देहरादून: मूलभूत मुद्दों पर ध्यान देते हुए डीएम ने पुरानी भूमि विवाद का समाधान किया
देहरादून : सविन बंसल की अध्यक्षता में आयोजित जनता दरबार में एक लंबे समय से लंबित भूमि विवाद का समाधान हो गया। जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद वर्षों से अटका भूमि सीमांकन कार्य पूरा कर लिया गया है, जिससे फरियादी को बड़ी राहत मिली है। क्या था पूरा मामला? फरियादी उम्मेद सिंह ने अपने पुत्र […] The post देहरादून: डीएम के सख्त रुख से वर्षों पुराना भूमि विवाद सुलझा, सीमांकन कार्य पूरा appeared first on Uttarakhand Broadcast.
देहरादून: मूलभूत मुद्दों पर ध्यान देते हुए डीएम ने पुरानी भूमि विवाद का समाधान किया
कम शब्दों में कहें तो, सविन बंसल की अध्यक्षता में जनता दरबार में डीएम के प्रभावी हस्तक्षेप से वर्षों से लंबित भूमि विवाद का समाधान हो गया है। सीमांकन कार्य पूरा होने से फरियादी को बड़ी राहत मिली है। Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - The Odd Naari
क्या था पूरा मामला?
फरियादी उम्मेद सिंह ने अपने पुत्र उत्पल सिंह की निजी भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत सुर्खियों में रखी। उन्होंने जिलाधिकारी के समक्ष तत्काल भूमि सीमांकन की मांग की, जिस पर जिलाधिकारी ने त्वरित कार्रवाई की।
हालांकि, 6 अप्रैल 2026 को उम्मेद सिंह पुनः जनता दरबार पहुंचे और आरोप लगाया कि सीमांकन प्रक्रिया में देरी हो रही है और उन्हें उचित सहायता नहीं मिल रही। इस पर जिलाधिकारी ने मामले का गंभीरता से संज्ञान लिया।
डीएम ने दिखाई सख्ती, मांगी रिपोर्ट
इस मामले को लेकर जिलाधिकारी ने तहसील प्रशासन डोईवाला को तलब किया। उन्होंने निर्देशित किया कि 7 अप्रैल 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए ताकि मामले को जल्द से जल्द सुलझाया जा सके।
राजस्व विभाग ने पूरी की सीमांकन प्रक्रिया
राजस्व विभागके अनुसार, निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाई गई:
- उत्पल सिंह ने 22 अप्रैल 2025 को धारा 41 एल.आर. एक्ट के तहत आवेदन किया था।
- 26 जुलाई 2025 को जांच आख्या प्रस्तुत की गई।
- 25 सितंबर 2025 को दोनों पक्षों को सीमांकन की सूचना दी गई।
- अंततः 11 मार्च 2026 को मौजा बक्सरवाला में खसरा संख्या 132क, 138ख और 139 का सीमांकन कार्य पूरा किया गया।
कानूनी राय भी ली गई
यहां तक कि जिला शासकीय अधिवक्ता (दीवानी), देहरादून ने भी विधिक राय दी जिसमें यह सुझाव दिया गया कि:
- उचित प्राधिकारी द्वारा चिन्हांकन/निशानदेही सुनिश्चित की जाए।
- अगर आवश्यक हो, तो पुलिस प्रशासन की सहायता से कानूनी कार्रवाई भी की जाए।
भूमि का विवरण
- खसरा संख्या: 139
- क्षेत्रफल: 0.4120 हेक्टेयर
- क्रय तिथि: 04 मार्च 1993
जनता दरबार बना समाधान का प्लेटफॉर्म
जिलाधिकारी के त्वरित हस्तक्षेप से न केवल भूमि विवाद का समाधान किया गया, बल्कि जनता दरबार में :
- शिक्षा
- स्वास्थ्य उपचार
- रोजगार
- बिल और ऋण माफी
जैसी महत्वपूर्ण समस्याओं का भी मौके पर समाधान किया जा रहा है। यह मामला इस बात का उदाहरण है कि प्रशासन की सक्रियता और जनता दरबार की उपयोगिता कैसे नागरिकों को राहत प्रदान कर सकती है।
इस मामले के सफल समाधान ने दिखा दिया है कि जब सरकारी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी उठाते हैं, तो कैसे समाज के मूलभूत समस्याओं का समाधान संभव हो सकता है।
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सादर,
टीम द ओड नारी
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