाव दिए हैं। इनमें द्विपक्षीय व्यापार का विस्तार, तकनीकी साझेदारी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना शामिल है। जिनपिंग का यह कदम यह दर्शाता है कि चीन भारत के साथ संबंध सुधारने के लिए गंभीर है।
क्या हैं संभावित लाभ?
चीन और भारत के बीच सहयोग से दोनों देशों को कई लाभ हो सकते हैं, जैसे:
- अर्थव्यवस्था में वृद्धि
- नई निवेश संभावनाएँ
- सीमाओं पर तनाव को कम करना
अगर दोनों देश एक साथ आते हैं, तो यह न केवल दक्षिण एशिया के लिए बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक सकारात्मक संदेश भेजेगा।
समाप्ति
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस पत्र के बाद क्या कदम उठाए जाएंगे। जिनपिंग और मोदी के बीच संवाद बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि आर्थिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से दोनों देश मजबूत बन सकें। अंततः, यह अवसर न केवल चीन और भारत के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
अधिक अपडेट के लिए, theoddnaari.com पर जाएं।