एसआरएचयू में अंतरराष्ट्रीय मातृ पृथ्वी दिवस का सफल आयोजन

The post एसआरएचयू में अंतरराष्ट्रीय मातृ पृथ्वी दिवस मनाया गया appeared first on Avikal Uttarakhand. धरती भी इंसान की तरह संवेदनशील संतुलन बिगड़ा तो आती हैं आपदाएं अविकल उत्तराखंड डोईवाला। स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) जौलीग्रांट में अंतरराष्ट्रीय मातृ पृथ्वी दिवस मनाया गया। कार्यक्रम का… The post एसआरएचयू में अंतरराष्ट्रीय मातृ पृथ्वी दिवस मनाया गया appeared first on Avikal Uttarakhand.

Apr 22, 2026 - 18:38
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एसआरएचयू में अंतरराष्ट्रीय मातृ पृथ्वी दिवस का सफल आयोजन
एसआरएचयू में अंतरराष्ट्रीय मातृ पृथ्वी दिवस का सफल आयोजन

एसआरएचयू में अंतरराष्ट्रीय मातृ पृथ्वी दिवस का सफल आयोजन

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कम शब्दों में कहें तो, स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) ने जौलीग्रांट में अंतरराष्ट्रीय मातृ पृथ्वी दिवस का सफल आयोजन किया, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण कदम है।

डोईवाला में स्थित एसआरएचयू में अंतरराष्ट्रीय मातृ पृथ्वी दिवस के अवसर पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मुख्य रूप से पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इसके संरक्षण के प्रति समाज की जिम्मेदारी को चिन्हित करने के लिए आयोजित किया गया था।

कार्यक्रम की जानकारी

यह कार्यक्रम बुधवार को रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजेंद्र डोभाल ने छात्रों और शोधकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज का समय पर्यावरण संरक्षण को केवल एक विकल्प के रूप में नहीं देख सकता, बल्कि यह हमारी जिम्मेदारी बन चुका है। डॉ. डोभाल ने सभी से यह आग्रह किया कि वे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रकृति के संरक्षण में योगदान दें।

विशेष वक्ता का संदेश

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता भू वैज्ञानिक एवं वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के पूर्व निदेशक डॉ. बलदेव राज अरोड़ा थे। उन्होंने अपने संदेश में बताया कि मातृ पृथ्वी एक स्वास्थ्य प्रदाता है और इसका संरक्षण मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। डॉ. अरोड़ा ने पृथ्वी की तुलना मानव शरीर से करते हुए उदाहरण दिया कि जिस तरह मानव शरीर तापमान के उतार-चढ़ाव पर प्रतिक्रिया करता है, उसी प्रकार पृथ्वी भी तापमान के बदलाव पर अपनी प्रतिक्रिया देती है।

उन्होंने आगे कहा कि प्राकृतिक प्रक्रियाओं में किसी भी प्रकार का व्यवधान आने पर इससे प्राकृतिक आपदाएं उत्पन्न होती हैं। इस संदर्भ में, उन्होंने उपस्थित लोगों को प्रकृति की सुरक्षा के लिए कार्य करने का संदेश दिया।

उपस्थित लोगों का सक्रिय योगदान

कार्यक्रम के दौरान, डायरेक्टर रिसर्च डॉ. बिन्दू डे ने भी उपस्थित लोगों को इस दिवस को मनाने के महत्व के बारे में बताया। विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए एक संकल्प लिया और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझा।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. पुरांधी रूपमणि ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया और आश्वस्त किया कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रकार, एसआरएचयू ने अंतरराष्ट्रीय मातृ पृथ्वी दिवस को मनाकर एक सकारात्मक संदेश दिया है कि हमें अपनी मातृ पृथ्वी की रक्षा करने की जिम्मेदारी लेनी होगी।

अधिक जानकारी के लिए, यहाँ क्लिक करें.

सादर,
टीम द ऑड नारी

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