हिमालय की कला: चित्र प्रदर्शनी का अद्भुत अनुभव
The post हिमालय से साक्षात्कार करती चित्र प्रदर्शनी का शुभारम्भ appeared first on Avikal Uttarakhand. अविकल उत्तराखंड देहरादून। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में शुक्रवार की शाम जर्मन के श्लागिंटवाईट बन्धुओं की निर्मित 170 साल पुराने चित्रों की प्रदर्शनी का शुभारम्भ हुआ। पहाड़ संस्था के… The post हिमालय से साक्षात्कार करती चित्र प्रदर्शनी का शुभारम्भ appeared first on Avikal Uttarakhand.
हिमालय की कला: चित्र प्रदर्शनी का अद्भुत अनुभव
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कम शब्दों में कहें तो देहरादून में दून पुस्तकालय में एक अद्वितीय चित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ है, जहां 170 साल पुराने चित्र हिमालय के दृश्य और इतिहास को प्रस्तुत करते हैं।
देहरादून: दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में एक खास मौके पर, जर्मन के श्लागिंटवाईट बन्धुओं द्वारा निर्मित 170 साल पुराने चित्रों की प्रदर्शनी का शानदार शुभारंभ किया गया। यह प्रदर्शनी शुक्रवार की शाम को आयोजित की गई, जिसमे पहाड़ संस्था के प्रो. शेखर पाठक की महत्वपूर्ण पहल रही।
इस प्रदर्शनी में हिमालय के चित्र आम लोगों के बीच अवलोकन के लिए लाए गए हैं, जो जर्मनी के म्यूनिख संग्रहालय से बाहर आए हैं। इस उत्कृष्ट कार्य में जर्मन चित्रकारों के परिवार के विभिन्न सदस्य जैसे प्रो. हरमन क्रुत्जमैन, स्टेफनी क्लेइट और स्टीफन रिट्टर का विशेष योगदान रहा है।
हिमालय के चित्रों की इस प्रदर्शनी का आरंभ दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर से हुआ, और अब इसे देहरादून के दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में प्रदर्शित किया जा रहा है। इस प्रदर्शनी के बाद, ये चित्र नैनीताल के सीआरएसटी कॉलेज में भी दिखाए जाएंगे। यहां दर्शक जम्मू-कश्मीर से लेकर बदरीनाथ, केदारनाथ, मिलम, सुंदरढूंगा, नैनीताल और दार्जिलिंग तक के ऐतिहासिक दृष्टांतों का अवलोकन कर सकेंगे।
इस कार्यक्रम में प्रो. शेखर पाठक और प्रो. हरमन क्रुत्जमैन ने चित्रों और उनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर अपने विचार साझा किए। प्रो. पाठक ने बताया कि यह प्रदर्शनी का विचार सितंबर 2015 में एक संगोष्ठी के दौरान आया, जब उन्होंने म्यूनिख में श्लागिंटवाईट के अभियानों पर चर्चा की।
कार्यक्रम में दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के संस्थापक प्रो. बी.के. जोशी ने अतिथि वक्ताओं तथा दर्शकों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी इतिहासकारों, भूगोलविदों और समाज विज्ञानियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण साबित होगी।
एन. रविशंकर ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि इस प्रकार की कलापूर्ण बहस समाज में नई जानकारी और दृष्टिकोण लाने में मदद करती है। कार्यक्रम में सर्वे ऑफ इंडिया के अतिरिक्त सर्वेयर संदीप श्रीवास्त ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
प्रदर्शनी तक जाने का समय
यह प्रदर्शनी 1 से 8 मई, 2026 तक दून पुस्तकालय के तृतीय तल में प्रातः 11 बजे से शाम 6:30 बजे तक आम जनता के लिए मुफ्त में खुली रहेगी।
आज के इस समारोह के दौरान, कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रशेखर तिवारी ने चित्रों पर संक्षिप्त जानकारी प्रदान की, जबकि डॉ. लोकेश ओहरी ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया। कार्यक्रम में लोक कलाकार रामचरण जुयाल ने मोंछंग बजाकर सभी को आनंदित किया।
इस अवसर पर कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने भाग लिया, जिसमें पूर्व सचिव उत्तराखंड, नृप सिंह नपलच्याल, डॉ. पंकज नैथानी, और अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल थे। इस कार्यक्रम ने उपस्थित सभी लोगों के लिए एक जानकारी पूर्ण और प्रेरणादायक अनुभव प्रदान किया।
प्रदर्शनी को लेकर लोगों में बहुत रुचि देखने को मिल रही है, जिसमें सैकड़ों लोगों द्वारा सीधे साक्षात्कार पर विशिष्ट ध्यान दिया गया है।
इस अद्भुत प्रदर्शनी के माध्यम से, लोगों को हिमालय के समृद्ध इतिहास, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्यता का उत्सव मनाने का एक मौका मिलता है। यही नहीं, प्रदर्शनी के चित्रों में उन स्थानों की कहानियाँ भी छिपी हैं जिनके प्रति लोग आज भी जिज्ञासु हैं।
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टीम द ओड नारी
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