हल्द्वानी: प्राइवेट स्कूलों पर डीएम की कार्रवाई, 39 लाख रुपए फीस लौटाए गए

नैनीताल में निजी स्कूलों की मनमानी पर शिक्षा विभाग का शिकंजा, अभिभावकों को लौटाए गए

Sep 4, 2026 - 00:38
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हल्द्वानी: प्राइवेट स्कूलों पर डीएम की कार्रवाई, 39 लाख रुपए फीस लौटाए गए

हल्द्वानी: प्राइवेट स्कूलों पर डीएम की कार्रवाई, 39 लाख रुपए फीस लौटाए गए

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कम शब्दों में कहें तो, नैनीताल में शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों के खिलाफ एक सख्त कदम उठाया है, जिससे अभिभावकों को 39 लाख रुपये से अधिक की फीस वापस मिल चुकी है।

घटना नैनीताल जनपद की है, जहाँ पिछले कुछ समय से निजी स्कूलों द्वारा मनमानी करने की कई शिकायतें मिल रही थीं। इस स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने मिलकर एक अभियान चलाया। इस अभियान का उद्देश्य स्कूलों द्वार वसूले गए अतिरिक्त शुल्क की वापसी सुनिश्चित करना था।

डीएम की कार्रवाई का असर

इस अभियान की शुरूआत अप्रैल 2026 में की गई थी, जिसके सकारात्मक परिणाम अब देखने को मिल रहे हैं। जिला प्रशासन ने अनेक निजी विद्यालयों की दुकानदारों की तलाश की और उन्हें अतिरिक्त शुल्क वापसी के लिए निर्देशित किया। अब तक अभिभावकों को लगभग 39 लाख रुपये वापस किए जा चुके हैं, जिससे अभिभावकों में राहत की लहर दौड़ गई है। कई अभिभावकों ने इस कदम की सराहना की है और इसे शिक्षा के क्षेत्र में सुधार का एक महत्वपूर्ण प्रारम्भ माना है।

प्रभावित अभिभावक क्या कहते हैं?

अभिभावकों का कहना है कि वे हमेशा से निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ थे और प्रशासन की इस कार्रवाई से उन्हें उम्मीद है कि अब ऐसी समस्याएं नहीं उठेंगी। कई अभिभावकों ने बताया कि स्कूलों द्वारा अतिरिक्त शुल्क वसूलना उनकी आर्थिक स्थिति पर भारी पड़ रहा था, और अब जब पैसे वापस मिल रहे हैं तो यह उनकी आर्थिक राहत का कारण बन गया है।

शिक्षा विभाग की स्थिति

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्राथमिकता हमेशा से छात्रों और अभिभावकों की भलाई रही है। विभाग अब इस समस्या की निगरानी लगातार करेगा ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी कार्रवाई को रोका जा सके। अगर कोई स्कूल फिर से ऐसे अवैध शुल्क लेता है, तो उन पर और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना से स्पष्ट होता है कि सरकारी अधिकारियों का शिक्षा क्षेत्र में दखल बढ़ रहा है और इससे अभिभावकों को उम्मीदें जगी हैं। ऐसे कदम आगामी भविष्य में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने में सहायक हो सकते हैं।

अंततः, यह कदम न केवल उनके लिए एक स्वीकृति है, बल्कि यह एक सख्त संदेश भी है कि प्रदेश में किसी भी प्रकार की गलत गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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टीम द ओड नारी

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