बीकेटीसी में दो नए विशेष आमंत्रित सदस्यों की नियुक्ति: विवाद और राजनीति का नया अध्याय

The post बीकेटीसी में दो नए विशेष आमंत्रित सदस्यों की नियुक्ति appeared first on Avikal Uttarakhand. बीकेटीसी के नियमों के पालन पर उठे सवाल शासन ने 22 मई को बनाये दो विशेष आमंत्रित सदस्य बीकेटीसी ने फरवरी माह में बनाये थे दो Co-opted सदस्य और अविकल… The post बीकेटीसी में दो नए विशेष आमंत्रित सदस्यों की नियुक्ति appeared first on Avikal Uttarakhand.

Jun 8, 2026 - 09:38
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बीकेटीसी में दो नए विशेष आमंत्रित सदस्यों की नियुक्ति: विवाद और राजनीति का नया अध्याय
बीकेटीसी में दो नए विशेष आमंत्रित सदस्यों की नियुक्ति: विवाद और राजनीति का नया अध्याय

बीकेटीसी में दो नए विशेष आमंत्रित सदस्यों की नियुक्ति: विवाद और राजनीति का नया अध्याय

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कम शब्दों में कहें तो, बीकेटीसी में दो नए विशेष आमंत्रित सदस्यों की नियुक्ति विवाद का कारण बन गई है। इस विधि के अंतर्गत अधिकांश नियमों का पालन नहीं किया गया है।

जोशीमठ/देहरादून। श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के भीतर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में, सरकार द्वारा 22 मई को दो विशेष आमंत्रित सदस्यों की नियुक्ति की गई है, जिसके कारण कई सवाल उठ रहे हैं। बीकेटीसी ने फरवरी में दो Co-opted सदस्यों की नियुक्ति की थी, और अब यह नया विवाद एक बार फिर सत्ताधारी भाजपा सरकार और स्थानीय प्रशासन की परेशानियों को बढ़ा रहा है।

शासन की ओर से नियुक्ति का आदेश

पर्यटन एवं धर्मस्व सचिव धीराज गर्ब्याल द्वारा 22 मई को जारी आदेश में कहा गया कि श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर अधिनियम 1939 की धारा -26 की उपधारा– 2 (छ) के अंतर्गत कमला बगवाड़ी और जेपी सेमवाल को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। इस निर्णय से बीकेटीसी में कानूनों की उचित पालना न करने के आरोपों की पुष्टि हुई है।

पहले के विवाद और निष्कर्ष

इससे पहले, बीकेटीसी ने फरवरी माह में तीर्थ पुरोहितों राजकुमार तिवारी और रजनीश प्रसाद भट्ट को Co-opted सदस्य के तौर पर नामित किया था, लेकिन शासन की तरफ से इस नियुक्ति का औपचारिक नोटिफिकेशन नहीं आया। राजकुमार तिवारी, जो कि केदारनाथ के तीर्थ पुरोहितों के संगठन के अध्यक्ष हैं, ने बीकेटीसी अध्यक्ष की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। इसके बाद उन्होंने गुस्से में पद से हटाने की चेतावनी भी दी थी।

बता दें कि बीकेटीसी के स्तर से सदस्यों की नियुक्ति पर सवाल उठ रहे थे, और अब सरकार द्वारा भी इसी धारा के तहत नए सदस्यों की नियुक्ति बीकेटीसी की स्थिति को और हास्यास्पद बना रही है।

बीकेटीसी की कानूनन स्थिति

मंदिर समिति एक्ट की धारा -26 राज्य सरकार को बीकेटीसी के संबंधित नियम बनाने की शक्ति देती है, जिसमें स्पष्टता से बताया गया है कि बीकेटीसी क्या-क्या कर सकती है। इस धारा की उपधारा-2 (छ) के तहत, बीकेटीसी दो ऐसे सदस्य नामित करने का अधिकार रखती है, जिन्हें बैठक में मत देने का अधिकार नहीं होता। लेकिन नियमों के अनुसार, पहले प्रदेश सरकार को नियम बनाने होंगे।

आगे का रास्ता

जो बातें सामने आ रही हैं, उनके अनुसार, बीकेटीसी ने बिना शासन की अनुमति के नामित सदस्यों का आदेश जारी किया था। इससे पहले विशेष आमंत्रित सदस्यों की नियुक्ति हमेशा शासन द्वारा की जाती रही है और इसके लिए अधिसूचना भी जारी होती रही है। यह पहला मौका है जब बीकेटीसी ने खुद ही सदस्यों को नामित किया है।

देखें नियुक्ति आदेश

नियुक्ति आदेश
नियुक्ति आदेश

बीकेटीसी में हालात तेजी से बदल रहे हैं और यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे कैसे परिस्थितियाँ विकसित होती हैं। इस मामले पर गहरा ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि यह एक बड़े धार्मिक और प्रशासनिक मुद्दे से जुड़ा हुआ है।

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सादर,
टीम द ओड नारी | पूजा शर्मा

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