उत्तराखंड: जनसुनवाई में शिकायत के निस्तारण पर आयुक्त दीपक रावत ने लौटाए 15.50 लाख रुपये

नैनीताल। जनसुनवाई में उठाए गए एक भूमि विवाद के मामले में कुमाऊं आयुक्त एवं मुख्यमंत्री

Jun 6, 2026 - 00:38
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उत्तराखंड: जनसुनवाई में शिकायत के निस्तारण पर आयुक्त दीपक रावत ने लौटाए 15.50 लाख रुपये
उत्तराखंड: जनसुनवाई में शिकायत के निस्तारण पर आयुक्त दीपक रावत ने लौटाए 15.50 लाख रुपये

उत्तराखंड: जनसुनवाई में शिकायत के निस्तारण पर आयुक्त दीपक रावत ने लौटाए 15.50 लाख रुपये

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कम शब्दों में कहें तो, नैनीताल में जनसुनवाई के दौरान एक भूमि विवाद से जुड़े मामले में आयुक्त दीपक रावत ने उपायुक्त की जिम्मेदारी निभाते हुए एक पीड़ित को 15 लाख 50 हजार रुपये वापस दिलाने का प्रयास किया। यह कदम न केवल पीड़ित के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण था, बल्कि यह सरकारी तंत्र की प्रभावशीलता का भी प्रतीक था।

भूमि विवाद की पृष्ठभूमि

हल्द्वानी निवासी संजय जनोटी ने भीमताल क्षेत्र के ढूंगसील गांव में एक भूमि खरीदने के लिए पुष्पा पांडे के साथ अनुबंध किया था। संजय ने भूमि खरीद के लिए गूगल पे के माध्यम से 15 लाख 50 हजार रुपये की राशि पुष्पा पांडे के खाते में ट्रांसफर की थी। हालांकि, बाद में संजय को यह महसूस हुआ कि भूमि का सौदा वैध नहीं था, जिससे उन्हें नुकसान हुआ।

जनसुनवाई में उठाई गई शिकायत

इस भूमि विवाद को लेकर संजय ने जनसुनवाई में अपनी शिकायत प्रस्तुत की। जनसुनवाई का आयोजन कुमाऊं आयुक्त कार्यालय द्वारा किया गया था, जहां दीपक रावत स्वयं उपस्थित थे। उनकी सक्रियता और समस्या निवारण के लिए तत्परता ने इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आयुक्त की पहल

आयुक्त दीपक रावत ने मामले की गंभीरता को समझते हुए त्वरित कदम उठाया। उन्होंने संबंधित पक्षों से बातचीत की और मामले की जांच के बाद पीड़ित को उसके पैसे वापस दिलाने का निर्णय लिया। यह भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी की सक्रियता को दर्शाता है, जो पीड़ित के अधिकारों की रक्षा में सामने आते हैं।

निष्कर्ष

इस मामले ने दिखाया है कि जब सरकारी कर्मचारियों की निष्क्रियता और नागरिकों के अधिकारों का सम्मान किया जाता है, तब समाज में एक सकारात्मक बदलाव हो सकता है। आयुक्त दीपक रावत की पहल ने न केवल संजय को न्याय दिलाया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि जनसुनवाई असीमित समस्याओं को सुलझाने के लिए एक प्रभावी मंच है।

इस प्रकार की कार्रवाई से यह उम्मीद की जा सकती है कि आगे चलकर और भी नागरिक अपनी समस्याएँ उजागर करने में संकोच नहीं करेंगे। ऐसे मामलों का प्रभावी समाधान जिम्मेदार सरकारी तंत्र की पहचान है।

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टीम द ओड नारी

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