हृदयविदारक : लेफ्टिनेंट जनरल एमएम लखेड़ा का निधन, उत्तराखंड में शोक की लहर

देहरादून। भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी, मिजोरम एवं पुडुचेरी के पूर्व राज्यपाल और उत्तराखंड के गौरव लेफ्टिनेंट जनरल एमएम लखेड़ा (Lieutenant General M.M. Lakhera) का सोमवार को देहरादून के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे 88 वर्ष के थे। उनके निधन से सैन्य, प्रशासनिक और राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई […] The post दुःखद : देश के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ले. जनरल एमएम लखेड़ा का निधन, शोक में डूबा उत्तराखंड appeared first on Uttarakhand Broadcast.

Jun 30, 2026 - 09:38
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हृदयविदारक : लेफ्टिनेंट जनरल एमएम लखेड़ा का निधन, उत्तराखंड में शोक की लहर
हृदयविदारक : लेफ्टिनेंट जनरल एमएम लखेड़ा का निधन, उत्तराखंड में शोक की लहर

लेफ्टिनेंट जनरल एमएम लखेड़ा का निधन, उत्तराखंड में शोक की लहर

देहरादून। भारतीय सेना के प्रसिद्ध वरिष्ठ अधिकारी, उत्तराखंड के गौरव और मिजोरम एवं पुडुचेरी के पूर्व राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल एमएम लखेड़ा का सोमवार को देहरादून के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनकी आयु 88 वर्ष थी। उनके आकस्मिक निधन से सैन्य, प्रशासनिक और राजनीतिक क्षेत्र में शोक छा गया है। विभिन्न संगठनों और आदरणीय व्यक्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।

परिजनों के अनुसार, लेफ्टिनेंट जनरल लखेड़ा पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे और उनका उपचार चल रहा था। अंततः सोमवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।

उनकी पुत्री अलका कुकरेती ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार मंगलवार, 30 जून को हरिद्वार में किया जाएगा। अंतिम यात्रा सुबह 9 बजे उनके निवास 28ए, पनाश वैली, सहस्त्रधारा रोड, देहरादून से आरंभ होगी।

सैन्य सेवा में अद्वितीय योगदान

लेफ्टिनेंट जनरल एमएम लखेड़ा का जन्म 21 अक्टूबर 1937 को उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले के जखंड गांव में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने गांव में ही प्राप्त की और बाद में राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज (RIMC), देहरादून से अपनी शिक्षा जारी रखी। 1958 में उन्होंने भारतीय सैन्य अकादमी (IMA), देहरादून से कमीशन प्राप्त करने के बाद भारतीय सेना में एक अद्वितीय करियर की शुरुआत की।

युद्धों में प्रमुख भूमिका

लेफ्टिनेंट जनरल लखेड़ा ने भारतीय सेना में कई महत्वपूर्ण अभियानों में प्रभावपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने 1961 के गोवा मुक्ति अभियान में भी भाग लिया। इसके बाद, उन्होंने 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्धों में अपनी उत्कृष्ट रणनीतिक नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन किया। कश्मीर घाटी में भी उन्होंने ब्रिगेड की कमान संभाली और 4th Battalion, Kumaon Regiment का नेतृत्व किया। उनकी सैन्य सेवाएं उन्हें कई प्रमुख सैन्य सम्मानों से नवाजा गया, जिनमें परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM), अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) शामिल हैं।

राजनीतिक और प्रशासनिक योगदान

सेवा निवृत्ति के बाद, लेफ्टिनेंट जनरल ने भी प्रशासनिक क्षेत्र में अपने कारगर योगदान को जारी रखा। वर्ष 2004 से 2006 तक वे पुडुचेरी के लेफ्टिनेंट गवर्नर रहे और वहां उन्होंने 2004 की सुनामी के बाद राहत और पुनर्वास कार्यों का संचालन किया। इसके बाद, 2006 से 2011 तक उन्होंने मिजोरम के राज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएं दीं और साथ ही अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के लेफ्टिनेंट गवर्नर का अतिरिक्त दायित्व भी संभाला।

सादगी और नेतृत्व के प्रतीक

लेफ्टिनेंट जनरल एमएम लखेड़ा अपने सरल स्वभाव, अनुशासन, और राष्ट्र सेवा के प्रति प्रतिबद्धता के लिए खासा प्रख्यात थे। उनकी वेदना और प्रशासनिक सेवाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक बनी रहेंगी। उनके निधन पर कई सैन्य एवं सामाजिक संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

कम शब्दों में कहें तो, लेफ्टिनेंट जनरल एमएम लखेड़ा का निधन न केवल भारतीय सेना के लिए बल्कि उत्तराखंड राज्य के लिए भी एक अपूरणीय क्षति है। उनकी साहसी सेवाएं और नेतृत्व हमेशा याद किया जाएगा।

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— टीम द ओड नारी

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