हरिद्वार अर्द्धकुंभ को कुंभ बनाने पर साधु-संतों में बवाल
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स्वामी रूपेंद्र प्रकाश के बयान से उदासीन अखाड़ा दो फाड़
सीएम की 28 नवंबर को अखाड़ों के साथ बैठक
अखाड़ा परिषद पर सवाल उठे तो भड़के संत
निष्कासित महंतों की वापसी की मांग तेज
अविकल उत्तराखण्ड
हरिद्वार। साल 2027 में होने वाले अर्धकुंभ मेले को कुंभ की तरह मनाने के प्रस्ताव ने साधु-संतों के बीच जोरदार विवाद खड़ा कर दिया है। विवाद की शुरुआत उदासीन पंचायती बड़ा अखाड़ा के महामंडलेश्वर और अवधूत मंडल आश्रम के प्रमुख स्वामी रूपेंद्र प्रकाश महाराज के बयान से हुई।
उन्होंने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अस्तित्व पर सवाल उठाते हुए परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी और महामंत्री महंत हरी गिरि को फर्जी बताया। उनके समर्थन में अखाड़े के दो पदाधिकारी भी सामने आ गए।
इस बीच, मुख्यमंत्री धामी 28 नवंबर को हरिद्वार में सभी अखाड़ों की बैठक लेने वाले हैं, जिसमें 2027 के अर्धकुंभ को भव्य कुंभ रूप में आयोजित करने पर अंतिम निर्णय होगा। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में उदासीन अखाड़ा बड़े के प्रतिनिधि के रूप में महंत रघुमुनि और उनके साथी भी शामिल हो सकते हैं।
इधऱ,स्वामी रूपेंद्र प्रकाश के इन बयानों के बाद उदासीन अखाड़े के भीतर ही गंभीर मतभेद खड़े हो गए। अखाड़े की पश्चिम पंगत से पहले निष्कासित किए गए महंत रघुमुनि, महंत अग्रदास और महंत दामोदरदास के समर्थक अब स्वामी रूपेंद्र प्रकाश और उनके गुट के विरोध में उतर आए हैं।
इन्हीं तीन महंतों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण भदोरिया ने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और महामंत्री को कानूनी नोटिस भेजकर पूरे प्रकरण की बिंदुवार जानकारी और दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है।
नोटिस में कहा गया है कि यदि महंत रवींद्र पुरी और महंत हरी गिरि ने किसी गलत सूचना के आधार पर तीनों महंतों को हटाया, तो उनके विरुद्ध भी कानूनी कार्यवाही की जा सकती है। इस पर महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि वे विधिक सलाह के बाद ही जवाब देंगे।

अध्यक्ष अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद
उधर, स्वामी रूपेंद्र प्रकाश के आरोपों को उदासीन अखाड़े के ही कई संतों ने गलत ठहराया है। स्वामी नागेंद्र महाराज ने कहा कि वही पदाधिकारी, जिनकी सहायता से प्रयागराज कुंभ में महंत रघुमुनि और अन्य महंतों को हटवाया गया था, अब अपने स्वार्थ के लिए अखाड़ा परिषद को फर्जी बता रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि यदि परिषद फर्जी थी, तब तीनों महंतों के निष्कासन की प्रक्रिया भी अमान्य मानी जानी चाहिए और उन्हें अखाड़े में वापस लिया जाना चाहिए।
इस विवाद के बीच अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि 2027 के अर्धकुंभ को कुंभ की तरह मनाने का निर्णय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का है। इसका सभी अखाड़ों ने स्वागत किया था। उन्होंने कहा कि स्वामी रूपेंद्र प्रकाश अखाड़ों की परंपराओं को समझे बिना राजनीति कर रहे हैं और अखाड़ा परिषद जैसी प्रतिष्ठित संस्था को बदनाम कर रहे हैं।
महंत रवींद्र पुरी ने साफ कहा कि कुंभ मेले की व्यवस्थाओं पर अभी तक परिषद की कोई औपचारिक बैठक नहीं हुई है, इसलिए किसी भी महामंडलेश्वर को मनमाना बयान देने का अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुंभ व्यवस्था में निर्णय अखाड़ों के सचिवों और पंचपरमेश्वर द्वारा लिए जाते हैं।

सूत्र यह भी संकेत दे रहे हैं कि महामण्डलेश्वर स्वामी रूपेंद्र प्रकाश मुख्यमंत्री के राजनीतिक विरोधियों के इशारे पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उदासीन अखाड़े के संत आपस में ही विभाजित हो गए हैं।
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